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10 Rs Petrol Diesel Duty Cut: सरकार का बड़ा फैसला, पर क्या आम जनता को मिलेगी राहत?

Petrol Diesel Duty Cut

नीमच (MP News) Petrol Diesel Duty Cut ईरान युद्ध और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के चलते पूरी दुनिया इस वक्त एक बड़े तेल संकट से जूझ रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों ने आसमान छू लिया है और यह 100 डॉलर प्रति बैरल के खतरनाक स्तर को पार कर चुका है। ऐसे में देश की अर्थव्यवस्था और महंगाई को नियंत्रण में रखने के लिए भारत सरकार ने एक बेहद अहम और बड़ा कदम उठाया है।

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हाल ही में सरकार ने Petrol Diesel Duty Cut का एक ऐतिहासिक ऐलान किया है, जिसके तहत पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी (Excise Duty) में 10 रुपये प्रति लीटर की भारी कटौती की गई है।

लेकिन, इस बड़ी घोषणा के बाद हर आम हिंदुस्तानी के मन में एक ही सवाल है कि क्या वाकई कल से पेट्रोल पंप पर तेल सस्ता मिलेगा? क्या आम आदमी की जेब का बोझ हल्का होगा? आइए इस पूरे फैसले, इसके पीछे के गणित और आम जनता पर पड़ने वाले इसके असल प्रभाव को विस्तार से समझते हैं।

कितनी कम हुई एक्साइज ड्यूटी? 

सरकार के नए आदेश के मुताबिक, देश में तेल की आपूर्ति को सुचारू रखने और कंपनियों पर पड़ने वाले दबाव को कम करने के लिए यह Petrol Diesel Duty Cut लागू किया गया है। इसके तहत:

  • पेट्रोल (Petrol): पेट्रोल पर पहले 13 रुपये प्रति लीटर की एक्साइज ड्यूटी लगती थी, जिसे अब 10 रुपये घटाकर महज 3 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।

  • डीजल (Diesel): देश के ट्रांसपोर्ट और कृषि सेक्टर की रीढ़ माने जाने वाले डीजल पर पहले 10 रुपये प्रति लीटर की ड्यूटी वसूली जाती थी। सरकार ने इसे पूरी तरह से खत्म कर दिया है। यानी अब डीजल पर एक्साइज ड्यूटी ‘शून्य’ (₹0) होगी।

यह कटौती कागजों पर बहुत बड़ी नजर आती है, क्योंकि इससे सरकारी खजाने (राजस्व) पर हजारों करोड़ रुपये का सीधा असर पड़ेगा।

क्या आम जनता के लिए सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल?

यह इस पूरी खबर का सबसे निराशाजनक पहलू है। अगर आप सोच रहे हैं कि इस 10 रुपये के Petrol Diesel Duty Cut का सीधा फायदा आम उपभोक्ता को मिलेगा और पेट्रोल पंप पर खुदरा कीमतें (Retail Prices) कम हो जाएंगी, तो ऐसा होने की संभावना न के बराबर है।

सूत्रों और ऊर्जा विशेषज्ञों की मानें तो पेट्रोल पंपों पर फिलहाल तेल के दाम नहीं घटेंगे। इसका सबसे बड़ा कारण तेल विपणन कंपनियों (OMCs – जैसे IOCL, BPCL, HPCL) का घाटा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में जब कच्चे तेल के दाम तेजी से बढ़े, तब इन कंपनियों ने उसका पूरा भार ग्राहकों पर नहीं डाला था, जिसकी वजह से उन्हें ‘अंडर-रिकवरी’ (लागत से कम कीमत पर तेल बेचना) का भारी नुकसान उठाना पड़ा।

अब जब सरकार ने एक्साइज ड्यूटी घटाई है, तो तेल कंपनियां इस मार्जिन का इस्तेमाल अपने उस पुराने घाटे (Losses) की भरपाई करने में करेंगी। आसान भाषा में कहें तो, ड्यूटी घटने का पैसा आपकी जेब में आने के बजाय कंपनियों की बैलेंस शीट सुधारने के काम आएगा।

ईरान संकट और अंतरराष्ट्रीय बाजार का हाल

इस पूरे घटनाक्रम की जड़ में है ईरान और पश्चिम एशिया का विवाद। जब से इस क्षेत्र में युद्ध के बादल मंडराए हैं, ग्लोबल सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है। इसी डर से कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गया।

हालांकि, बीते कुछ दिनों में बाजार के लिए हल्की राहत की खबर भी आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से आए कुछ सकारात्मक बयानों और कूटनीतिक कयासों के बाद बाजार की घबराहट थोड़ी कम हुई है। शुक्रवार सुबह के कारोबारी सत्र में ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) करीब 1 फीसदी की गिरावट के साथ 107 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। वहीं, अमेरिकी क्रूड यानी WTI भी नरमी दिखाते हुए 93.60 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ट्रेड कर रहा है।

अर्थव्यवस्था के लिए इस कदम के मायने

भले ही आम आदमी को पेट्रोल पंप पर सीधा डिस्काउंट न मिले, लेकिन सरकार का यह Petrol Diesel Duty Cut का कदम एक ‘शॉक एब्जॉर्बर’ (Shock Absorber) की तरह काम करेगा।

भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल आयात (Import) करता है। जब ग्लोबल मार्केट में तेल महंगा होता है, तो भारत का आयात बिल तेजी से बढ़ता है, रुपया कमजोर होता है और देश में महंगाई  बेकाबू होने का खतरा बन जाता है।

यदि सरकार यह ड्यूटी नहीं घटाती, तो मजबूरन तेल कंपनियों को पेट्रोल-डीजल के दाम 10 से 15 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ाने पड़ते। ऐसे में माल ढुलाई (Transportation) महंगी हो जाती और दाल-सब्जी से लेकर हर रोजमर्रा की चीज के दाम आसमान छूने लगते।


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