Basant Panchami 2026: 5 बड़े कारणों से टूटी अबूझ मुहूर्त की परंपरा, जानें क्यों नहीं होंगे विवाह

Basant Panchami 2026

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उज्जैन: सनातन धर्म में बसंत पंचमी को ‘अबूझ मुहूर्त’ की संज्ञा दी गई है, यानी एक ऐसा दिन जब बिना पंचांग देखे कोई भी शुभ कार्य किया जा सकता है। लेकिन आने वाली Basant Panchami 2026 एक दुर्लभ ज्योतिषीय घटना की गवाह बनने जा रही है। इस साल परंपरा में एक बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा, क्योंकि इस विशेष तिथि पर विवाह और मांगलिक कार्यों के लिए कोई मुहूर्त उपलब्ध नहीं है।

23 जनवरी, शुक्रवार को आने वाली इस पंचमी तिथि पर ग्रहों की ऐसी स्थिति बन रही है, जिसने सदियों पुरानी इस मान्यता पर रोक लगा दी है। आइए जानते हैं वे कौन से ज्योतिषीय कारण हैं जिनकी वजह से इस बार शहनाइयां नहीं गूंजेंगी।

1. शुक्र तारे का अस्त होना (Shukra Tara Ast)

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, विवाह संस्कार के लिए शुक्र और गुरु (बृहस्पति) का उदित होना अनिवार्य है। Basant Panchami 2026 के दौरान शुक्र का तारा अस्त रहेगा। शुक्र को प्रेम, विलासिता और वैवाहिक सुख का कारक माना जाता है। जब शुक्र तारा ‘डूब’ जाता है, तो उस अवधि में विवाह करना वर्जित होता है। माना जाता है कि शुक्र के अस्त होने पर किए गए विवाह में वैवाहिक सुख और तालमेल की कमी रहती है।

2. परिघ योग का साया

इस वर्ष पंचांग के 27 योगों में से ‘परिघ योग’ का प्रभाव रहेगा। ज्योतिषियों के अनुसार, ‘परिघ’ का अर्थ होता है बाधा या रुकावट। यह एक ऐसा योग है जो शुभ कार्यों के फल को रोक देता है। Basant Panchami 2026 पर इस योग की उपस्थिति के कारण किसी भी नए निर्माण, यात्रा या मांगलिक कार्य को टालने की सलाह दी गई है। हालांकि, यह समय मंत्र साधना और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए अत्यंत फलदायी है।

3. पूर्व भाद्रपद नक्षत्र और ग्रहों की स्थिति

23 जनवरी (Basant Panchami 2026) को चंद्रमा कुंभ राशि के उपरांत मीन राशि में प्रवेश करेगा, जहां वह पूर्व भाद्रपद नक्षत्र की साक्षी में रहेगा। ग्रहों का यह गोचर विवाह के लिए अनुकूल परिस्थितियां नहीं बना रहा है। धर्मशास्त्रों के ज्ञाताओं का कहना है कि जब परिस्थितियां प्रतिकूल हों, तो ‘अबूझ मुहूर्त’ की अवधारणा भी गौण हो जाती है।

4. ज्येष्ठ अधिक मास का प्रभाव

साल 2026 में केवल बसंत पंचमी ही नहीं, बल्कि आगे के मुहूर्त भी प्रभावित होंगे। इस वर्ष ज्येष्ठ मास में ‘अधिक मास’ का योग बन रहा है, जो 17 मई से 15 जून तक रहेगा। इसके अतिरिक्त, शास्त्रों का नियम है कि परिवार की बड़ी संतान (जेष्ठ पुत्र या पुत्री) का विवाह शुद्ध ज्येष्ठ मास में भी नहीं करना चाहिए। इस वजह से Basant Panchami 2026 से शुरू होने वाले शादी के सीजन पर बड़ा असर पड़ा है।

5. तक्षक पंचमी और कालसर्प योग

इस बार बसंत पंचमी के दिन ही ‘तक्षक पंचमी’ का संयोग भी है। ज्योतिषियों का मानना है कि इस दिन वैवाहिक उत्सव के बजाय नाग देवता और मां सरस्वती की उपासना पर ध्यान देना चाहिए। विशेषकर जिन जातकों की कुंडली में कालसर्प दोष है, उनके लिए यह दिन शांति विधान के लिए उत्तम है, न कि नए संबंधों की शुरुआत के लिए।

धार्मिक केंद्रों पर रहेगा उल्लास

भले ही विवाह वर्जित हों, लेकिन उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर और सांदीपनि आश्रम में Basant Panchami 2026 का पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा। बाबा महाकाल का सरस्वती स्वरूप में विशेष श्रृंगार होगा और उन्हें बसंती फूलों के साथ गुलाल अर्पित किया जाएगा। सांदीपनि आश्रम में बच्चों का ‘विद्यारंभ संस्कार’ संपन्न होगा, जहां वे पहली बार पाटी-पूजन कर ज्ञान की देवी का आशीर्वाद प्राप्त करेंगे।

पूजन विधि और दान का महत्व

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, Basant Panchami 2026 पर माता सरस्वती को पीले पुष्प और श्वेत मिष्ठान अर्पित करना चाहिए। इस दिन पीले वस्त्र पहनकर मां शारदा की वंदना करने से बुद्धि और विवेक में वृद्धि होती है। विवाह न होने के कारण यह दिन पूरी तरह से कला, संगीत और शिक्षा के लिए समर्पित रहेगा।


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