रतलाम में पंचायत का ‘तालिबानी’ फरमान: 8 लव मैरिज के बाद परिवारों का पूर्ण सामाजिक बहिष्कार

लव मैरिज का बहिष्कार
रतलाम: मध्य प्रदेश के रतलाम जिले के पिपलोदा तहसील से एक ऐसी खबर आई है जिसने मानवता और कानून, दोनों को शर्मसार कर दिया है। पांचेवा गांव में ग्रामीणों और पंचायत ने मिलकर लव मैरिज का बहिष्कार करने का एक ऐसा फरमान सुनाया है, जिसकी तुलना अफगानिस्तान के तालिबानी शासन से की जा रही है। पिछले कुछ महीनों में गांव के युवाओं द्वारा अपनी मर्जी से विवाह करने की घटनाओं से नाराज होकर, अब पूरे समाज को इन परिवारों के खिलाफ खड़ा कर दिया गया है।
महापंचायत और वायरल वीडियो का सच
दरअसल, पांचेवा गांव में हाल ही में एक बड़ी बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल रहा है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि एक व्यक्ति हाथ में रजिस्टर लेकर बड़े गर्व से उन नियमों को पढ़ रहा है, जो भारतीय संविधान की धज्जियां उड़ाते हैं। पंचायत का दावा है कि बीते 6 महीनों में गांव के 8 युवक-युवतियों ने प्रेम विवाह किया है। पंचायत के अनुसार, इस लव मैरिज का बहिष्कार करना इसलिए जरूरी है ताकि गांव के अन्य बच्चों पर “बुरा प्रभाव” न पड़े।
सामाजिक बहिष्कार के वो 7 नियम जो रूह कंपा दें
पंचायत ने इन परिवारों को घुटनों पर लाने के लिए सात बेहद सख्त और अमानवीय प्रतिबंध लागू किए हैं:
पूर्ण सामाजिक कटऑफ: इन परिवारों को गांव के किसी भी सुख-दुख या सार्वजनिक उत्सव में शामिल होने की अनुमति नहीं होगी।
बुनियादी सेवाओं पर रोक: गांव के पंडित, नाई और धोबी जैसे सेवादारों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे इन परिवारों का कोई काम न करें।
आर्थिक नाकेबंदी: इन परिवारों से दूध, राशन या किसी भी जरूरी सामान का लेन-देन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
रोजगार की छंटनी: गांव का कोई भी किसान या व्यापारी इन परिवारों के सदस्यों को काम पर नहीं रखेगा। नियम तोड़ने वाले पर भी जुर्माना लगेगा।
जमीन पर पाबंदी: इन परिवारों की कृषि भूमि को कोई भी ग्रामीण बटाई या पट्टे (Lease) पर नहीं लेगा।
गवाहों को सजा: जो लोग इन शादियों में गवाह बने या जिन्होंने घर से भागने में मदद की, उन्हें भी गांव से बहिष्कृत कर दिया गया है।
भारी जुर्माना प्रणाली: यदि कोई ग्रामीण चोरी-छिपे इन परिवारों की मदद करता पाया गया, तो पंचायत उस पर भारी आर्थिक दंड लगाएगी।
प्रशासनिक दखल और गांव का तनाव

जैसे ही यह मामला जिला प्रशासन की नजर में आया, जावरा SDM सुनील जायसवाल ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। जनपद सीईओ ब्रह्म स्वरूप हंस को मौके पर भेजकर मामले की जांच कराई गई। प्रशासन ने गांव वालों को दो टूक चेतावनी दी है कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है जहाँ लव मैरिज का बहिष्कार करना या किसी का हुक्का-पानी बंद करना संज्ञेय अपराध है।
अधिकारियों के पहुंचने पर गांव में भारी तनाव देखा गया। ग्रामीण अपनी परंपराओं का हवाला दे रहे हैं, जबकि प्रशासन उन्हें जेल भेजने की चेतावनी दे रहा है। पीड़ित परिवारों का कहना है कि वे इस ‘संविधान विरोधी’ फैसले के खिलाफ रतलाम कलेक्टर को शपथ पत्र सौंपेंगे और अपनी सुरक्षा की गुहार लगाएंगे।
विशेषज्ञों की राय
कानूनी जानकारों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देश हैं कि बालिग लड़का-लड़की अपनी मर्जी से जीवनसाथी चुन सकते हैं। ऐसे में पंचायत द्वारा लव मैरिज का बहिष्कार करना न केवल मानवाधिकारों का हनन है, बल्कि यह IPC और नए न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दंडनीय है।
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