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MP IAS Property: मनु श्रीवास्तव सबसे अमीर, 12 कलेक्टरों के पास नहीं है अपना घर

MP IAS Property

नीमच। मध्य प्रदेश के IAS अधिकारियों की घोषित संपत्तियों को लेकर सामने आई नई रिपोर्ट ने प्रशासनिक हलकों में काफी चर्चा पैदा कर दी है। MP IAS Property से जुड़ी इस रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश के 391 IAS अधिकारियों में अपर मुख्य सचिव मनु श्रीवास्तव सबसे अधिक संपत्ति वाले अधिकारी हैं, जबकि कई जिलों के कलेक्टरों के पास खुद का घर या जमीन तक नहीं है।

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सरकार को दिए गए संपत्ति विवरण के अनुसार मनु श्रीवास्तव के पास करीब 19 करोड़ 50 लाख रुपए की अचल संपत्ति है। वहीं राज्य के मुख्य सचिव अनुराग जैन के पास लगभग 4 करोड़ 15 लाख रुपए की संपत्ति दर्ज की गई है। इस तरह मनु श्रीवास्तव की संपत्ति मुख्य सचिव से लगभग चार से पांच गुना अधिक बताई गई है।

टॉप IAS अधिकारियों की संपत्ति

MP IAS Property रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश के कुछ प्रमुख IAS अधिकारियों की संपत्ति का विवरण इस प्रकार है।

नामकितनी प्रॉपर्टीकिस तरह की प्रॉपर्टीकहाँ-कहाँ प्रॉपर्टी
अनुराग जैन4.15 करोड़फ्लैट-2, प्लॉट-1, मकान-1नोएडा, जयपुर, भोपाल
मनु श्रीवास्तव19.50 करोड़मकान-2प्रयागराज, नोएडा
डॉ. राजेश राजोरा1.73 करोड़कृषि भूमि-3, ऑफिस-1, प्लॉट-1अहमदाबाद, भोपाल
नीरज मंडलोई4.97 करोड़कृषि भूमि-2, प्लॉट-2, मकान-1, फ्लैट-1इंदौर, खंडवा, भोपाल
संजय दुबे4.67 करोड़फ्लैट-1, मकान-2, कृषि भूमि-2भोपाल, टीकमगढ़
संजय कुमार शुक्लाजानकारी नहींकृषि भूमि-4, फ्लैट-1, प्लॉट-2झारखंड, कोरबा, भोपाल, नोएडा, सीहोर
राघवेंद्र सिंह2.51 करोड़कृषि भूमि-1, प्लॉट-1इंदौर, रीवा
शिवशेखर शुक्ला3.25 करोड़मकान-1, फ्लैट-1, कृषि भूमि-1भोपाल
मनीष सिंह65 लाखमकान-1, प्लॉट-1, कृषि भूमि-1भोपाल, इंदौर
आलोक कुमार सिंह67 लाखप्लॉट-1इंदौर

इन आंकड़ों से साफ होता है कि MP IAS Property के मामले में वरिष्ठ अधिकारियों के बीच भी काफी अंतर दिखाई देता है।

कलेक्टरों में सबसे अमीर किशोर कन्याल

जिला कलेक्टरों की बात करें तो गुना कलेक्टर किशोर कन्याल सबसे ज्यादा संपत्ति वाले कलेक्टर बताए गए हैं। उनके पास लगभग 3 करोड़ 18 लाख रुपए की अचल संपत्ति है। उनकी संपत्ति में दो मकान, एक प्लॉट और कृषि भूमि शामिल है।

