नीमच (Neemuch News): देश में इस समय एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति और केवाईसी को लेकर जबरदस्त भ्रम की स्थिति बनी हुई है। सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर उड़ रही खबरों ने आम जनता के बीच डर पैदा कर दिया है कि यदि उन्होंने तुरंत बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण नहीं कराया, तो उनका गैस कनेक्शन काट दिया जाएगा। हालांकि, अब पेट्रोलियम मंत्रालय ने इन खबरों पर अपनी चुप्पी तोड़ी है और LPG e-KYC Rules को लेकर विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया है। सरकार का कहना है कि हर ग्राहक को गैस एजेंसी की कतार में लगने की जरूरत नहीं है।
भ्रम और डर का माहौल: क्या है सरकार की सफाई?

पिछले कुछ दिनों से देश के विभिन्न हिस्सों में गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें देखी जा रही हैं। लोगों में यह डर बैठ गया है कि बिना ई-केवाईसी के उनकी रसोई का चूल्हा बुझ सकता है। इस पर पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि LPG e-KYC Rules कोई नया कानून नहीं है, बल्कि यह एक पुराने सुरक्षा अभियान का हिस्सा है। मंत्रालय के अनुसार, LPG e-KYC Rules केवल उन्हीं ग्राहकों के लिए अनिवार्य है जिनका डेटा रिकॉर्ड में अधूरा है या जिनका वेरिफिकेशन अब तक नहीं हो पाया है।
सरकार का प्राथमिक लक्ष्य ‘घोस्ट कंज्यूमर्स’ यानी फर्जी कनेक्शनों को सिस्टम से बाहर करना है। कई मामलों में देखा गया है कि एक ही नाम पर कई कनेक्शन चल रहे हैं या मृत व्यक्तियों के नाम पर सब्सिडी का लाभ उठाया जा रहा है। इसी कालाबाजारी को रोकने के लिए बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन पर जोर दिया जा रहा है।
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किसे करानी होगी e-KYC और किसे मिलेगी छूट?
मंत्रालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, LPG e-KYC Rules को दो श्रेणियों में बांटा गया है:
सामान्य एलपीजी ग्राहक LPG e-KYC Rules: यदि आप एक साधारण ग्राहक हैं और पहले अपना बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन करा चुके हैं, तो आपको दोबारा इस प्रक्रिया से गुजरने की कोई आवश्यकता नहीं है। यदि आपका आधार लिंक है और रिकॉर्ड अपडेटेड है, तो आपका कनेक्शन पूरी तरह सुरक्षित है।
उज्ज्वला योजना के लाभार्थी LPG e-KYC Rules: प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत लाभ लेने वाले ग्राहकों के लिए नियम थोड़े सख्त हैं। इन ग्राहकों को हर वित्तीय वर्ष में कम से कम एक बार अपनी ई-केवाईसी अपडेट करानी होती है। यह विशेष रूप से उन लोगों के लिए जरूरी है जो साल में 7 सिलेंडर लेने के बाद 8वें और 9वें रिफिल पर मिलने वाली टारगेटेड DBT सब्सिडी का लाभ लेना चाहते हैं।
घर बैठे मिनटों में पूरी करें प्रक्रिया
आम जनता की सुविधा के लिए मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि ग्राहकों को गैस एजेंसी जाकर घंटों लाइन में लगने की जरूरत नहीं है। ई-केवाईसी की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और मुफ्त रखा गया है। ग्राहक अपनी संबंधित गैस कंपनी (Indane, HP, या Bharat Gas) के मोबाइल ऐप के जरिए आधार कार्ड और रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर की मदद से इसे घर बैठे पूरा कर सकते हैं। इसके लिए केवल ‘फेस ऑथेंटिकेशन’ या ओटीपी की आवश्यकता होती है।
क्या कहता है 2018 का सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला?
कानूनी तौर पर देखा जाए तो LPG e-KYC Rules को लेकर सरकार की भी अपनी सीमाएं हैं। साल 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया था कि आधार केवल उन्हीं सेवाओं के लिए अनिवार्य किया जा सकता है जहां सरकार सीधे तौर पर सब्सिडी (DBT) दे रही हो।
चूंकि एलपीजी कनेक्शन अपने आप में कोई सब्सिडी नहीं है और करोड़ों लोग बिना किसी सरकारी मदद के बाजार भाव पर गैस खरीदते हैं, इसलिए उन पर आधार बायोमेट्रिक अनिवार्य करना कानूनी रूप से सही नहीं है। कानून स्पष्ट है कि ई-केवाईसी केवल ‘उज्ज्वला’ या ‘पहल’ योजना के तहत सब्सिडी लेने वालों के लिए जरूरी है, शेष लोगों के लिए यह स्वैच्छिक है।
ईरान संकट और सप्लाई चेन में रुकावट
इस समय LPG e-KYC Rules को लेकर मची अफरा-तफरी की एक बड़ी वजह वैश्विक परिस्थितियां भी हैं। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार अस्थिर हो गया है। विशेष रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) के प्रभावित होने से भारत में एलपीजी की सप्लाई पर बुरा असर पड़ा है। भारत अपनी जरूरत का 54% एलएनजी इसी रास्ते से मंगाता है। सप्लाई कम होने और डिमांड बढ़ने की वजह से सरकार ने बुकिंग नियमों में भी बदलाव किए हैं:
6 मार्च को बुकिंग गैप 21 दिन किया गया।
9 मार्च को इसे बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया।
12 मार्च को ग्रामीण क्षेत्रों के लिए यह अंतर 45 दिन तक पहुंच गया।
सरकार ने भरोसा दिलाया है कि सप्लाई की कमी को वैकल्पिक मार्गों से पूरा करने की कोशिश की जा रही है और ग्राहकों को घबराने की जरूरत नहीं है। LPG e-KYC Rules का पालन केवल वही करें जिन्हें विभाग से व्यक्तिगत संदेश प्राप्त हुआ है।
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