Shiva Bakers: केक की सजावट बनी गले की फांस, सख्त टुकड़ा निकलने से बालक के मुँह से निकला खून, फूड विभाग की बड़ी कार्रवाई

Shiva Bakers

Shiva Bakers

नीमच। कहने को तो केक खुशियों का प्रतीक होता है, लेकिन नीमच के मशहूर Shiva Bakers ने इस परिभाषा को ही बदल कर रख दिया है। यहाँ केक सिर्फ कटता नहीं है, बल्कि खाने वाले का मुँह भी काट देता है। शहर के एक प्रतिष्ठित परिवार में मासूम बच्चे का जन्मदिन था। गुब्बारे सजे थे, तालियाँ बज रही थीं और मेज पर Shiva Bakers का वह चमचमाता हुआ ‘चॉकलेट ट्रफल केक’ रखा था, जिसे देखकर किसी के भी मुँह में पानी आ जाए। पर किसे पता था कि इस मिठास के पीछे ‘दांत तोड़’ साजिश छिपी है।

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कहानी ‘सिल्वर बॉल्स’ की या ‘लोहे के गोलों’ की?

जैसे ही जन्मदिन के बालक ने बड़े चाव से केक का पहला निवाला लिया, तालियों की गड़गड़ाहट अचानक सन्नाटे में बदल गई। बच्चे के मुँह से ‘आह’ निकली और साथ में निकला खून। परिजनों को लगा शायद बच्चे ने अपनी जीभ काट ली, पर जब केक की ‘पोस्टमार्टम’ जांच हुई, तो सच सामने आया। केक की खूबसूरती बढ़ाने के लिए जो चांदी जैसे चमकते मोती (Edible Beads) लगाए गए थे, वे असल में Shiva Bakers की आधुनिक इंजीनियरिंग का नमूना थे।

ये मोती इतने सख्त थे कि अगर इन्हें खाया जाए, तो शायद यमराज भी अपने दांतों का बीमा करवाने भागें। तकनीकी भाषा में इन्हें ‘Edible’ यानी खाने योग्य कहा जाता है, लेकिन व्यवहार में ये इतने कठोर थे कि इन्हें चबाने के लिए ‘लोहे के जबड़े’ चाहिए। शायद Shiva Bakers ने सोचा होगा कि ग्राहकों के दांत अब हड्डियों के नहीं, बल्कि टाइटेनियम के बने होते हैं।

बेकर हैं या सिविल इंजीनियर?

पीड़ित ग्राहक का आक्रोश सातवें आसमान पर होना लाजिमी था। उनका कहना था कि घर में और भी छोटे बच्चे हैं। गनीमत रही कि इस बड़े बच्चे ने इसे चबाने की कोशिश की, वरना अगर घर के उन ‘नन्हे मुन्नों’ ने इसे बिना चबाए निगल लिया होता जिनके अभी दूध के दांत भी नहीं आए, तो आज जश्न की जगह अस्पताल के चक्कर लग रहे होते।

यहाँ सवाल यह उठता है कि क्या Shiva Bakers अब बेकरी उत्पाद बनाने के बजाय निर्माण सामग्री (Construction Material) की सप्लायर बन गई है? केक के ऊपर सजावट के नाम पर कंकड़-पत्थर परोसना कहाँ की कलाकारी है? ग्राहक का यह कटाक्ष बिल्कुल सही बैठता है कि इन मोतियों को चबाना किसी आम इंसान के बस की बात नहीं, इसके लिए तो शायद ‘बजरंगबली’ की गदा जैसी शक्ति चाहिए।

खाद्य विभाग का छापा: ‘लाइव टेस्ट’ में फेल हुआ बेकर

मामला जब तूल पकड़ा, तो खाद्य सुरक्षा अधिकारी यशवंत शर्मा अपनी टीम के साथ Shiva Bakers के दरवाजे पर दस्तक देने पहुँचे। यहाँ जो ड्रामा हुआ, वह किसी फिल्म से कम नहीं था। अधिकारी ने जब दुकान में रखे अन्य केक की जांच की, तो वहां भी वही ‘पत्थर’ नुमा मोती विराजमान थे।

मजा तो तब आया जब फूड इंस्पेक्टर और खुद दुकानदार ने उन दानों को चबाने का ‘वीरतापूर्ण’ प्रयास किया। परिणाम वही रहा—दांत तो बच गए, लेकिन दाने नहीं टूटे। बेकरी संचालक के पास कोई जवाब नहीं था। अधिकारी ने गहरी नाराजगी जाहिर करते हुए दुकानदार को वह फटकार लगाई कि शायद अगली बार वे केक पर मोती की जगह रुई लगाने का विचार करें।

नमूने गए लैब, क्या रिपोर्ट में निकलेगा ‘सीमेंट’?

प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए Shiva Bakers के चॉकलेट ट्रफल केक का नमूना सील कर दिया है और इसे राज्य खाद्य प्रयोगशाला भेजा गया है। अब नीमच की जनता को इंतजार है उस रिपोर्ट का। कहीं ऐसा न हो कि रिपोर्ट में यह लिखा आए कि केक में मैदा कम और कंक्रीट ज्यादा है। फिलहाल, अधिकारी ने इन जानलेवा मोतियों के उपयोग पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है और पूरी दुकान में मिली गंदगी व अन्य खामियों के लिए दुकानदार को अंतिम चेतावनी देकर छोड़ा है।

ब्रांड की चमक या ग्राहक की जान?

Shiva Bakers जैसे संस्थान अपनी साख और ब्रांड वैल्यू का हवाला देते हैं, लेकिन जब बात मासूमों की सुरक्षा की आती है, तो ये ब्रांड ताश के पत्तों की तरह ढह जाते हैं। सजावट के नाम पर ग्राहकों को ‘लोहा’ चबाने पर मजबूर करना केवल लापरवाही नहीं, बल्कि अपराध की श्रेणी में आता है। नीमच के लोग अब केक खरीदते समय स्वादानुसार नहीं, बल्कि ‘दांतों की मजबूती’ के अनुसार चुनाव करने को मजबूर हैं।

प्रशासन की यह कार्रवाई एक संदेश है—

ब्रांड चाहे कितना भी बड़ा हो, अगर वह ग्राहकों के मुँह से खून निकालेगा, तो कानून उसके दांत खट्टे करने में देर नहीं करेगा।

 


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