कलेक्टरों की संपत्ति के आधार पर तैयार सूची इस प्रकार है।

नामकितनी प्रॉपर्टीकिस तरह की प्रॉपर्टीकहाँ-कहाँ प्रॉपर्टी
किशोर कन्याल3.18 करोड़मकान-2, प्लॉट-1, कृषि भूमि-1भोपाल, गौतमबुद्ध नगर, नोएडा
अंजू पवन भदौरिया3.16 करोड़कृषि भूमि-1, प्लॉट-2, फ्लैट-2भोपाल
अंशुल गुप्ता3.11 करोड़फ्लैट-1, मकान-3, कृषि भूमि-1भोपाल, इंदौर
धरणेंद्र जैन2.43 करोड़कृषि भूमि-5, मकान-3भोपाल, टीकमगढ़, इंदौर
प्रियंक मिश्रा2.40 करोड़मकान-1लखनऊ
नीरज वशिष्ठ2.40 करोड़मकान-1, कृषि भूमि-2सीहोर, भोपाल
विवेक श्रीवास्तव2.30 करोड़कृषि भूमि-2, दुकान-3, मकान-1इंदौर, झांसी, टीकमगढ़
सोमेश मिश्रा1.81 करोड़कृषि भूमि-4, प्लॉट-1, मकान-1भोपाल, चित्रकूट, प्रयागराज
कौशलेंद्र सिंह1.50 करोड़मकान-1लखनऊ
रानी बाटड1.50 करोड़मकान-2छिंदवाड़ा, भोपाल

12 कलेक्टरों के पास नहीं है कोई संपत्ति

MP IAS Property रिपोर्ट का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि प्रदेश के 55 जिलों में से 12 जिलों के कलेक्टरों ने अपने पास कोई अचल संपत्ति नहीं बताई है।

नामजिला
भव्य मित्तलखरगोन
नीतू माथुरअलीराजपुर
ऋषभ गुप्ताखंडवा
सतीश कुमार एससतना
प्रतिमा पालरीवा
गौरव बेनालसिंगरौली
ऋतुराजदेवास
लोकेश कुमार जांगिड़मुरैना
रिजु बाफनाशाजापुर
शीतला पटलेनरसिंहपुर
बालागुरु केसीहोर
हृदयल पंचोलीअनूपपुर

यह तथ्य बताता है कि MP IAS Property के आंकड़ों में काफी विविधता देखने को मिलती है।

16 साल में घट गई प्लॉट की कीमत

इस रिपोर्ट में एक अनोखा मामला भी सामने आया है। नर्मदापुरम कलेक्टर सोनिया मीणा ने वर्ष 2010 में करीब 4.5 लाख रुपए में एक प्लॉट खरीदा था, लेकिन मौजूदा समय में उस प्लॉट की कीमत घटकर लगभग 1 लाख रुपए रह गई है।

आमतौर पर समय के साथ संपत्ति की कीमत बढ़ती है, लेकिन इस मामले में उल्टा हुआ और करीब 16 साल में कीमत चार गुना से ज्यादा घट गई।

कुछ अधिकारियों की संपत्ति में बदलाव

कुछ अधिकारियों की संपत्ति में कमी भी दर्ज की गई है। उदाहरण के लिए टीकमगढ़ कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय ने वर्ष 2024 में अपनी संपत्ति 6.20 करोड़ रुपए बताई थी, लेकिन अब उनकी संपत्ति का मूल्य करीब 2.30 करोड़ रुपए बताया गया है।

वहीं श्योपुर कलेक्टर अर्पित वर्मा ने पिछले साल कोई संपत्ति घोषित नहीं की थी, लेकिन इस साल उन्होंने लखनऊ में 79.34 लाख रुपए का प्लॉट होने की जानकारी दी है।

पारदर्शिता के लिए जरूरी है संपत्ति खुलासा

विशेषज्ञों का मानना है कि IAS अधिकारियों द्वारा हर साल संपत्ति का विवरण देना प्रशासनिक पारदर्शिता का अहम हिस्सा है। इससे जनता को सरकारी अधिकारियों की आर्थिक स्थिति और संपत्ति में होने वाले बदलावों की जानकारी मिलती है।

MP IAS Property रिपोर्ट भी इसी प्रक्रिया के तहत सामने आई है, जो प्रदेश के प्रशासनिक ढांचे की पारदर्शिता को दर्शाती है।


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