उज्जैन (Ujjain News): उज्जैन-भोपाल रेल मार्ग पर शुक्रवार को एक बड़ा हादसा (Ujjain Railway Accident) टल गया, लेकिन रेलवे के बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। तराना स्टेशन के पास टिल्लर नदी पर गार्डर बदलने के दौरान एक भारी-भरकम क्रेन अनियंत्रित होकर सीधे नदी में जा गिरी। इस Ujjain Railway Accident के बाद उज्जैन और भोपाल के बीच रेल यातायात पूरी तरह चरमरा गया है। हालांकि, राहत की बात यह रही कि इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई है, वरना एक बड़ी त्रासदी हो सकती थी।
उज्जैन-भोपाल रेल मार्ग पर टिल्लर नदी में बड़ा हादसा
मध्य प्रदेश के मालवा अंचल में रेलवे की लाइफलाइन कहे जाने वाले उज्जैन-भोपाल ट्रैक पर शुक्रवार दोपहर उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब तराना स्टेशन के पास एक निर्माणाधीन ब्रिज पर काम कर रही क्रेन भरभरा कर नदी में गिर गई। यह Ujjain Railway Accident उस समय हुआ जब रेलवे का अमला पुराने ब्रिज के लोहे के भारी गार्डर बदलने की प्रक्रिया में लगा था।
Ujjain Railway Accident उज्जैन से लगभग 30 किलोमीटर दूर घटित हुई। टिल्लर नदी पर बने दो समांतर ब्रिजों में से एक पुराना हो चुका है, जिसके रखरखाव का काम पिछले दो दिनों से युद्धस्तर पर चल रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोपहर के समय जब क्रेन गार्डर को उठाकर सेट कर रही थी, तभी अचानक संतुलन बिगड़ा और क्रेन सीधे पानी में समा गई। क्रेन के साथ वह भारी गार्डर भी नदी में जा गिरा, जिसकी कीमत लाखों में बताई जा रही है।
कैसे हुआ हादसा: तकनीकी चूक या बड़ी लापरवाही?
Ujjain Railway Accident के पीछे कहीं न कहीं सुरक्षा मानकों की अनदेखी नजर आती है। तराना के पास जिस स्थान पर यह काम चल रहा था, वहां मिट्टी का कटाव और क्रेन की पोजिशनिंग को लेकर सवाल उठना लाजिमी है।
असंतुलन का कारण: जानकारों का मानना है कि गार्डर का वजन क्रेन की क्षमता से अधिक हो सकता था या फिर क्रेन को जिस धरातल पर खड़ा किया गया था, वह उतना मजबूत नहीं था।
बाल-बाल बची बड़ी दुर्घटना: रेलवे कर्मचारियों का कहना है कि अगर क्रेन गिरने के दौरान कुछ इंच भी दाईं ओर झुकती, तो वह बगल में स्थित दूसरे चालू ब्रिज से टकरा सकती थी। अगर ऐसा होता, तो अप-डाउन दोनों ट्रैक पूरी तरह बंद हो जाते और मरम्मत में हफ्तों लग सकते थे।
वित्तीय नुकसान: इस हादसे में क्रेन को जो नुकसान पहुंचा है और जिस तरह से कीमती गार्डर नदी में गिरा है, उससे रेलवे को लाखों रुपए की चपत लगी है।
प्रभावित ट्रेनों की सूची और यात्रियों की परेशानी
इस Ujjain Railway Accident का सबसे बुरा असर आम यात्रियों पर पड़ा है। उज्जैन-भोपाल रेल सेक्शन बेहद व्यस्त माना जाता है, जहाँ से हर घंटे कई महत्वपूर्ण ट्रेनें गुजरती हैं। घटना के तुरंत बाद सुरक्षा कारणों से बिजली की सप्लाई (OHE) काट दी गई और ट्रेनों को अलग-अलग स्टेशनों पर खड़ा करना पड़ा।
हादसे के कारण प्रभावित प्रमुख ट्रेनें:
उज्जैन-भोपाल पैसेंजर
इंदौर-जबलपुर ओवरनाइट एक्सप्रेस
मालवा एक्सप्रेस
साबरमती एक्सप्रेस
कई इंटरसिटी और लंबी दूरी की गाड़ियाँ
वर्तमान में रेलवे प्रशासन एक ही ट्रैक से ट्रेनों का संचालन कर रहा है, जिससे ‘कॉशन’ (धीमी गति) के साथ गाड़ियां निकाली जा रही हैं। इसके कारण ट्रेनें अपने निर्धारित समय से 2 से 4 घंटे की देरी से चल रही हैं। यात्रियों को स्टेशनों पर पीने के पानी और भोजन की समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
रेलवे की त्वरित कार्रवाई: राहत दल मौके पर तैनात
हादसे की सूचना मिलते ही उज्जैन रेलवे स्टेशन से वरिष्ठ इंजीनियर और ‘एक्सीडेंट रिलीफ ट्रेन’ (ART) को मौके पर रवाना किया गया। रेलवे के पीआरओ के अनुसार, प्राथमिकता क्रेन और गार्डर को नदी से बाहर निकालने की नहीं, बल्कि ट्रैक को सुरक्षित कर यातायात सामान्य करने की है।
Ujjain Railway Accident के बाद मौके पर मौजूद कर्मचारियों ने बताया कि शाम तक रूट को पूरी क्षमता से शुरू करने के प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि, नदी में गिरी क्रेन को निकालने के लिए भारी मशीनों और अतिरिक्त इंजीनियरिंग टीम की जरूरत पड़ेगी, जिसमें 24 से 48 घंटे का समय लग सकता है।
निष्कर्ष: सुरक्षा ऑडिट की है जरूरत
यह घटना रेलवे के लिए एक सबक है। ब्रिज मेंटेनेंस जैसे संवेदनशील कामों के दौरान ‘सेफ्टी ऑडिट’ को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। गनीमत रही कि क्रेन के केबिन में मौजूद ऑपरेटर ने समय रहते छलांग लगा दी, वरना Ujjain Railway Accident एक बड़ी दुखद खबर में बदल सकता था। अब देखना यह है कि विभाग इस लापरवाही की जांच कर दोषियों पर क्या कार्रवाई करता है।
यह भी पढ़ें: महू-नसीराबाद हाईवे ट्रक हादसा: 20 फीट घसीटी बोरवेल मशीन, दो युवक बाल-बाल बचे
MP की हर खबर सबसे पहले पाने के लिए हमारे WhatsApp ग्रुप से जुड़ें : Click for joining














