हिसार। राजस्थान के प्रसिद्ध सालासर बालाजी मंदिर से जुड़ा सालासर मंदिर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। शुरुआत में यह मामला श्रद्धालुओं के साथ कथित मारपीट तक सीमित था, लेकिन अब भजन गायक कन्हैया मित्तल के बयान और उनके यू-टर्न ने इस पूरे घटनाक्रम को बड़ा विवाद बना दिया है। सोशल मीडिया पर आरोप-प्रत्यारोप और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी ने इस सालासर मंदिर विवाद को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है।
कैसे शुरू हुआ सालासर मंदिर विवाद
सालासर मंदिर विवाद की शुरुआत 5 अप्रैल को हुई, जब हरियाणा के हिसार के व्यापारी संजय अरोड़ा अपने परिवार के साथ सालासर धाम पहुंचे थे। परिवार का आरोप है कि दर्शन के दौरान उन्होंने अपने बीमार रिश्तेदार को वीडियो कॉल पर दर्शन कराने की कोशिश की, तभी वहां मौजूद बाउंसरों ने उन्हें रोक दिया।
परिवार का कहना है कि बाउंसरों ने मोबाइल छीनकर जमीन पर पटक दिया। विरोध करने पर 30 से 40 लोग इकट्ठा हो गए और महिलाओं के साथ धक्का-मुक्की व मारपीट की गई। इस घटना के बाद सालासर मंदिर विवाद ने तेजी से तूल पकड़ लिया।
थाने में भी नहीं मिला न्याय?
घटना के बाद जब परिवार थाने पहुंचा, तो उन्होंने वहां भी दबाव और डराने के आरोप लगाए। संजय अरोड़ा का कहना है कि पुलिस ने मदद करने के बजाय उन्हें ही धमकाया और SC/ST एक्ट लगाने की बात कही। इतना ही नहीं, उनसे जबरन एक वीडियो बनवाया गया जिसमें उन्हें अपनी गलती स्वीकार करनी पड़ी।
यह पहलू सालासर मंदिर विवाद को और गंभीर बनाता है, क्योंकि इसमें पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।
मंदिर प्रबंधन का पक्ष
मंदिर प्रबंधन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सीसीटीवी फुटेज में श्रद्धालुओं की गलती सामने आई है। उनके अनुसार, महिला गार्ड के साथ बदसलूकी हुई थी और संबंधित श्रद्धालुओं ने थाने में माफी भी मांगी।
इस तरह सालासर मंदिर विवाद में दोनों पक्षों के दावे एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं, जिससे सच्चाई को लेकर असमंजस बना हुआ है।
कन्हैया मित्तल की एंट्री और बदलता रुख
घटना के दो दिन बाद कन्हैया मित्तल इस सालासर मंदिर विवाद में सामने आए। शुरुआत में उन्होंने पीड़ित परिवार के प्रति सहानुभूति जताई और कहा कि यदि किसी बाउंसर ने गलती की है तो उस पर कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि पूरे पुजारी समाज को दोषी ठहराना गलत है। इस बयान को संतुलित माना गया, लेकिन आगे चलकर उनका रुख पूरी तरह बदल गया और यही इस सालासर मंदिर विवाद का सबसे बड़ा मोड़ बन गया।
समझौते की कोशिश और फिर विवाद
पीड़ित परिवार ने बताया कि “कन्हैया मित्तल ने परिवार से बातचीत कर दावा किया वे पीड़ित परिवार के साथ 10 अप्रैल को सालासर जाएंगे। उन्होंने इसे सनातन एकता का उदाहरण बताया। लेकिन परिवार ने बाद में साफ इनकार कर दिया और कहा कि मंदिर कमेटी को हिसार आकर माफी मांगनी चाहिए।
यहीं से सालासर मंदिर विवाद ने नया मोड़ लिया और दोनों पक्षों के बीच दूरी बढ़ गई।
सोशल मीडिया पोस्ट से बढ़ा तनाव
पीड़ित परिवार के अनुसार
“परिवार के इनकार के बाद कन्हैया मित्तल ने एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया, जिसमें संजय अरोड़ा को शराब और मांस का सेवन करते हुए दिखाया गया। उन्होंने कहा कि वे ऐसे परिवार के साथ मंदिर नहीं जाएंगे।“
इतना ही नहीं, उन्होंने परिवार के समर्थन में आने वाले लोगों को भी “शराबी” कह दिया। इस बयान के बाद सालासर मंदिर विवाद और भड़क गया और सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।
पंचायत और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
9 अप्रैल को हिसार में इस सालासर मंदिर विवाद को लेकर पंचायत बुलाई गई। पंचायत के बाद संजय अरोड़ा ने कन्हैया मित्तल को मानहानि का केस करने की चेतावनी दी।
उन्होंने कहा कि पहले सहानुभूति दिखाना और फिर इस तरह के आरोप लगाना गलत है। उनका कहना है कि वे इस मामले को कानूनी रूप से आगे बढ़ाएंगे।
कन्हैया मित्तल का जवाब
पंचायत के बाद कन्हैया मित्तल ने फेसबुक लाइव आकर कहा कि वे किसी भी मानहानि केस से नहीं डरते। उन्होंने दावा किया कि परिवार उनकी टीम से संपर्क कर समझौते की बात कर रहा था।
हालांकि उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि अब वे परिवार के साथ सालासर नहीं जाएंगे। इस बयान के बाद सालासर मंदिर विवाद और ज्यादा चर्चा में आ गया।
धार्मिक और सामाजिक बहस में बदला मामला
अब सालासर मंदिर विवाद सिर्फ एक घटना नहीं रह गया है, बल्कि यह धार्मिक आचरण, श्रद्धालुओं के अधिकार और मंदिर प्रशासन की जिम्मेदारी जैसे बड़े मुद्दों को सामने ला रहा है।
एक तरफ श्रद्धालुओं की सुरक्षा का सवाल है, तो दूसरी तरफ धार्मिक मर्यादाओं का मुद्दा उठ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस पूरे मामले में निष्पक्ष जांच और संतुलित बयान बेहद जरूरी है।
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