RBI का नया ड्राफ्ट: ₹50 हजार तक की डिजिटल ठगी पर अब मिलेगा 85% तक मुआवजा, जानें पूरी डिटेल
Reported by: News Desk | Edited by: आकाश शर्मा
11 मार्च 2026, (अपडेटेड 11 मार्च 2026, 10:15 पूर्वाह्न IST)

नीमच (Neemuch News)।: आज के तेज-तर्रार डिजिटल युग में जहां UPI, नेट बैंकिंग और ऑनलाइन पेमेंट ने हमारी जिंदगी को बेहद आसान बना दिया है, वहीं साइबर ठगी (Cyber Fraud) के मामलों में भी चिंताजनक रूप से भारी बढ़ोतरी हुई है।

आए दिन आम लोग जालसाजों के नए-नए तरीकों का शिकार होकर अपनी जीवन भर की गाढ़ी कमाई गवां रहे हैं। साइबर ठग हर दिन नए पैंतरे आजमा रहे हैं, जिससे एक आम आदमी खुद को ठगा हुआ महसूस करता है। लेकिन अब देश के आम नागरिकों के लिए एक बहुत बड़ी और सुकून देने वाली खबर सामने आई है।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग धोखाधड़ी को लेकर एक नया और अहम ड्राफ्ट जारी किया है। इस ड्राफ्ट के लागू होने के बाद, ऑनलाइन ठगी के शिकार निर्दोष लोगों को भारी भरकम मुआवजा मिल सकेगा।

यह पहल विशेष रूप से उन ग्राहकों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने के लिए तैयार की गई है, जो बिना किसी गलती के साइबर अपराधियों के जाल में फंस जाते हैं और अपना पैसा खो बैठते हैं। आइए एक नजर डालते हैं इस पूरी व्यवस्था पर और समझते हैं कि आम आदमी को इसका लाभ कैसे मिलेगा।

₹50 हजार तक की ठगी पर मिलेगा 85% तक रिफंड

केंद्रीय बैंक यानी RBI द्वारा जारी किए गए नए प्रस्ताव के मुताबिक, अगर किसी भी बैंक ग्राहक के साथ ₹50,000 तक की ऑनलाइन या कार्ड-आधारित ठगी होती है, तो उसे हुए कुल नुकसान का 85% या अधिकतम ₹25,000 (दोनों में से जो भी कम हो) वापस मिल सकता है।

बैंकिंग सेक्टर में इसे ग्राहकों के हित में एक बहुत ही क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है। हालांकि, RBI ने अपने ड्राफ्ट में यह बिल्कुल स्पष्ट कर दिया है कि मुआवजे की यह विशेष सुविधा किसी भी ग्राहक को उसके पूरे जीवनकाल में केवल एक ही बार दी जाएगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि लोग सतर्क रहें और इस सुविधा का दुरुपयोग न हो।

मुआवजा पाने के लिए क्या हैं जरूरी शर्तें?

ऐसा नहीं है कि आपके खाते से पैसा कटा और आपको बिना किसी प्रक्रिया के तुरंत रिफंड मिल जाएगा। इस योजना का लाभ उठाने के लिए कुछ नियम और कड़ी शर्तें तय की गई हैं। सबसे बड़ी शर्त यह है कि धोखाधड़ी की घटना वास्तविक होनी चाहिए और इसमें ग्राहक की अपनी कोई लापरवाही शामिल नहीं होनी चाहिए।

  • 5 दिन का कड़ा नियम: धोखाधड़ी की घटना होने के मात्र 5 दिन (वर्किंग डेज) के भीतर आपको अपने संबंधित बैंक और नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल या हेल्पलाइन (Helpline Number 1930) पर हर हाल में शिकायत दर्ज करानी होगी।

  • तय सीमा के भीतर शिकायत न करने पर RBI के इन नए नियमों का लाभ लेने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है या आपका दावा खारिज भी हो सकता है।

आखिर कौन उठाएगा इस रिफंड का आर्थिक बोझ?

