Trump 10% Global Tariff: सुप्रीम कोर्ट के फैसले के 3 घंटे बाद ट्रम्प का पलटवार, दुनिया पर लगाया नया टैक्स

वॉशिंगटन: Trump 10% Global Tariff से अमेरिका की राजनीति और ग्लोबल इकोनॉमी में पिछले 24 घंटों के भीतर जो हुआ, उसने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा डोनाल्ड ट्रम्प के पुराने टैरिफ आदेश को रद्द करने के महज तीन घंटे बाद ही राष्ट्रपति ने अपना ‘ब्रह्मास्त्र’ चला दिया है। व्हाइट हाउस से आ रही खबरों के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रम्प ने अब एक पुराने कानून का सहारा लेते हुए दुनिया के सभी देशों पर ट्रम्प 10 % वैश्विक टैरिफ (Trump 10% Global Tariff) लगाने का ऐलान कर दिया है।
यह फैसला न केवल अमेरिकी बाजार बल्कि भारत, चीन और यूरोप की अर्थव्यवस्थाओं के लिए भी एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है।
Trump 10% Global Tariff सुप्रीम कोर्ट का फैसला और ट्रम्प का गुस्सा
शुक्रवार को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा लगाए गए पिछले ग्लोबल टैरिफ को अवैध करार दिया था। 6-3 के बहुमत से आए इस फैसले में कोर्ट ने साफ कहा कि संविधान के तहत टैक्स और टैरिफ लगाने का अधिकार सिर्फ संसद (कांग्रेस) के पास है, राष्ट्रपति अपनी मर्जी से इसे लागू नहीं कर सकते।
इस फैसले ने ट्रम्प को बुरी तरह नाराज कर दिया। अपनी बेबाक शैली के लिए मशहूर ट्रम्प ने जजों को आड़े हाथों लेते हुए कहा,
“यह बहुत निराशाजनक है। मुझे कोर्ट के कुछ जजों पर शर्म आ रही है। वे ‘कट्टर वामपंथियों’ के पालतू हैं और उनमें देश के लिए सही फैसला लेने की हिम्मत नहीं है।”
लेकिन ट्रम्प यहीं नहीं रुके। कोर्ट के फैसले के स्याही सूखने से पहले ही उन्होंने अपनी लीगल टीम के साथ मिलकर ट्रम्प 10 % वैश्विक टैरिफ (Trump 10% Global Tariff) को दोबारा लागू करने का नया रास्ता खोज निकाला।
सेक्शन 122: ट्रम्प का नया हथियार
सुप्रीम कोर्ट ने जिस IEEPA (International Emergency Economic Powers Act) कानून के तहत लगाए गए टैरिफ को खारिज किया था, ट्रम्प ने अब उसकी जगह ‘ट्रेड एक्ट ऑफ 1974’ के सेक्शन 122 का इस्तेमाल किया है।
यह कानून राष्ट्रपति को विशेष अधिकार देता है कि अगर अमेरिका को भारी व्यापार घाटे या आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा हो, तो वह संसद की मंजूरी के बिना भी 150 दिनों के लिए अस्थायी टैरिफ लगा सकते हैं। ट्रम्प प्रशासन का तर्क है कि यह कदम डॉलर को मजबूत करने और घरेलू उत्पादन को बचाने के लिए जरूरी है।
भारत के लिए अच्छी खबर या बुरी?
इस पूरे घटनाक्रम में भारत के लिए एक राहत भरी खबर छिपी है। पहले के नियमों के मुताबिक, भारत पर कुल टैरिफ का असर लगभग 18% तक हो रहा था। लेकिन अब नए ट्रम्प 10 % वैश्विक टैरिफ (Trump 10% Global Tariff) के लागू होने से यह घटकर सीधा 10% रह जाएगा।
व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने पुष्टि की है कि ब्रिटेन, भारत और यूरोपीय संघ जैसे देशों, जिनके साथ अमेरिका की बातचीत चल रही है, उन्हें अब 10% की फ्लैट रेट का सामना करना होगा। इसका सीधा मतलब है कि भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में अपना सामान बेचने में पहले के मुकाबले थोड़ी आसानी होगी और कॉम्पिटिशन में बने रहने का मौका मिलेगा।
ट्रम्प ने भारत के साथ अपने रिश्तों पर भी टिप्पणी करते हुए कहा, “पीएम मोदी मेरे अच्छे दोस्त हैं और भारत के साथ ट्रेड डील में कोई बदलाव नहीं होगा।”
200 अरब डॉलर के रिफंड पर सस्पेंस
ट्रम्प 10 % वैश्विक टैरिफ (Trump 10% Global Tariff) सबसे बड़ा सवाल जो अब उठ रहा है, वह उन 200 अरब डॉलर का है जो ट्रम्प प्रशासन ने पिछले साल टैरिफ के जरिए कंपनियों से वसूले थे। सुप्रीम कोर्ट ने पुराने टैरिफ को अवैध तो बता दिया, लेकिन पैसे वापसी (Refund) को लेकर स्थिति साफ नहीं की है।
ट्रम्प ने साफ कर दिया है कि अमेरिकी सरकार कोई पैसा वापस नहीं करेगी। उन्होंने कहा,
“कोर्ट के फैसले में रिफंड का कोई जिक्र नहीं है।”
जानकारों का मानना है कि यह मामला अब अगले 5 साल तक अदालतों में घिसटता रहेगा, जिससे कंपनियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
इतिहास खुद को दोहरा रहा है: निक्सन कनेक्शन
ट्रम्प 10 % वैश्विक टैरिफ (Trump 10% Global Tariff) में दिलचस्प बात यह है कि ट्रम्प ने जो किया है, वह अमेरिका के इतिहास में पहली बार नहीं हुआ है। आज से 55 साल पहले, 1971 में तत्कालीन राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने भी गिरते डॉलर को संभालने के लिए दुनिया भर के देशों पर 10% का ग्लोबल टैरिफ लगाया था। उसी घटना के बाद 1974 में यह ट्रेड एक्ट बनाया गया था, जिसका इस्तेमाल आज ट्रम्प कर रहे हैं।
हालांकि, न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सेक्शन 122 का इस्तेमाल आधुनिक इतिहास में इस तरह कभी नहीं किया गया। इसलिए, यह तय है कि ट्रम्प के इस नए ट्रम्प 10 % वैश्विक टैरिफ (Trump 10% Global Tariff) आदेश को भी जल्द ही कोर्ट में चुनौती दी जाएगी।
आगे क्या होगा?
यह ट्रम्प 10 % वैश्विक टैरिफ (Trump 10% Global Tariff) 24 फरवरी की आधी रात से लागू होने जा रहा है। हालांकि, ट्रम्प ने कुछ जरूरी चीजों जैसे—दवाइयां, कुछ इलेक्ट्रॉनिक्स, और कृषि उत्पाद (टमाटर, संतरा, बीफ) को इससे बाहर रखा है ताकि आम अमेरिकी जनता पर महंगाई की मार न पड़े।
फिलहाल, दुनिया भर के शेयर बाजार इस खबर पर नजर बनाए हुए हैं। एक तरफ जहां अमेरिकी कंपनियों को विदेशी माल महंगा होने से फायदा मिल सकता है, वहीं दूसरी तरफ ट्रेड वॉर छिड़ने से ग्लोबल सप्लाई चेन के टूटने का खतरा भी मंडरा रहा है। ट्रम्प का यह कदम ‘अमेरिका फर्स्ट’ की नीति को तो मजबूत करता है, लेकिन इसके दूरगामी परिणाम क्या होंगे, यह आने वाला वक्त ही बताएगा।
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