बजट पर चर्चा: सात पन्नों का ‘हवाई किला’ और नीमच-मंदसौर की ‘जमीनी हकीकत’
Reported by: News Desk | Edited by: आकाश शर्मा
07 फ़रवरी 2026, (अपडेटेड 07 फ़रवरी 2026, 4:23 अपराह्न IST)

नीमच। राजनीति में अक्सर कहा जाता है कि ‘देर आए दुरुस्त आए’, लेकिन शनिवार को नीमच के अंबेडकर रोड स्थित एक निजी रेस्टोरेंट में भाजपा द्वारा आयोजित बजट पर चर्चा के दौरान मामला कुछ उल्टा ही रहा। नेताजी ‘देर’ से तो आए, लेकिन ‘दुरुस्त’ जवाबों के बजाय सिर्फ सात पन्नों का सरकारी दस्तावेज लेकर आए। 1 बजे का समय तय था, लेकिन हमारे जनप्रतिनिधि 1 बजकर 20 मिनट पर पधारे। शायद वे रास्ते में यह रिहर्सल कर रहे थे कि ‘नीमच-मंदसौर को क्या मिला’ वाले तीखे सवालों से कैसे बचना है।

28 मिनट का भाषण और आंकड़ों की बारिश

प्रेस कॉन्फ्रेंस का संचालन नीलेश पाटीदार ने शुरू किया, लेकिन असली ‘पॉलिटिकल शो’ 1 बजकर 23 मिनट पर शुरू हुआ। सांसद सुधीर गुप्ता ने माइक संभाला और बजट पर चर्चा के नाम पर पूरे 28 मिनट तक वह सात पन्नों का बजट पाठ पढ़ा, जिसे सुनकर ऐसा लगा मानो हम किसी अर्थशास्त्र की क्लास में बैठे हों। भाषण में ‘नारी शक्ति’, ‘रिफॉर्म-परफॉर्म-ट्रांसफॉर्म’ और ‘विकसित भारत 2047’ जैसे शब्द ऐसे उछाले गए जैसे चुनावी रैलियों में फूल बरसाए जाते हैं। लेकिन अफसोस, इन 28 मिनटों में ‘नीमच’ या ‘मंदसौर’ शब्द को सुनने के लिए कान तरस गए।

जब देश के आगे जिला छोटा पड़ गया

भाषण के बाद पत्रकारों के सवालों का दौर शुरू हुआ। जैसे ही सवाल आया कि “साहब, इस बजट पर चर्चा में नीमच-मंदसौर संसदीय क्षेत्र के लिए ठोस क्या है?”, तो जवाब ऐसा मिला जो किसी भी दार्शनिक को फेल कर दे। सांसद जी का तर्क था कि “चूंकि देश को बहुत कुछ मिला है, तो नीमच-मंदसौर को भी मिला है।” यह तो वही बात हुई कि अगर समंदर में लहरें उठी हैं, तो आपके घर के आंगन में रखा पानी का मटका भी भर ही गया होगा!

जिले के लिए कोई विशेष पैकेज? कोई नई परियोजना? या कम से कम स्थानीय उद्योगों के लिए कोई राहत? इन सवालों पर मंच पर बैठे दिग्गजों की चुप्पी यह चीख-चीख कर कह रही थी कि स्थानीय समस्याओं को दिल्ली के विजन के नीचे दबा दिया गया है। बजट पर चर्चा में सेमीकंडक्टर और रसायन पार्क की बातें तो खूब हुईं, लेकिन नीमच की कृषि और स्थानीय रोजगार पर किसी ने जुबान नहीं खोली।

विजन ऊंचा, पर जमीन से दूरी

सांसद महोदय के “बजट पर चर्चा” भाषण में एमएसएमई फंड और कृषि तकनीक को भविष्य का इंजन बताया गया। सुनने में यह किसी हॉलीवुड फिल्म के विजन जैसा लगता है, लेकिन नीमच की सड़कों और स्वास्थ्य ढांचे की जो हालत है, उसमें यह ‘भविष्य का इंजन’ कब और कैसे फिट होगा, यह रहस्य ही बना रहा। विधायक दिलीप सिंह परिहार और माधव मारू की मौजूदगी भी इस प्रेस कॉन्फ्रेंस को ‘स्थानीय’ रंग नहीं दे पाई। बजट पर चर्चा केवल कागजों तक सीमित रही, जिसमें आंकड़ों का खेल तो था, लेकिन जनता की उम्मीदों का हिसाब खाली था।

