नीमच। प्राकृतिक संपदा की लूट और नियमों को ताक पर रखकर काम करने वाले माफियाओं के खिलाफ नीमच जिला प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी और सख्त कार्रवाई की है। जिले में लगातार मिल रही शिकायतों के बाद, कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी हिमांशु चंद्रा ने एक कड़ा संदेश देते हुए एक नामी निर्माण कंपनी सांवलिया कंस्ट्रक्शन पर भारी खनन जुर्माना लगाया है। इस कार्रवाई से पूरे जिले के ठेकेदारों, बिल्डरों और अवैध उत्खनन में लिप्त माफियाओं की नींद उड़ गई है।
प्रशासन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जिले की सीमा के भीतर किसी भी प्रकार का अवैध उत्खनन अब किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सांवलिया कंस्ट्रक्शन इन्फाटेक लिमिटेड की बड़ी लापरवाही रंगे हाथों पकड़ी गई
जानकारी के मुताबिक, खनिज विभाग और प्रशासन को पिछले काफी समय से गुप्त सूचनाएं मिल रही थीं कि कुछ बड़ी निर्माण कंपनियों द्वारा बिना अनुमति के और रॉयल्टी चुकाए बिना ही बड़े पैमाने पर मुरूम का अवैध उत्खनन किया जा रहा है। इसी गुप्त सूचना के आधार पर जब कलेक्टर के सख्त निर्देश पर खनिज विभाग की टीम ने जमीनी स्तर पर जाकर गहन जांच की, तो ‘सांवलिया कन्स्ट्रक्शन इन्फाटेक लिमिटेड’ की भारी अनियमितताएं उजागर हुईं।
इस कंपनी द्वारा सड़क और अन्य निर्माण कार्यों में भराव के लिए बिना किसी वैध सरकारी अनुमति के मुरूम खोदी जा रही थी। नियमानुसार, किसी भी प्रकार के व्यावसायिक या निर्माण कार्य के लिए खनिज विभाग से पूर्व अनुमति लेना और उसकी तय रॉयल्टी जमा करना अनिवार्य होता है।
लेकिन कंपनी ने सरकारी राजस्व को सीधा नुकसान पहुंचाते हुए इस नियम का खुलेआम उल्लंघन किया। इसी हेराफेरी और सरकारी खजाने को चूना लगाने के आरोप में प्रशासन ने कंपनी पर यह सख्त खनन जुर्माना आरोपित किया है।
5 लाख 77 हजार का खनन जुर्माना: समझिए पेनाल्टी का पूरा गणित
प्रशासन द्वारा लगाया गया यह खनन जुर्माना केवल एक सामान्य पेनाल्टी नहीं है, बल्कि यह मध्यप्रदेश खनिज (अवैध खनन, परिवहन एवं भंडारण निवारण) नियम 2022 के तहत एक बहुत ही सख्त कानूनी कार्रवाई का हिस्सा है।
आधिकारिक आदेश के अनुसार, इस भारी-भरकम खनन जुर्माना की गणना तीन प्रमुख और कड़े बिंदुओं के आधार पर की गई है:
रॉयल्टी का 15 गुना दंड: कंपनी ने जितनी मुरूम अवैध रूप से निकाली थी, उसकी मूल रॉयल्टी का सीधे 15 गुना अर्थदंड लगाया गया है। यह राशि ₹2,88,750 तय की गई है।
पर्यावरण को हुए नुकसान की भरपाई: प्रशासन ने केवल खनिज की चोरी का ही पैसा नहीं वसूला, बल्कि प्रकृति के साथ किए गए खिलवाड़ की कीमत भी तय की है। इसलिए पर्यावरण क्षतिपूर्ति के रूप में उतनी ही राशि यानी ₹2,88,750 और जोड़ी गई है।
प्रशासनिक शुल्क: इसके ऊपर ₹1,000 का अनिवार्य प्रशासनिक शुल्क भी लगाया गया है।
इस प्रकार इन सभी आंकड़ों को मिलाकर कुल ₹5,77,500 का भारी खनन जुर्माना तय किया गया है, जिसका भुगतान अब कंपनी को हर हाल में करना ही होगा।
15 दिनों का सख्त अल्टीमेटम, नहीं तो होगी संपत्तियों की कुर्की
कलेक्टर ने सिर्फ कागजों पर खनन जुर्माना लगाकर ही फाइल बंद नहीं की है, बल्कि इसकी शत-प्रतिशत वसूली के लिए एक बेहद सख्त और स्पष्ट डेडलाइन भी तय कर दी है। जिला खनिज अधिकारी को कड़े निर्देश दिए गए हैं कि इस पूरी राशि को आगामी 15 दिनों के भीतर शासकीय कोष में जमा कराना सुनिश्चित करें।
प्रशासन की ओर से जारी आदेश में यह साफ चेतावनी दी गई है कि यदि सांवलिया कन्स्ट्रक्शन इन्फाटेक लिमिटेड तय समय सीमा के भीतर यह राशि जमा करने में आनाकानी करती है या विफल रहती है, तो उसके खिलाफ मध्य प्रदेश भू-राजस्व संहिता (Land Revenue Code) के कड़े प्रावधानों के तहत वसूली की जाएगी। इसके तहत कंपनी की संपत्तियों की कुर्की और जब्ती जैसी दंडात्मक कार्रवाई भी तुरंत अमल में लाई जा सकती है।
खनिज विभाग अलर्ट पर, आम जनता ने की प्रशासन की सराहना
इस बड़े एक्शन के बाद जिले का खनिज विभाग भी पूरी तरह से अलर्ट मोड पर आ गया है। विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह केवल एक इकलौती कार्रवाई नहीं है, बल्कि जिले भर में ऐसे तमाम निर्माण कार्यों और खदानों की सघन जांच के लिए विशेष उड़नदस्ते (Flying Squads) तैयार किए गए हैं।
प्रशासन द्वारा लगाया गया यह भारी-भरकम जुर्माना इस बात का प्रमाण है कि अब जिले में ‘जीरो टॉलरेंस‘ की नीति लागू हो चुकी है। प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा और सरकारी नियमों के पालन के लिए उठाया गया यह कदम भविष्य में अन्य माफियाओं के लिए एक बड़ा सबक साबित होगा।
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