भीख मांगते हुए शर्म से झुक जाता है सिर… शहबाज शरीफ ने दुनिया के सामने खोली अपनी ही पोल

पाकिस्तान आर्थिक संकट 2026
इस्लामाबाद: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश की बदहाली का ऐसा सच स्वीकार किया है जिसे सुनकर हर कोई दंग है। उन्होंने सार्वजनिक रूप से माना है कि पाकिस्तान आर्थिक संकट 2026 के इस दौर में दुनिया भर के देशों से मदद की गुहार लगाना उनके और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर के लिए आत्म-सम्मान पर एक बहुत बड़ा बोझ बन गया है। शरीफ का यह बयान न केवल उनकी लाचारी को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि पड़ोसी मुल्क अब कर्ज के दलदल में पूरी तरह धंस चुका है।
“शर्मिंदगी के बोझ तले दबा है पाकिस्तान”
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने एक कार्यक्रम के दौरान अपनी अंतरात्मा का दर्द बयां करते हुए कहा कि बार-बार दूसरों के आगे हाथ फैलाने की मजबूरी ने उन्हें कहीं का नहीं छोड़ा है। उन्होंने कहा, “जब फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और मैं दुनिया भर में पैसे के लिए भीख मांगते घूमते हैं, तो हमें बेहद शर्म आती है। यह पाकिस्तान आर्थिक संकट 2026 की ही कड़वी सच्चाई है कि लोन लेना हमारे स्वाभिमान को कुचल रहा है। शर्म से हमारे सिर झुक जाते हैं क्योंकि हम उन शर्तों को भी मना नहीं कर पाते जो कर्जदाता देश हम पर थोपते हैं।”
यह बयान ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान अपनी डूबती इकोनॉमी को बचाने के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के साथ एक और कड़े लोन प्रोग्राम पर बातचीत कर रहा है।
12 साल में दोगुना हुआ कर्ज का जाल
पाकिस्तान आर्थिक संकट 2026 आंकड़ों पर गौर करें तो पाकिस्तान की स्थिति बेहद डरावनी नजर आती है। पिछले 12 वर्षों में पाकिस्तान का विदेशी कर्ज उछलकर दोगुना हो चुका है। वर्तमान में पाकिस्तान आर्थिक संकट 2026 की स्थिति यह है कि देश का पुराना कर्ज चुकाने के लिए भी नए कर्ज की किश्तें लेनी पड़ रही हैं। एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) और IMF की सख्त शर्तों ने पाकिस्तान की जनता की कमर तोड़ दी है।
शहबाज शरीफ ने बताया कि सरकार अब सेंट्रल बैंक और वित्त मंत्रालय को निर्देश दे रही है कि पूंजी तक पहुंच को आसान बनाकर औद्योगिक विकास को बढ़ावा दिया जाए, लेकिन विदेशी मुद्रा भंडार की कमी और महंगाई ने इन कोशिशों पर पानी फेर दिया है।
रिकॉर्ड विदेशी मुद्रा भंडार का दावा बनाम कड़वी हकीकत
पाकिस्तान आर्थिक संकट 2026 स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान (SBP) ने अनुमान लगाया है कि दिसंबर तक उनका विदेशी मुद्रा भंडार 20 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। हालांकि, आर्थिक जानकारों का कहना है कि यह केवल आंकड़ों की बाजीगरी है, क्योंकि यह पैसा खुद की कमाई का नहीं बल्कि कर्ज के रूप में ली गई उधारी है। पाकिस्तान आर्थिक संकट 2026 को देखते हुए ब्याज दरों को 10.5 प्रतिशत पर बरकरार रखा गया है, ताकि बढ़ती महंगाई पर लगाम लगाई जा सके।
जीडीपी विकास दर के 3.75-4.75 प्रतिशत रहने के सरकारी दावों के बावजूद, जमीनी हकीकत में पाकिस्तान की जनता बुनियादी जरूरतों—बिजली, आटा और ईंधन के लिए तरस रही है। शहबाज शरीफ ने गवर्नर को बिजनेस लीडर्स की बात सुनने और बड़े फैसले लेने को कहा है, लेकिन क्या ये फैसले देश को दिवालिया होने से बचा पाएंगे, यह एक बड़ा सवाल है।
संप्रभुता के साथ समझौता!
शहबाज शरीफ का यह कहना कि “वे हमसे जो कुछ भी करवाना चाहते हैं, हम मना नहीं कर सकते,” सीधे तौर पर देश की संप्रभुता पर चोट है। यह स्पष्ट करता है कि पाकिस्तान आर्थिक संकट 2026 ने देश को उस मुकाम पर ला खड़ा किया है जहाँ उसकी नीतियां अब इस्लामाबाद में नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय कर्जदाताओं के दफ्तरों में तय होती हैं।
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