भोज की मिठास और सवालों की कड़वाहट

प्रेस वार्ता के बाद आयोजित भोज में दाल-बाटी और चूरमे की खुशबू तो फैली, लेकिन पत्रकारों के मन में उन सवालों की कड़वाहट बाकी थी जिनका जवाब मंच से नहीं मिला। यह प्रेस कॉन्फ्रेंस इस बात का जीता-जागता सबूत है कि बजट राष्ट्रीय स्तर पर भले ही कितना भी विजनरी हो, लेकिन स्थानीय स्तर पर जवाबदेही अब भी भाषणों के सात पन्नों में उलझी हुई है। बजट पर चर्चा सफल रही, लेकिन नीमच-मंदसौर की झोली एक बार फिर ‘देश के विकास’ के आश्वासन से ही भरी गई।

जनता अब यह पूछ रही है कि अगर 2047 में भारत विकसित होगा, तो क्या नीमच को तब तक सिर्फ भाषणों के भरोसे ही रहना होगा? फिलहाल तो यही लगता है कि विकास की ट्रेन दिल्ली से चल चुकी है, लेकिन नीमच-मंदसौर स्टेशन पर उसका स्टॉपेज अभी भी ‘वेटिंग लिस्ट’ में है।


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Aakash Sharma
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आकाश शर्मा मध्यप्रदेश के नीमच क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार और द टाइम्स ऑफ MP के संपादक हैं। उन्हें प्रिंट मीडिया में 12 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव है। लंबे समय से स्थानीय एवं जनसरोकार से जुड़े मुद्दों की रिपोर्टिंग, समाचार संपादन और समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उन्होंने स्थानीय पत्रकारिता में व्यापक अनुभव हासिल किया है।द टाइम्स ऑफ MP के माध्यम से आकाश शर्मा नीमच, मंदसौर और आसपास के क्षेत्रों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को पाठकों तक पहुंचाने का कार्य करते हैं। उनकी कवरेज में स्थानीय प्रशासन, पुलिस एवं कानून-व्यवस्था, जनसमस्याएं, नागरिक सुविधाएं, राजनीति, सामाजिक गतिविधियां, शिक्षा, कृषि, व्यापार और अन्य जनहित से जुड़े विषय शामिल हैं।उनकी संपादकीय कार्यशैली में तथ्यपरक रिपोर्टिंग, स्रोत-आधारित जानकारी, निष्पक्ष प्रस्तुति और जिम्मेदार पत्रकारिता को प्राथमिकता दी जाती है। संवेदनशील और अपराध से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग में आरोप और प्रमाणित तथ्य के बीच अंतर बनाए रखने तथा उपलब्ध आधिकारिक एवं विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर खबर प्रस्तुत करने पर विशेष ध्यान दिया जाता है।पत्रकारिता के साथ आकाश शर्मा पिछले 4 वर्षों से पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में भी कार्य कर रहे हैं। इस भूमिका में वे कानूनी जागरूकता और जनहित से जुड़े कार्यों से जुड़े रहे हैं। इसके साथ ही वे इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशन में जिला उपाध्यक्ष (District Vice President) के दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं।अनुभव 12 वर्ष — प्रिंट मीडिया एवं पत्रकारिता का अनुभव 4 वर्ष — पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में अनुभव संपादक — द टाइम्स ऑफ MP जिला उपाध्यक्ष — इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशनआकाश शर्मा का उद्देश्य स्थानीय स्तर की महत्वपूर्ण सूचनाओं को विश्वसनीय, स्पष्ट, तथ्यपरक और जिम्मेदार पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाना तथा आम नागरिकों से जुड़े मुद्दों को प्रभावी मंच प्रदान करना है।विशेषज्ञता: स्थानीय पत्रकारिता | प्रिंट मीडिया | समाचार संपादन | डिजिटल पत्रकारिता | स्थानीय समाचार रिपोर्टिंग | जनहित के मुद्दे | कानूनी जागरूकता |

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