नीमच (Neemuch News)। Jhajharwada Fire की एक ऐसी घटना रविवार को नीमच में देखने को मिली, जिसने पूरे औद्योगिक क्षेत्र को हिलाकर रख दिया। नीमच के झाझंरवाड़ा औद्योगिक क्षेत्र में स्थित एक विशाल फ्रूट कोल्ड स्टोरेज प्लांट में अचानक भीषण आग लग गई, जिसके बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया। रविवार दोपहर जब लोग छुट्टी के मूड में थे, तभी अचानक इस प्लांट से उठती आग की लपटों ने प्रशासन और स्थानीय लोगों के हाथ-पांव फुला दिए।
आसमान छूती लपटें और धुएं का गुबार
नीमच के झाझंरवाड़ा इंडस्ट्रियल एरिया में लगी यह आग इतनी भीषण थी कि इसकी लपटें कई किलोमीटर दूर से ही आसमान में तांडव करती नजर आ रही थीं। काले धुएं का गुबार इतना घना था कि करीब 5 से 6 किलोमीटर के दायरे में आसमान पूरी तरह से काला पड़ गया। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि Jhajharwada Fire की शुरुआत मामूली धुएं से हुई थी, लेकिन देखते ही देखते इसने पूरे कोल्ड स्टोरेज को अपने आगोश में ले लिया। Jhajharwada Fire की खबर जैसे ही सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर फैली, मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई।
दमकल विभाग का रेस्क्यू ऑपरेशन
Jhajharwada Fire हादसे की जानकारी मिलते ही नीमच नगर पालिका और आसपास के क्षेत्रों से दमकल की तीन गाड़ियां तुरंत मौके पर पहुँचीं। आग की विभीषणता को देखते हुए दमकल कर्मियों ने बिना समय गंवाए मोर्चा संभाला। बताया जा रहा है कि कोल्ड स्टोरेज के अंदर बड़ी मात्रा में इंसुलेशन मटेरियल और प्लास्टिक के कट्टे मौजूद थे, जिसकी वजह से आग बुझाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। दमकल कर्मियों को आग पर पूरी तरह काबू पाने में घंटों की कड़ी मेहनत करनी पड़ी। कई राउंड पानी डालने के बाद कहीं जाकर लपटों को शांत किया जा सका।
लाखों की मशीनरी हुई खाक
इस Jhajharwada Fire कांड में सबसे ज्यादा नुकसान प्लांट के मालिक को उठाना पड़ा है। जानकारी के अनुसार, यह एक फ्रूट कोल्ड स्टोरेज था, जहाँ फलों को सुरक्षित रखने के लिए करोड़ों रुपये की लागत से आधुनिक कूलिंग मशीनें और कंप्रेसर लगाए गए थे। हालाँकि, आग लगने के समय प्लांट में कोई फल मौजूद नहीं था, लेकिन अंदर रखी हुई लाखों की मशीनरी और अन्य कीमती तकनीकी उपकरण जलकर पूरी तरह राख हो गए हैं। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार, नुकसान का आंकड़ा 50 लाख रुपये से भी ऊपर जा सकता है।
बंद था प्लांट, टल गया बड़ा हादसा

आग बुझने के बाद फैक्ट्री के अंदर लोग पहुंचे।
राहत की बात यह रही कि पिछले कुछ दिनों से यह कोल्ड स्टोरेज प्लांट बंद चल रहा था। रविवार का दिन होने और प्लांट बंद होने के कारण वहां कोई भी कर्मचारी मौजूद नहीं था। यदि यह हादसा प्लांट के चालू रहने के दौरान होता, तो शायद अंदर काम कर रहे दर्जनों मजदूरों की जान को खतरा हो सकता था। इस Jhajharwada Fire में किसी भी तरह की जनहानि न होना प्रशासन और मालिकों के लिए एक बड़ी सांत्वना की बात है।
शॉर्ट सर्किट की आशंका और जांच


शुरुआती जांच में प्रशासन और पुलिस टीम का मानना है कि आग लगने का मुख्य कारण बिजली का शॉर्ट सर्किट हो सकता है। अक्सर बंद पड़े प्लांट्स में बिजली के पुराने तारों या जंक्शन बॉक्स में नमी के कारण शॉर्ट सर्किट की संभावना बढ़ जाती है। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और अग्निशमन विभाग की टीम आग लगने के वास्तविक कारणों की तकनीकी जांच कर रही है। राजस्व विभाग की टीम भी मौके पर पहुँच चुकी है ताकि हुए नुकसान का सटीक पंचनामा तैयार किया जा सके।
औद्योगिक सुरक्षा पर गंभीर सवाल
नीमच के औद्योगिक क्षेत्रों में अक्सर ऐसी घटनाएं सामने आती रहती हैं, जो सुरक्षा मानकों पर सवालिया निशान लगाती हैं। Jhajharwada Fire ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि फैक्ट्रियों और स्टोरेज प्लांट्स में ‘फायर सेफ्टी ऑडिट’ की सख्त जरूरत है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि प्लांट में ऑटोमैटिक फायर स्प्रिंकलर सिस्टम लगा होता, तो शायद नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता था।
नीमच की यह Jhajharwada Fire घटना अन्य उद्यमियों के लिए भी एक सबक है कि वे अपने संस्थानों में बिजली के उपकरणों और फायर सेफ्टी मानकों की नियमित जांच करवाते रहें। प्रशासन अब झाझंरवाड़ा औद्योगिक क्षेत्र के अन्य प्लांट्स की भी जांच करने की योजना बना रहा है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
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