Sanwaliya Seth Darshan: नए साल के पहले दिन श्री सांवलिया सेठ मंदिर में उमड़ी ऐतिहासिक भीड़, दर्शन के लिए घंटों का इंतजार

Sanwaliya Seth Darshan

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8 लाख श्रद्धालुओं ने टेका मत्था सुबह 4 बजे से 5 किमी लंबी लाइन, नेटवर्क भी फेल

चित्तौड़गढ़: साल 2026 के पहले सूरज की पहली किरण के साथ ही मेवाड़ के प्रसिद्ध कृष्ण धाम श्री सांवलिया सेठ मंदिर में आस्था का ऐसा समंदर उमड़ा कि प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। Sanwaliya Seth Darshan के लिए नए साल के पहले ही दिन लाखों की संख्या में श्रद्धालु चित्तौड़गढ़ पहुँचे। आलम यह था कि कड़ाके की ठंड के बावजूद श्रद्धालु रात 2 बजे से ही मंदिर के बाहर जुटना शुरू हो गए थे और अलसुबह 4 बजे तक मंदिर के द्वार से लेकर मुख्य सड़क तक कई किलोमीटर लंबी कतारें लग गईं।

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अलसुबह से ही ‘सांवरा’ के जयकारों की गूंज

नए साल की शुरुआत Sanwaliya Seth Darshan करने की चाहत भक्तों को सात समंदर पार से खींच लाई है। Sanwaliya Seth Darshan की महत्ता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मंदिर के पट खुलने से पहले ही श्रद्धालुओं का धैर्य जवाब नहीं दे रहा था। जैसे ही मंदिर के द्वार खुले, पूरा परिसर “हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की” और “सांवरिया सेठ की जय” के जयकारों से गुंजायमान हो उठा।

भीड़ का दबाव इतना अधिक था कि मंदिर प्रशासन को कतारें व्यवस्थित करने के लिए अतिरिक्त बैरिकेडिंग लगानी पड़ी। कई श्रद्धालु तो नए साल के स्वागत के लिए एक दिन पहले ही मांडफिया (सांवलिया धाम) पहुँच चुके थे, ताकि उन्हें साल की पहली आरती में शामिल होने का सौभाग्य मिल सके।

नेटवर्क जाम: अपनों से बिछड़े लोग, संपर्क हुआ मुश्किल

भीड़ का असर सिर्फ जमीन पर ही नहीं, बल्कि संचार व्यवस्था पर भी दिखाई दिया। मंदिर परिसर और उसके आसपास के करीब 5 किलोमीटर के दायरे में मोबाइल नेटवर्क पूरी तरह से ठप हो गया। Sanwaliya Seth Darshan के लिए आए हजारों लोगों के एक साथ सक्रिय होने से टावर ओवरलोड हो गए। स्थिति यह रही कि श्रद्धालु न तो कॉल कर पा रहे थे और न ही इंटरनेट का उपयोग संभव था। इस वजह से कई परिवार भीड़ में एक-दूसरे से अलग हो गए और उन्हें ढूंढने के लिए मंदिर के सूचना केंद्र से बार-बार अनाउंसमेंट करवानी पड़ी। प्रशासन ने इसे तकनीकी चुनौती मानते हुए भक्तों से धैर्य बनाए रखने की अपील की।

घंटों का इंतजार, लेकिन चेहरे पर मुस्कान

प्रबंधन की रिपोर्ट के अनुसार, Sanwaliya Seth Darshan के लिए कतार में लगे भक्तों को मंदिर के भीतर पहुँचने में ही औसतन 2 से 3 घंटे का समय लग रहा था। मुख्य गेट से ठाकुर जी की प्रतिमा के दर्शन तक का सफर तय करने में भक्तों का पसीना छूट गया। शाम होने तक भी भीड़ में कोई कमी नहीं आई। राजस्थान के अलावा मध्य प्रदेश, गुजरात, और महाराष्ट्र से निजी वाहनों और बसों के जरिए हजारों की तादाद में लोग पहुंचे। स्थानीय दुकानदारों के अनुसार, पिछले 5 वर्षों में नए साल पर ऐसी भीड़ पहले कभी नहीं देखी गई।

प्रशासनिक मुस्तैदी: 5 बजे ही मोर्चे पर पहुँचीं CEO

भीड़ को नियंत्रित करने और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। मंदिर मंडल की CEO और ADM प्रशासन प्रभा गौतम सुबह 5 बजे से पहले ही मंदिर परिसर में मौजूद रहीं। सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए पुलिस जाब्ता तैनात किया गया था। दर्शनार्थियों के सुचारु आवागमन के लिए सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जा रही थी। Sanwaliya Seth Darshan की व्यवस्था को लेकर प्रशासन ने पार्किंग के अलग इंतजाम किए थे ताकि मुख्य मार्ग पर जाम की स्थिति न बने।

कोरोना के बाद बदली आस्था की लहर

धार्मिक जानकारों का मानना है कि कोरोना काल के बाद लोगों का आध्यात्मिक झुकाव काफी बढ़ा है। सांवलिया सेठ, जिन्हें ‘व्यापार का देवता’ भी माना जाता है, के प्रति व्यापारियों और युवाओं में विशेष क्रेज देखा जा रहा है। यही वजह है कि साल के पहले दिन अपने व्यापार और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना लेकर लोग यहाँ पहुँच रहे हैं। Sanwaliya Seth Darshan का अनुभव लेने आए भक्तों का कहना था कि भगवान के दरबार में जो शांति मिलती है, वह दुनिया के किसी भी कोने में नहीं है।

भव्य सजावट ने मोहा मन

नए साल को खास बनाने के लिए मंदिर को विदेशी फूलों और रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया गया था। रात के समय मंदिर की आभा किसी महल जैसी नजर आ रही थी। Sanwaliya Seth Darshan के बाद भक्त परिसर में सेल्फी लेते और इस पल को यादगार बनाते दिखे। मंदिर प्रशासन ने सुलभ दर्शन के लिए विशेष गलियारों का निर्माण किया था, जिससे बुजुर्गों और दिव्यांगों को कम परेशानी हो।


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