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ई-टोकन नियम तोड़ने पर प्रशासन का एक्शन, 4 उर्वरक विक्रेताओं के लाइसेंस निलंबित

उर्वरक विक्रेताओं के लाइसेंस निलंबित

नीमच। जिले में उर्वरक वितरण व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए लागू की गई ई-विकास प्रणाली के नियमों का उल्लंघन करने वालों पर प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। उर्वरक विक्रेताओं के लाइसेंस निलंबित करने की कार्रवाई के तहत चार दुकानों पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया गया है।

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मध्यप्रदेश शासन के किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग द्वारा प्रदेशभर में ई-विकास प्रणाली लागू की गई है, जिसका उद्देश्य किसानों को बिना परेशानी उर्वरक उपलब्ध कराना और अवैध बिक्री पर रोक लगाना है। इस व्यवस्था के तहत स्पष्ट निर्देश हैं कि बिना ई-टोकन के उर्वरक वितरण पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।

जांच में सामने आई लापरवाही

16 अप्रैल 2026 को हुई जांच में सामने आया कि कुछ विक्रेताओं ने ई-टोकन व्यवस्था को नजरअंदाज करते हुए सीधे पीओएस मशीन के माध्यम से उर्वरक का वितरण किया। यह गंभीर अनियमितता पाई गई, जिसके बाद उर्वरक विक्रेताओं के लाइसेंस निलंबित करने का फैसला लिया गया।

कार्रवाई के दायरे में आए विक्रेता—

  • श्री देव कृषि बाजार, महू रोड नीमच
  • अंबिका एग्रो एजेंसी, रामपुरा
  • विनोद कुमार मरचया, रामपुरा
  • बालाजी बीज भंडार, मनासा

इन विक्रेताओं द्वारा पीओएस मशीन से वितरण तो किया गया, लेकिन ई-विकास पोर्टल पर उसका उचित रिकॉर्ड दर्ज नहीं पाया गया।

नियमों का उल्लंघन, सख्त कार्रवाई

प्रशासन ने इसे न केवल सरकारी आदेशों की अवहेलना माना, बल्कि उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 का उल्लंघन भी बताया है।

उप संचालक एवं उर्वरक पंजीयन प्राधिकारी दिनेश मंडलोई द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि इस तरह की अनियमितता से किसानों के हित प्रभावित होते हैं और वितरण प्रणाली की पारदर्शिता खत्म होती है।

तत्काल प्रभाव से लाइसेंस सस्पेंड

चारों दुकानों के रिटेलर आईडी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई सीधे तौर पर उर्वरक विक्रेताओं के लाइसेंस निलंबित करने के आदेश के तहत की गई है।

साथ ही संबंधित विक्रेताओं को 7 दिनों के भीतर अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। यदि वे जवाब देने में असफल रहते हैं, तो उनके खिलाफ आगे की कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

किसानों के हित में जरूरी कदम

ई-विकास प्रणाली लागू करने का उद्देश्य है कि—

  • किसानों को समय पर और सही मात्रा में उर्वरक मिले
  • कालाबाजारी और स्टॉक छिपाने जैसी गतिविधियों पर रोक लगे
  • पूरी प्रक्रिया डिजिटल और पारदर्शी बने

ऐसे में उर्वरक विक्रेताओं के लाइसेंस निलंबित करना प्रशासन की सख्ती को दर्शाता है।

प्रशासन का स्पष्ट संदेश

जिला प्रशासन ने साफ कर दिया है कि भविष्य में कोई भी विक्रेता नियमों का उल्लंघन करता पाया गया तो उसके खिलाफ भी इसी तरह की सख्त कार्रवाई की जाएगी।

यह कदम अन्य विक्रेताओं के लिए भी चेतावनी है कि वे ई-टोकन प्रणाली का पूरी तरह पालन करें।

आगे की स्थिति पर नजर

अब सभी की नजर इस बात पर है कि संबंधित विक्रेता अपना जवाब कैसे पेश करते हैं। अगर उनके जवाब संतोषजनक नहीं पाए गए, तो लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द भी किए जा सकते हैं।


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