नीमच। सफर के दौरान एक छोटी सी लापरवाही कैसे बड़ा रूप ले सकती है और पल भर में किसी परिवार की खुशियां कैसे खौफ में बदल सकती हैं, इसका ताजा उदाहरण मध्य प्रदेश के नीमच जिले में देखने को मिला।
लेकिन सबसे बड़ी राहत की बात यह रही कि पुलिस की सतर्कता और ‘डायल-112’ टीम की त्वरित कार्रवाई ने एक बड़े संभावित हादसे को टाल दिया। हाईवे पर स्थित एक पेट्रोल पंप पर अपने परिवार से बिछड़ गए इन दो खोए बच्चे (khoye bache) को पुलिस ने सकुशल उनके परिजनों के सुपुर्द कर दिया है। इस पूरी घटना के बाद से ही इलाके में पुलिस की कार्यप्रणाली और तत्परता की जमकर तारीफ हो रही है।
पानी पीने उतरे बच्चे, और आंखों से ओझल हो गई गाड़ी
यह घटना 11 मार्च 2026 की है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, नीमच सिटी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले हाईवे रोड पर स्थित बरखेड़ा हाडा पेट्रोल पंप पर एक पिकअप वाहन ईंधन (पेट्रोल/डीजल) भरवाने के लिए रुका था।
इसी वाहन में एक परिवार अपने दो छोटे बच्चों के साथ सफर कर रहा था। लंबी यात्रा के कारण जब गाड़ी रुकी, तो दोनों मासूम बच्चे प्यास बुझाने के मकसद से पानी पीने के लिए नीचे उतरे। लेकिन इसी बीच एक बड़ी चूक हो गई। परिजनों को लगा कि बच्चे गाड़ी में ही पीछे बैठे या सो रहे हैं, और ईंधन डलवाने के तुरंत बाद पिकअप वहां से आगे निकल गई।
अनजान जगह पर रोते-बिलखते रहे मासूम
जब गाड़ी उनकी आंखों से ओझल हो गई, तो दोनों बच्चे बुरी तरह घबरा गए। हाईवे का भारी ट्रैफिक, शोरगुल और एक अनजान जगह पर खुद को बिल्कुल अकेला पाकर इन मासूमों का रो-रोकर बुरा हाल था। वे बदहवास होकर इधर-उधर भागते हुए अपने माता-पिता को तलाश रहे थे।

पेट्रोल पंप पर मौजूद कुछ सजग नागरिकों की नजर जब इन डरे-सहमे बच्चों पर पड़ी, तो उन्होंने तुरंत स्थिति की गंभीरता को समझा। बिना एक भी पल गंवाए, राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम (डायल-112 भोपाल) को इस बात की सूचना दी गई कि दो खोए बच्चे (khoye bache) लावारिस हालत में यहाँ मिले हैं।
डायल-112 का त्वरित एक्शन और पुलिस की संवेदनशीलता
सूचना मिलते ही भोपाल स्थित कंट्रोल रूम ने तुरंत एक्शन लिया। स्थानीय अधिकारियों के निर्देश पर, नीमच सिटी थाना क्षेत्र में मुस्तैद डायल-112 की टीम को तत्काल मौके पर पहुंचने का आदेश दिया गया। चंद मिनटों के भीतर ही मदद के लिए डायल-112 वाहन घटनास्थल पर पहुंच गया।
इस टीम में तैनात सहायक उप निरीक्षक (सउनि) विजेंद्र सिंह चौहान और पायलेट विनोद शर्मा ने सबसे पहले दोनों बच्चों को अपने सुरक्षित संरक्षण में लिया। पुलिस जवानों ने पहले बच्चों को पुचकारा, उन्हें पानी पिलाकर शांत कराया और फिर बड़े ही प्यार से उनसे जानकारी जुटाने का प्रयास किया।
स्मार्ट पुलिसिंग: ऐसे खोज निकाला परिजनों को
पूछताछ में बच्चों ने अपनी तोतली और घबराई हुई आवाज में बताया कि वे एक पिकअप गाड़ी से जा रहे थे। पेट्रोल पंप पर पानी पीने के लिए नीचे उतरे थे, तभी गाड़ी उन्हें छोड़कर चली गई। पुलिस जवानों के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती उस पिकअप वाहन का पता लगाना था।
जवानों ने सूझबूझ का परिचय देते हुए पेट्रोल पंप के सीसीटीवी कैमरों को खंगाला और बच्चों द्वारा बताई गई आधी-अधूरी जानकारी के आधार पर पिकअप का नंबर ट्रेस कर लिया। तकनीकी सहायता से उस नंबर के जरिए वाहन मालिक और फिर बच्चों के परिजनों का संपर्क नंबर प्राप्त कर लिया गया।
पुलिस ने तुरंत फोन कर घबराए परिजनों को तसल्ली दी कि उनके दोनों खोए बच्चे (khoye bache) बिल्कुल सुरक्षित हैं।
जब थाने में हुआ भावुक मिलन
उधर, पिकअप में सफर कर रहे परिवार को जब तक बच्चों के न होने का अहसास हुआ, तब तक उनके भी होश उड़ चुके थे। पुलिस का फोन आते ही परिजनों की जान में जान आई और उन्हें तत्काल नीमच सिटी थाने पहुंचने को कहा गया। इधर, डायल-112 का स्टाफ दोनों बच्चों को अपने वाहन में पूरे लाड़-प्यार के साथ सुरक्षित बैठाकर थाने ले आया।
कुछ ही देर में रोते-बिलखते परिजन भी थाने पहुंच गए। थाने में अपने खोए बच्चे (khoye bache) को सुरक्षित देखते ही माता-पिता दौड़कर उनसे लिपट गए और फूट-फूट कर रोने लगे। यह भावुक दृश्य देखकर वहां मौजूद पुलिस अधिकारियों की आंखें भी नम हो गईं।
पुलिस ने नियमानुसार परिजनों की पहचान की, आवश्यक सत्यापन (वेरिफिकेशन) प्रक्रिया पूरी की और अंततः दोनों मासूमों को सुरक्षित उनके माता-पिता के सुपुर्द कर दिया। परिजनों ने भरे मन से पुलिस विभाग का हाथ जोड़कर हृदय से आभार व्यक्त किया।
यात्रा के दौरान सावधानी बरतने की अपील
नीमच पुलिस ने इस घटना के माध्यम से आम नागरिकों और यात्रा करने वाले सभी परिजनों से एक सख्त अपील की है। पुलिस का कहना है कि सफर के दौरान अपने बच्चों का विशेष ध्यान रखें।
किसी भी ढाबे, रेस्टोरेंट या पेट्रोल पंप पर रुकने के बाद, गाड़ी को आगे बढ़ाने से पहले यह अच्छी तरह सुनिश्चित कर लें कि परिवार के सभी सदस्य वाहन में मौजूद हैं, ताकि किसी भी माता-पिता को इस तरह अपने खोए बच्चे (khoye bache) की तलाश में न भटकना पड़े। आपातकालीन पुलिस सेवाएं हमेशा जनता की सुरक्षा के लिए तत्पर हैं, लेकिन हमारी सतर्कता ही बचाव है।
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