पसीने की कीमत मौत! मजदूरी विवाद में मारपीट के बाद बुजुर्ग की संदिग्ध मौत? Neemuch Crime Case Update
Reported by: News Desk | Edited by: आकाश शर्मा
01 जनवरी 2026, (अपडेटेड 01 जनवरी 2026, 6:24 अपराह्न IST)

नीमच (The Times of MP): मध्य प्रदेश के नीमच जिले से एक रूह कंपा देने वाली खबर सामने आई है। यहाँ मजदूरी के चंद रुपयों के विवाद ने एक गरीब परिवार की खुशियाँ उजाड़ दीं। Neemuch Crime Case Update में आज हम उस सिस्टम की पोल खोलेंगे, जिसने समय रहते एक पीड़ित की गुहार नहीं सुनी। जीरन थाना क्षेत्र के ग्राम हरवार में 63 वर्षीय मोहनलाल धानुक की संदिग्ध मौत ने पूरे क्षेत्र की कानून-व्यवस्था को कठघरे में खड़ा कर दिया है।

विवाद की जड़: पसीने की कमाई और दबंगई

यह पूरी कहानी शुरू होती है ईमानदारी और मेहनत की मजदूरी से। मोहनलाल, जो उम्र के इस पड़ाव पर भी अपने परिवार के लिए मेहनत कर रहे थे, उनका विवाद अहमदपुरा के रहने वाले दिनेश, उसके भाई भैरू और एक अन्य साथी के साथ हुआ। विवाद का कारण सिर्फ इतना था कि मोहनलाल अपनी रुकी हुई मजदूरी के पैसे मांग रहे थे।

इस Neemuch Crime Case Update की पड़ताल में पता चला कि आरोपियों ने पैसे देने के बजाय मोहनलाल को उनके ही घर में घुसकर बेरहमी से पीटा। एक 63 साल के बुजुर्ग पर तीन लोगों का हमला न केवल कायरता है, बल्कि कानून को सरेआम चुनौती देना भी है। इस मारपीट में मोहनलाल को गंभीर चोटें आई थीं।

खाकी पर लगे 3 संगीन आरोप: सिस्टम की विफलता?

जब रक्षक ही मौन हो जाए, तो आम आदमी कहाँ जाए? परिजनों ने जीरण पुलिस पर तीन ऐसे आरोप लगाए हैं जो बेहद शर्मनाक हैं:

  1. एफआईआर में देरी: परिजनों का दावा है कि मारपीट के तुरंत बाद वे शिकायत लेकर थाने गए थे, लेकिन पुलिस ने इसे “छोटा विवाद” बताकर पल्ला झाड़ लिया।

  2. आरोपियों को संरक्षण: शिकायत के बावजूद पुलिस ने आरोपियों को पकड़ना तो दूर, उनसे पूछताछ तक करना मुनासिब नहीं समझा।

  3. न्याय की अनदेखी: पुलिस की इस सुस्ती ने आरोपियों के हौसले बढ़ाए और पीड़ित परिवार को डराया-धमकाया गया।

Neemuch Crime Case Update में यह लापरवाही अब जीरण पुलिस के लिए गले की फांस बनती जा रही है।

अस्पताल में टूटा मौत का पहाड़

मारपीट के बाद से ही मोहनलाल की सेहत गिरती चली गई। गुरुवार की सुबह अचानक उनकी हालत इतनी बिगड़ी कि वे अचेत हो गए। आनन-फानन में उन्हें जिला अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों की “Dead on Arrival” की रिपोर्ट ने परिवार के पैरों तले जमीन खिसका दी। अस्पताल के मुर्दाघर के बाहर परिजनों का विलाप सिस्टम की संवेदनहीनता को बयां कर रहा था।

गुस्से से भरे परिजनों ने अस्पताल में ही विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। उनका एक ही सवाल था— “अगर पुलिस समय पर आरोपियों को जेल भेज देती, तो क्या मोहनलाल आज हमारे बीच नहीं होते?”

क्या कहती है पुलिस? सिर्फ मर्ग या होगी कड़ी कार्रवाई?

मामला गर्म होते देख अब पुलिस के आला अधिकारी अपनी सफाई पेश कर रहे हैं। पुलिस का कहना है कि उन्होंने ‘मर्ग’ कायम कर लिया है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतज़ार है। लेकिन यहाँ बड़ा सवाल यह है कि क्या पोस्टमार्टम की रिपोर्ट उस दर्द को नाप पाएगी जो एक बुजुर्ग ने पिछले कई दिनों से सहा था?

Neemuch Crime Case Update के तहत यह स्पष्ट है कि जब तक पुलिस विभाग के लापरवाह कर्मचारियों पर एक्शन नहीं होता और आरोपियों को फांसी जैसी सजा नहीं मिलती, तब तक जनता का आक्रोश शांत नहीं होगा।


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Aakash Sharma
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आकाश शर्मा मध्यप्रदेश के नीमच क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार और द टाइम्स ऑफ MP के संपादक हैं। उन्हें प्रिंट मीडिया में 12 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव है। लंबे समय से स्थानीय एवं जनसरोकार से जुड़े मुद्दों की रिपोर्टिंग, समाचार संपादन और समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उन्होंने स्थानीय पत्रकारिता में व्यापक अनुभव हासिल किया है।द टाइम्स ऑफ MP के माध्यम से आकाश शर्मा नीमच, मंदसौर और आसपास के क्षेत्रों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को पाठकों तक पहुंचाने का कार्य करते हैं। उनकी कवरेज में स्थानीय प्रशासन, पुलिस एवं कानून-व्यवस्था, जनसमस्याएं, नागरिक सुविधाएं, राजनीति, सामाजिक गतिविधियां, शिक्षा, कृषि, व्यापार और अन्य जनहित से जुड़े विषय शामिल हैं।उनकी संपादकीय कार्यशैली में तथ्यपरक रिपोर्टिंग, स्रोत-आधारित जानकारी, निष्पक्ष प्रस्तुति और जिम्मेदार पत्रकारिता को प्राथमिकता दी जाती है। संवेदनशील और अपराध से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग में आरोप और प्रमाणित तथ्य के बीच अंतर बनाए रखने तथा उपलब्ध आधिकारिक एवं विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर खबर प्रस्तुत करने पर विशेष ध्यान दिया जाता है।पत्रकारिता के साथ आकाश शर्मा पिछले 4 वर्षों से पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में भी कार्य कर रहे हैं। इस भूमिका में वे कानूनी जागरूकता और जनहित से जुड़े कार्यों से जुड़े रहे हैं। इसके साथ ही वे इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशन में जिला उपाध्यक्ष (District Vice President) के दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं।अनुभव 12 वर्ष — प्रिंट मीडिया एवं पत्रकारिता का अनुभव 4 वर्ष — पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में अनुभव संपादक — द टाइम्स ऑफ MP जिला उपाध्यक्ष — इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशनआकाश शर्मा का उद्देश्य स्थानीय स्तर की महत्वपूर्ण सूचनाओं को विश्वसनीय, स्पष्ट, तथ्यपरक और जिम्मेदार पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाना तथा आम नागरिकों से जुड़े मुद्दों को प्रभावी मंच प्रदान करना है।विशेषज्ञता: स्थानीय पत्रकारिता | प्रिंट मीडिया | समाचार संपादन | डिजिटल पत्रकारिता | स्थानीय समाचार रिपोर्टिंग | जनहित के मुद्दे | कानूनी जागरूकता |

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