| पूजन हेतु श्रेष्ठ योग | समय सीमा | योग का महत्व |
| अमृत चौघड़िया | प्रातः 6:35 से 8:00 बजे तक | सुख-समृद्धि के लिए उत्तम |
| वृश्चिक स्थिर लग्न | प्रातः 8:40 से 10:56 बजे तक | लक्ष्मी की स्थिरता हेतु विशेष |
| बृहस्पति होरा | प्रातः 8:27 से 9:24 बजे तक | सद्ज्ञान और भगवत्कृपा के लिए |
| अभिजित मुहूर्त | दोपहर 11:52 से 12:38 बजे तक | दिन का सबसे श्रेष्ठ मुहूर्त |
| गोधूलि वेला | सायं 4:30 से 6:56 बजे तक | संध्याकालीन पूजन हेतु शुभ |
| निशीथ वेला (मुख्य) | रात्रि 11:22 से 12:10 बजे तक | तंत्र-मंत्र और विशिष्ट अनुष्ठान के लिए |
परिषद के पदाधिकारियों ने बताया कि विभिन्न होराओं में पूजन का विशेष फल मिलता है। चंद्र होरा मानसिक शांति प्रदान करती है, बुध होरा व्यापार में वृद्धि लाती है, जबकि बृहस्पति होरा सद्ज्ञान और ईश्वर की कृपा दिलाती है।
देशभर के प्रमुख धामों में भी 20 अक्टूबर को दिवाली
परिषद ने इस बात पर जोर दिया कि अयोध्या, काशी, उज्जैन, इंदौर, रतलाम, मंदसौर, खाटू श्याम और सालासर बालाजी जैसे देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर भी इसी 20 अक्टूबर की तिथि को दीपावली मनाने का निर्णय लिया गया है। परिषद ने इस निर्णय के माध्यम से “एक राष्ट्र – एक मत – एक त्यौहार” की भावना को प्राथमिकता देने की अपील की है।
बैठक में परिषद के संरक्षक पं. मालचंद शर्मा, अध्यक्ष पं. राधेश्याम उपाध्याय सहित बड़ी संख्या में विप्रजन उपस्थित रहे।