यह एक बहुत ही वाजिब सवाल है कि जब ठगी का शिकार हुए ग्राहक को पैसा वापस मिलेगा, तो वह रकम आएगी कहां से? इस ड्राफ्ट के अनुसार, रिफंड भुगतान का एक बेहद पारदर्शी और संतुलित तंत्र विकसित किया गया है।

  • कुल मुआवजे का 65% सबसे बड़ा हिस्सा सीधे RBI वहन करेगा।

  • 10% हिस्सा ग्राहक के अपने बैंक को चुकाना होगा, जहां उसका खाता है।

  • बाकी 10% हिस्सा उस बैंक (Beneficiary Bank) द्वारा दिया जाएगा, जिसके खाते में ठगों ने पैसा ट्रांसफर किया है। इससे बैंकों की जवाबदेही भी तय होगी।

बैंक की गलती होने पर ग्राहक की ‘जीरो लायबिलिटी’ 

नए ड्राफ्ट में बैंक ग्राहकों को सबसे बड़ी ढाल यह दी गई है कि अगर ठगी बैंक के सिस्टम की किसी तकनीकी खामी, सर्वर इश्यू या सुरक्षा चूक के कारण हुई है, तो इसमें ग्राहक की देनदारी शून्य (Zero Liability) मानी जाएगी।

ऐसी स्थिति में पूरा का पूरा ट्रांजैक्शन रिवर्स किया जाएगा और ग्राहक का एक भी पैसा नहीं कटेगा। सबसे खास बात यह है कि RBI के अनुसार, इस स्थिति में यह मायने नहीं रखता कि ग्राहक ने तय समय पर शिकायत दर्ज की है या नहीं; सिस्टम की गलती होने पर पैसा स्वतः वापस आएगा।

₹500 से ऊपर के हर ट्रांजैक्शन पर कड़े अलर्ट नियम

साइबर सुरक्षा को और ज्यादा मजबूत करने के लिए, RBI ने बैंकों के लिए अलर्ट सिस्टम को पहले से कहीं अधिक कड़ा कर दिया है। ड्राफ्ट के अनुसार, अब ₹500 से अधिक के हर एक इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजैक्शन पर बैंक को तुरंत SMS Alert भेजना अनिवार्य होगा।

अब बैंक सिर्फ अपने इन-ऐप नोटिफिकेशन (App Notifications) देकर जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकते। जिन ग्राहकों ने बैंक में अपना ईमेल आईडी रजिस्टर करा रखा है, उन्हें ईमेल पर भी तुरंत अलर्ट भेजना होगा, ताकि समय रहते फ्रॉड को पहचाना जा सके।

क्या है ग्राहक की लापरवाही? (कब नहीं मिलेगा एक भी पैसा)

भले ही ये नए नियम ग्राहकों के हित में बनाए गए हैं, लेकिन ग्राहकों को भी अपनी जिम्मेदारी पूरी तरह निभानी होगी। RBI के ड्राफ्ट में साफ तौर पर बताया गया है कि अगर ठगी ग्राहक की खुद की लापरवाही से होती है, तो उसे कोई मुआवजा नहीं दिया जाएगा। इन लापरवाहियों में मुख्य रूप से शामिल हैं:

  1. किसी अनजान व्यक्ति या फर्जी फोन कॉल पर अपना OTP, इंटरनेट बैंकिंग पासवर्ड या PIN शेयर कर देना।

  2. बैंक द्वारा समय-समय पर दी जाने वाली स्पष्ट सुरक्षा चेतावनियों को लगातार नजरअंदाज करना।

  3. अपने डेबिट या क्रेडिट कार्ड के कवर पर ही अपना गोपनीय PIN लिखकर रखना, जिससे कार्ड खोने पर आसानी से पैसा निकाला जा सके।

  4. किसी अनजान लिंक (Phishing Link) पर क्लिक करना या किसी के कहने पर स्क्रीन शेयरिंग (Screen Sharing) करने वाला मैलिशियस ऐप अपने मोबाइल में डाउनलोड करना।

कब से लागू होंगे ये नए नियम?

RBI ने फिलहाल इस ड्राफ्ट पर देश भर के बैंकों, वित्तीय संस्थाओं और अन्य हितधारकों से उनके सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। विचार-विमर्श के बाद, इन नियमों को सभी ऑनलाइन और कार्ड-आधारित पेमेंट पर 1 जुलाई, 2026 से लागू करने का मजबूत प्रस्ताव रखा गया है।

निश्चित रूप से, यह कदम भारत में डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम को पहले से कहीं अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और आम जनता के लिए भरोसेमंद बनाने का काम करेगा।


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Aakash Sharma
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