Advertisement

नीमच में जल संकट: शहर को ‘जहर’ पिला रही BTL Company, नपा की हाई-वोल्टेज बैठक में उड़ी ठेकेदार की नींद

BTL Company

नीमच (Neemuch News)नीमच शहर में इन दिनों नलों से पानी नहीं, बल्कि बीमारियों का सीधा निमंत्रण बह रहा है। शहर की प्यास बुझाने और घर-घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने का करोड़ों रुपये का ठेका लेने वाली बीटीएल कंपनी (BTL Company) अब नीमच की जनता की सेहत के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुकी है।

Shubham Solar Solution

पिछले कई हफ्तों से शहर के विभिन्न वार्डों में मटमैला, बदबूदार और दूषित पानी सप्लाई हो रहा है, लेकिन ठेकेदार कंपनी कुंभकर्णी नींद में सोई हुई थी। जनता के इसी भारी आक्रोश को देखते हुए रविवार शाम नगर पालिका में जो हाई-वोल्टेज बैठक हुई, उसने कंपनी के कामकाज की पूरी पोल खोल कर रख दी है।

करोड़ों का ठेका, लेकिन पाइपलाइनों का रखरखाव शून्य

जलकल सभापति छाया जायसवाल द्वारा बुलाई गई आपातकालीन बैठक में बीटीएल कंपनी (BTL Company) की घोर लापरवाही के चीथड़े उड़ गए। नगर पालिका कार्यालय में जब कंपनी के प्रतिनिधि आकाश गौड़ और जलकल शाखा के अधिकारियों को तलब किया गया, तो उनके पास सभापति के तीखे सवालों का कोई जवाब नहीं था।

जमीनी हकीकत यह है कि शहर में बिछाई गई पाइपलाइनों का रखरखाव पूरी तरह से शून्य है। जगह-जगह लीकेज हैं और वाल्व खराब पड़े हैं। इन्हीं लीकेज के जरिए नालियों का गंदा और बदबूदार पानी पीने के साफ पानी में मिल रहा है। ठेकेदार कंपनी सिर्फ कागजों पर मेंटेनेंस का खेल खेल रही है, जबकि जनता नलों से निकलने वाला दूषित पानी पीने को मजबूर है।

ब्लैकलिस्ट करने और एफआईआर की सीधी चेतावनी

इस बैठक में जलकल सभापति ने स्पष्ट शब्दों में अपना ‘हंटर’ चलाते हुए बीटीएल कंपनी (BTL Company)  को आखिरी चेतावनी दे दी है। सभापति ने कड़े तेवर दिखाते हुए कहा कि जनता के स्वास्थ्य के साथ किया जा रहा यह खिलवाड़ अब एक मिनट भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कंपनी को 48 घंटे का स्पष्ट अल्टीमेटम दिया गया है।

यदि इस तय सीमा के भीतर शहर की जल वितरण व्यवस्था और पानी की गुणवत्ता (Water Quality) में सुधार नहीं दिखा, तो नगर पालिका अनुबंध की शर्तों के तहत कंपनी को ब्लैकलिस्ट कर देगी। बात सिर्फ अनुबंध रद्द करने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की भी तैयारी है।

केमिकल डोज और लीकेज: असल बीमारी कहां है?

बैठक के दौरान केमिस्ट सुरेश पवार को भी आड़े हाथों लिया गया। वाटर प्लांट से सप्लाई शुरू होने से पहले पानी में एलम (फिटकरी) और ब्लीचिंग पाउडर का डोज बढ़ाने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।

लेकिन, असली बीमारी फिल्टर प्लांट से ज्यादा बीटीएल कंपनी (BTL Company) के उस सड़े-गले डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क में है, जो प्लांट से साफ पानी निकलने के बावजूद उसे घरों तक पहुंचते-पहुंचते दूषित कर देता है। अगर कंपनी पाइपलाइनों के लीकेज को समय पर नहीं सुधारती है, तो फिल्टर प्लांट पर चाहे जितना केमिकल डाल दिया जाए, जनता तक गंदा पानी ही पहुंचेगा।

जनता की सेहत दांव पर, ठेकेदार की मनमानी

दूषित जल पीने से शहर में टाइफाइड, पीलिया और डायरिया जैसी जलजनित बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है। बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। यह एक गंभीर आपराधिक लापरवाही है कि बीटीएल कंपनी (BTL Company) के जिम्मेदार अधिकारी शिकायतों के बावजूद फील्ड पर नहीं उतरते।

जब वार्डों से शिकायतें आती हैं, तो ठेकेदार के कर्मचारी केवल टालमटोल का रवैया अपनाते हैं। समय पर पानी न देना और जो देना वह भी कीचड़ युक्त, यह कंपनी की कार्यप्रणाली पर बहुत बड़ा सवालिया निशान लगाता है।

अब मौके पर पहुंचेगी स्पेशल टीम

कागजी घोड़े दौड़ाने का वक्त अब खत्म हो चुका है। बैठक में यह ठोस निर्णय लिया गया है कि अब गंदे पानी की कोई भी शिकायत मिलने पर नगर पालिका की एक विशेष ‘क्विक रिस्पॉन्स टीम’ सीधे मौके पर पहुंचेगी। यह टीम पानी का सैंपल लेगी और उसी समय लीकेज या खराबी का पता लगाएगी। यदि जांच में बीटीएल कंपनी (BTL Company) की लापरवाही सामने आती है, तो उसका सीधा खामियाजा ठेकेदार को भुगतना होगा।

नीमच की जनता अब कोरे आश्वासनों से ऊब चुकी है। ‘द टाइम्स ऑफ एमपी’ (कहते हैं जो बाकी छुपाते हैं…) का स्पष्ट मानना है कि प्रशासन को सिर्फ चेतावनी देकर नहीं रुकना चाहिए। यदि 48 घंटे में हालात नहीं बदलते हैं, तो बीटीएल कंपनी (BTL Company) पर ऐसी दंडात्मक कार्रवाई होनी चाहिए जो भविष्य में किसी भी ठेकेदार के लिए एक कड़ा सबक बन जाए।


यह भी पढ़ें: – International Womens Day: VIP कल्चर को दरकिनार कर IHRSO ने पेश की मिसाल: भाई को किडनी देने वाली चंद्रकला, पति की ढाल बनी लक्ष्मी सहित समाज की ‘असली नायिकाओं’ का भव्य सम्मान