Holi Dahan 2026: भद्रा और चंद्र ग्रहण का बड़ा फेरबदल! जानें होलिका दहन कब है और दहन का सबसे सटीक शुभ मुहूर्त

holi dahan 2026
नीमच (Neemuch News)। रंगों और खुशियों के महापर्व होली को लेकर इस साल देशभर के श्रद्धालुओं और ज्योतिष प्रेमियों के बीच भारी ऊहापोह की स्थिति बनी हुई है। जैसे-जैसे फाल्गुन का महीना अपने परवान पर चढ़ रहा है, वैसे-वैसे लोगों के मन में केवल एक ही सवाल कौंध रहा है कि आखिर होलिका दहन कब है? इस साल की पंचांग गणना ने होलिका दहन 2026 (holi dahan 2026) की तारीखों को लेकर विद्वानों के बीच भी चर्चा छेड़ दी है।
पंचांग के अनुसार, इस वर्ष भद्रा काल की उपस्थिति और उसके तुरंत बाद लगने वाले चंद्र ग्रहण ने त्योहार के पारंपरिक समय को बदल दिया है। अक्सर लोग पूर्णिमा तिथि लगते ही दहन की तैयारी शुरू कर देते हैं, लेकिन इस बार मामला थोड़ा पेचीदा है। जाने-माने ज्योतिष आचार्य पंडित योगेश्वर शर्मा ने इन तमाम संशयों पर विराम लगाते हुए स्पष्ट किया है कि शास्त्र सम्मत रूप से होलिका दहन 2026 (holi dahan 2026) के लिए 2 मार्च की मध्यरात्रि का समय ही सबसे श्रेष्ठ और मंगलकारी रहेगा।
भद्रा काल की बड़ी बाधा: क्यों नहीं होगा शाम को दहन?
भारतीय धर्मशास्त्रों में ‘भद्रा’ को शनिदेव की बहन माना गया है और ज्योतिषीय गणना में इसे एक उग्र काल माना जाता है। पंडित योगेश्वर शर्मा के अनुसार, 2 मार्च की शाम को जब सूर्यास्त होगा, उस समय भद्रा का प्रभाव रहेगा। शास्त्रों का स्पष्ट मत है कि भद्रा काल में किया गया होलिका दहन न केवल वर्जित है, बल्कि यह क्षेत्र और परिवार के लिए कष्टकारी भी हो सकता है।
भद्रा मुख और भद्रा पुच्छ के समय को त्यागना अनिवार्य होता है। यही कारण है कि इस साल सूर्यास्त के तुरंत बाद शाम को गोधूलि वेला में दहन नहीं किया जा सकेगा। जो लोग यह जानना चाहते हैं कि होलिका दहन का शुभ मुहूर्त क्या है, उन्हें यह जानकर आश्चर्य होगा कि इस बार शुभ घड़ी आधी रात के बाद आएगी।
होलिका दहन का सटीक समय तालिका:
मुख्य तिथि: 2 मार्च 2026
भद्रा समाप्ति: रात्रि 12:45 बजे के आसपास
अत्यंत शुभ मुहूर्त: रात्रि 12:50 बजे से 02:02 बजे तक
कुल शुभ अवधि: 01 घंटा 12 मिनट
इस विशेष मुहूर्त में पूरे विधि-विधान से पूजन और दहन करने से न केवल नकारात्मक शक्तियां नष्ट होंगी, बल्कि जातकों को पूरे वर्ष सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होगा।
3 मार्च को चंद्र ग्रहण: उत्सव पर लगेगा ‘ब्रेक’
होलिका दहन के अगले दिन धुलंडी यानी रंगों की होली खेलने की परंपरा है। लेकिन होलिका दहन 2026 (holi dahan 2026) के अगले ही दिन यानी 3 मार्च को खगोलीय घटनाक्रम के कारण उत्सव का माहौल थोड़ा शांत रहेगा। पंडित योगेश्वर शर्मा जी ने बताया कि इस वर्ष 3 मार्च को दोपहर 3:20 बजे से शाम 6:47 बजे तक चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है।
चूंकि यह ग्रहण भारत के कई हिस्सों में दिखाई देगा, इसलिए इसका धार्मिक प्रभाव (सूतक काल) भी मान्य होगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण के दौरान और उसके सूतक काल में किसी भी प्रकार का शोर-शराबा, रंग-गुलाल या उत्सव मनाना वर्जित माना जाता है। ग्रहण काल में वातावरण में अशुद्धि बढ़ जाती है, ऐसे में उत्सव के उल्लास को संयम में बदलने की सलाह दी गई है। इसी कारण से 3 मार्च को धुलंडी का पर्व नहीं मनाया जाएगा।
रंगों की होली अब 4 मार्च को: जानिए शास्त्रीय कारण
जब ग्रहण का साया पूरी तरह समाप्त हो जाता है और अगले दिन का सूर्योदय होता है, तभी वातावरण शुद्ध माना जाता है। इसलिए, परंपरा और ज्योतिषीय शुद्धि के नियम को ध्यान में रखते हुए, रंगों का महापर्व 4 मार्च को मनाया जाएगा। यह फैसला उन सभी लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जो होलिका दहन 2026 (holi dahan 2026) के बाद होली खेलने की योजना बना रहे हैं। 4 मार्च की सुबह से ही पूरे देश में भाईचारे और सौहार्द के रंगों के साथ होली खेली जा सकेगी।
सात परिक्रमा और आध्यात्मिक पूर्णता का रहस्य
होलिका दहन के अनुष्ठान में परिक्रमा का विशेष महत्व है। पंडित योगेश्वर शर्मा के अनुसार, दहन के समय अग्नि की सात बार परिक्रमा करना परम शुभ माना गया है। अंक ज्योतिष और अध्यात्म में ‘सात’ अंक को पूर्णता और सप्तऋषियों के आशीर्वाद का प्रतीक माना जाता है। श्रद्धा भाव से की गई सात परिक्रमा परिवार में सुख, शांति और समृद्धि लाती है। दहन की अग्नि में जौ, गेहूं की बालियां और नारियल अर्पित करना भी दरिद्रता का नाश करता है।
होलिका की राख: खुशहाली की चाबी
दहन के बाद अगली सुबह होलिका की राख को घर लाना एक प्राचीन परंपरा है। मान्यता है कि होलिका दहन 2026 (holi dahan 2026) की पवित्र राख को माथे पर लगाने से शारीरिक कष्टों से मुक्ति मिलती है। वहीं, इस राख को घर के मुख्य द्वार या चारों कोनों में छिड़कने से नजर दोष और वास्तु दोष का प्रभाव कम होता है। कई लोग इस राख को तिजोरी में भी रखते हैं ताकि धन का प्रवाह बना रहे।
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