नीमच में पेयजल संकट पर कोर्ट का कड़ा हंटर: विशेष टीम ने इंदिरा नगर से भरे नमूने, सागर लैब में होगा ‘नीमच पानी का सेम्पल परीक्षण’

simple test indra nagar

नीमच। नीमच पानी का सेम्पल परीक्षण शहर के गली-मोहल्लों में पिछले काफी समय से नलों के माध्यम से पहुँच रहे ‘जहरीले’ और गंदे पानी के गंभीर मुद्दे पर अब माननीय न्यायालय ने मोर्चा संभाल लिया है। शुक्रवार को नीमच के इंदिरा नगर क्षेत्र में उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब कोर्ट द्वारा गठित एक उच्च स्तरीय विशेष टीम अचानक पानी की गुणवत्ता जांचने गलियों में उतरी। इस टीम का मुख्य उद्देश्य नीमच पानी का सेम्पल परीक्षण कर जनता को यह बताना है कि जो पानी वे पी रहे हैं, वह उनके स्वास्थ्य के लिए कितना सुरक्षित है।

Shubham Solar Solution

नीमच पानी का सेम्पल परीक्षण:क्यों पड़ी कोर्ट को हस्तक्षेप की जरूरत?

नीमच पानी का सेम्पल परीक्षण ,शहर के कई रिहायशी इलाकों, विशेषकर न्यू इंदिरा नगर और चमत्कारी बालाजी मंदिर क्षेत्र के निवासियों ने प्रशासन के सामने गुहार लगाकर थक चुके थे। नलों में मटमैला, बदबूदार और दूषित पानी सप्लाई होना एक आम बात हो गई थी। स्थानीय नगरपालिका प्रशासन की इस घोर लापरवाही को देखते हुए अधिवक्ता वसीम नाज ने जनहित में न्यायालय के समक्ष एक परिवाद दायर किया था। नागरिकों के मौलिक स्वास्थ्य अधिकार से खिलवाड़ होता देख कोर्ट ने तत्काल एक निष्पक्ष जांच समिति का गठन किया। इसी समिति ने शुक्रवार को नीमच पानी का सेम्पल परीक्षण की प्रक्रिया का विधिवत आगाज़ किया।

ग्राउंड जीरो पर कार्रवाई: सीधे नलों से लिए गए सैंपल

शुक्रवार सुबह जब यह विशेष टीम इंदिरा नगर पहुँची, तो क्षेत्रवासियों में कौतूहल और राहत दोनों के भाव देखे गए। टीम ने किसी स्टोर किए हुए पानी के बजाय सीधे नगरपालिका की मुख्य पाइपलाइन से जुड़े नलों को खुलवाया और पानी के नमूने एकत्र किए। नीमच पानी का सेम्पल परीक्षण की यह प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ की गई ताकि किसी भी स्तर पर हेरफेर की गुंजाइश न रहे।

नगरपालिका के वरिष्ठ केमिस्ट सुरेश पवार और सिविल सर्जन डॉ. महेंद्र पाटिल की तकनीकी निगरानी में पानी के भौतिक और रासायनिक गुणों को परखा गया। इस दौरान टीम ने तीन अलग-अलग घरों से रैंडम आधार पर पानी के सैंपल लिए, जिन्हें सील बंद कर दिया गया है। इन नमूनों को अब मध्य प्रदेश की सबसे भरोसेमंद ‘सागर प्रयोगशाला’ (Sagar Lab) भेजा जा रहा है।

इन तीन मानकों पर टिकी है जांच की रिपोर्ट

विशेषज्ञों के अनुसार, नीमच पानी का सेम्पल परीक्षण मुख्य रूप से तीन महत्वपूर्ण बिंदुओं पर केंद्रित है:

  1. टर्बिडिटी (Turbidity): पानी में मौजूद मिट्टी, गाद और अन्य बारीक अशुद्धियों का स्तर।

  2. क्लोरीन लेवल: क्या नगरपालिका पानी को कीटाणुमुक्त करने के लिए मानक मात्रा में क्लोरीन का उपयोग कर रही है?

  3. बैक्टीरियोलॉजिकल टेस्ट: क्या पानी में सीवेज या नाली का गंदा पानी मिल रहा है, जिससे ई-कोलाई जैसे घातक बैक्टीरिया पनप सकते हैं?

प्रशासनिक लापरवाही पर उठे सवाल

जांच दल में शामिल अधिवक्ता महेश पाटीदार और पार्षद हरगोविंद दीवान ने बताया कि हाल ही में कलेक्टर कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई में भी न्यू इंदिरा नगर के निवासियों ने गंदे पानी की शिकायत दर्ज कराई थी। कोर्ट की इस सक्रियता ने नगरपालिका के जल विभाग के दावों की पोल खोल दी है। इस टीम में कमलेश पाटीदार, दुर्गाशंकर भील और मुकेश पोरवाल जैसे जिम्मेदार नागरिक भी शामिल थे, जिन्होंने मौके पर ही पंचनामा तैयार किया।

बीमारियों का घर बन रहा दूषित जल

स्थानीय रहवासियों का कहना है कि दूषित पानी के कारण बच्चों और बुजुर्गों में पेट की बीमारियाँ, टाइफाइड और त्वचा संबंधी रोग तेजी से फैल रहे हैं। नीमच पानी का सेम्पल परीक्षण की मांग इसीलिए भी उठ रही थी क्योंकि लोगों का भरोसा सिस्टम से उठने लगा था। अब सागर लैब से आने वाली रिपोर्ट ही यह तय करेगी कि नीमच की जनता को मिलने वाला पानी ‘अमृत’ है या ‘धीमा जहर’।

अगले शुक्रवार को अन्य क्षेत्रों की बारी

न्यायालय द्वारा गठित इस समिति ने स्पष्ट कर दिया है कि यह अभियान केवल इंदिरा नगर तक सीमित नहीं रहेगा। अगले शुक्रवार को शहर के अन्य प्रभावित इलाकों, जैसे स्कीम नंबर 7, स्कीम नंबर 9 और बघाना क्षेत्र में भी नीमच पानी का सेम्पल परीक्षण किया जाएगा। टीम ने अधिकारियों को सख्त हिदायत दी है कि जांच रिपोर्ट आने तक सप्लाई में किसी भी तरह की कोताही न बरती जाए।

अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि यदि सागर लैब की रिपोर्ट में पानी की गुणवत्ता खराब पाई जाती है, तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों पर न केवल आर्थिक दंड लगाया जाएगा, बल्कि उन पर आपराधिक मामले भी दर्ज किए जा सकते हैं।


यह भी पढ़ें: चांदी 2 दिन में 24 हजार टूटी, सोना भी ₹1.52 लाख के करीब; क्या निवेश का सही समय आ गया?

हो सकता है आप चूक गए हों