नीमच की प्रेमलता का कमाल: गृहणी से बनीं फैक्ट्री मालकिन, PMFME Scheme ने बदली किस्मत

PMFME Scheme

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नीमच (बमोरा)। PMFME Scheme आज के दौर में जहां नौकरियां सीमित हो गई हैं, वहीं खुद का व्यवसाय शुरू कर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में लोग तेजी से आगे आ रहे हैं। इस बदलाव में महिलाएं भी पुरुषों से पीछे नहीं हैं। मध्य प्रदेश के नीमच जिले से एक ऐसी ही शानदार सफलता की कहानी सामने आई है, जो हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है जो अपना खुद का बिजनेस शुरू करने का सपना देखता है।

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नीमच विकासखंड के छोटे से गांव बमोरा की रहने वाली एक साधारण गृहणी श्रीमती प्रेमलता पाटीदार ने PMFME Scheme (प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना) का लाभ उठाकर सफलता की एक नई इबारत लिख दी है। आज वे सिर्फ घर की चारदीवारी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि एक सफल महिला उद्यमी के रूप में हर महीने लाखों रुपये की कमाई कर रही हैं।

चूल्हे-चौके से निकलकर बनीं सफल उद्यमी

एक समय था जब प्रेमलता पाटीदार का दिन घर के कामों और चूल्हे-चौके में ही बीत जाता था। लेकिन उनके मन में हमेशा से कुछ अपना करने और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की चाह थी। उनकी यह तलाश उद्यानिकी विभाग के सहयोग से पूरी हुई, जब उन्हें केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी PMFME Scheme के बारे में पता चला।

इस योजना के तहत उन्होंने खाद्य तेल प्रसंस्करण (Food Oil Processing) उद्योग स्थापित करने का मन बनाया। सही मार्गदर्शन और मजबूत इच्छाशक्ति के दम पर उन्होंने ‘बालाजी उद्योग’ के नाम से अपनी खुद की तेल प्रसंस्करण इकाई शुरू की, जो आज सफलतापूर्वक संचालित हो रही है।

20 लाख का लोन और 8 लाख से ज्यादा की सब्सिडी

PMFME Scheme
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किसी भी उद्योग को शुरू करने में सबसे बड़ी बाधा पूंजी की होती है, लेकिन प्रेमलता जी के लिए यह योजना वरदान साबित हुई। उन्होंने PMFME Scheme के अंतर्गत अपना प्रोजेक्ट तैयार किया और भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की जीरन शाखा में आवेदन किया। बैंक ने उनके प्रोजेक्ट की क्षमता को देखते हुए उद्योग स्थापित करने के लिए 20 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत किया।

इस योजना की सबसे खास बात यह है कि इसमें सरकार की तरफ से भारी सब्सिडी दी जाती है। प्रेमलता जी को भी मध्य प्रदेश शासन की ओर से 8.26 लाख रुपये का अनुदान (Subsidy) प्राप्त हुआ। कुल 23.61 लाख रुपये की लागत से उन्होंने अपनी खुद की अत्याधुनिक खाद्य तेल प्रसंस्करण इकाई खड़ी कर दी।

‘गोपाल कृष्ण’ ब्रांड के नाम से बेच रही हैं शुद्ध तेल

आज प्रेमलता पाटीदार अपने उद्योग में नारियल तेल का प्रसंस्करण कर रही हैं। उन्होंने बाज़ार में अपनी एक अलग पहचान बनाने के लिए अपने उत्पाद का ब्रांड नेम ‘गोपाल कृष्ण (कोकोनट ऑयल)’ पंजीकृत करवाया है। शुद्धता और गुणवत्ता के कारण बाजार में उनके तेल की मांग लगातार बढ़ रही है।

जानकारी के अनुसार, वर्तमान में उनके बालाजी लघु उद्योग का मासिक टर्नओवर लगभग 8 से 10 लाख रुपये तक पहुंच गया है। सभी खर्च और लागत निकालकर वे इस व्यवसाय से हर महीने 2 से 3 लाख रुपये की शुद्ध आय प्राप्त कर रही हैं।

दूसरों को भी दे रही हैं रोजगार

एक सफल उद्यमी की पहचान सिर्फ उसकी कमाई से नहीं होती, बल्कि इस बात से होती है कि वह समाज को क्या दे रहा है। प्रेमलता पाटीदार ने PMFME Scheme का फायदा उठाकर न केवल खुद को आर्थिक रूप से सशक्त किया है, बल्कि गांव के 5 से 7 अन्य स्थानीय लोगों को भी अपनी फैक्ट्री में पक्का रोजगार उपलब्ध कराया है। आज वे अपने परिवार के साथ-साथ अपने क्षेत्र की समृद्धि में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।

नीमच जिला बना योजना के क्रियान्वयन में अग्रणी

नीमच जिले में उद्यमशीलता का यह माहौल स्थानीय प्रशासन की सक्रियता का ही नतीजा है। कलेक्टर श्री हिमांशु चंद्रा के कुशल मार्गदर्शन में नीमच जिले में PMFME Scheme का शानदार तरीके से क्रियान्वयन हो रहा है। प्रशासन द्वारा लगातार लोगों को इस योजना के प्रति जागरूक किया जा रहा है और बैंक से लोन दिलाने में उनकी मदद की जा रही है।

आंकड़ों पर नजर डालें तो नीमच जिले में इस योजना के तहत अब तक कुल 210 हितग्राहियों को लाभान्वित किया जा चुका है। अकेले मौजूदा वित्तीय वर्ष में 125 हितग्राहियों को इस योजना का लाभ दिलाकर जिले में नई औद्योगिक इकाइयां स्थापित करवाई गई हैं।

यही कारण है कि इस योजना को धरातल पर उतारने में नीमच जिला प्रदेश और संभाग के अग्रणी जिलों की सूची में शामिल हो गया है। प्रेमलता पाटीदार की यह कहानी साबित करती है कि अगर सही सरकारी योजना का लाभ उठाया जाए और मेहनत की जाए, तो कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है।


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