मोबाइल को तकिए के पास रखकर सोना सेहत के लिए जानलेवा घंटी, आज ही छोड़ें ये आदत
Reported by: News Desk | Edited by: आकाश शर्मा
17 जनवरी 2026, (अपडेटेड 17 जनवरी 2026, 10:34 अपराह्न IST)

नीमच: स्मार्टफोन आज हमारी जिंदगी का सबसे अहम हिस्सा बन चुका है। दिनभर काम करने के बाद जब हम बिस्तर पर जाते हैं, तब भी यह हमारे साथ होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि मोबाइल को तकिए के पास रखकर सोना आपकी सेहत के लिए कितना घातक साबित हो सकता है?

अक्सर लोग अलार्म सेट करने या सोशल मीडिया चेक करने के बहाने फोन को सिरहाने रख लेते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, मोबाइल को तकिए के पास रखकर सोना धीमे जहर (Slow Poison) के समान है, जो धीरे-धीरे आपके शरीर और दिमाग को बीमार कर रहा है। इस विशेष रिपोर्ट में हम आपको इसके गंभीर दुष्प्रभावों के बारे में बता रहे हैं।

मोबाइल को तकिए के पास रखकर सोना क्यों खतरनाक है?

वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि स्मार्टफोन से इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन (Electromagnetic Radiation) निकलता है। जब आप मोबाइल को तकिए के पास रखकर सोना जारी रखते हैं, तो आप रात भर इस हानिकारक रेडिएशन के सीधे संपर्क में रहते हैं। यह न केवल आपकी नींद खराब करता है, बल्कि मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को भी गहरी चोट पहुँचाता है।

आइए विस्तार से जानते हैं कि यह आदत आपको कैसे बीमार बना रही है:

1. ब्रेन कैंसर और ट्यूमर का खतरा

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) ने मोबाइल रेडिएशन को ‘संभावित कार्सिनोजेनिक’ श्रेणी में रखा है। कई स्टडीज में दावा किया गया है कि लंबे समय तक मोबाइल को तकिए के पास रखकर सोना ब्रेन ट्यूमर या कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकता है। चूंकि रात में फोन हमारे दिमाग के सबसे करीब होता है, इसलिए इसका असर सीधे हमारे न्यूरॉन्स पर पड़ता है।

2. नींद का दुश्मन और अनिद्रा (Insomnia)

अच्छी सेहत के लिए गहरी नींद बहुत जरूरी है। लेकिन मोबाइल को तकिए के पास रखकर सोना आपकी नींद के चक्र (Sleep Cycle) को तोड़ देता है। मोबाइल स्क्रीन से निकलने वाली ‘ब्लू लाइट’ (Blue Light) शरीर में मेलाटोनिन हार्मोन को बनने से रोकती है, जो नींद के लिए जिम्मेदार होता है।

  • बार-बार नोटिफिकेशन बजना या स्क्रीन लाइट जलना आपके दिमाग को रेस्ट मोड में नहीं जाने देता।

  • नतीजतन, आप अगले दिन थकान और भारीपन महसूस करते हैं।

3. मानसिक तनाव और डिप्रेशन

क्या आपको कभी ऐसा लगा है कि फोन वाइब्रेट हुआ, जबकि कोई मैसेज नहीं आया? इसे ‘फैंटम वाइब्रेशन सिंड्रोम’ कहते हैं। जो लोग नियमित रूप से मोबाइल को तकिए के पास रखकर सोना पसंद करते हैं, उनका अवचेतन मन हमेशा अलर्ट रहता है। यह स्थिति धीरे-धीरे एंग्जायटी (Anxiety), तनाव और डिप्रेशन का कारण बन सकती है। दिमाग को शांति न मिलने से चिड़चिड़ापन बढ़ने लगता है।

4. मोबाइल फटने का खतरा 

रेडिएशन के अलावा, यह एक भौतिक खतरा भी है। कई बार लोग फोन को चार्जिंग पर लगाकर तकिए के नीचे दबा लेते हैं। मोबाइल को तकिए के पास रखकर सोना, खासकर चार्जिंग के दौरान, बैटरी को ओवरहीट कर सकता है। तकिए के कारण हीट बाहर नहीं निकल पाती, जिससे फोन में आग लगने या विस्फोट होने का खतरा रहता है। ऐसी कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं।

5. आंखों और त्वचा पर बुरा असर

रात के अंधेरे में मोबाइल की रोशनी सीधे रेटिना को नुकसान पहुँचाती है, जिससे देखने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा, नींद पूरी न होने का असर आपके चेहरे पर भी दिखता है। डार्क सर्कल्स और समय से पहले झुर्रियां आने का एक बड़ा कारण रात भर फोन पास रखना भी है।


बचाव के उपाय: आदत कैसे सुधारें?

अगर आप इन बीमारियों से बचना चाहते हैं, तो मोबाइल को तकिए के पास रखकर सोना आज ही बंद करें और इन टिप्स को अपनाएं:

  • दूरी बनाए रखें: सोते समय मोबाइल को बिस्तर से कम से कम 3-4 फीट दूर किसी टेबल पर रखें।

  • अलार्म क्लॉक का इस्तेमाल: सुबह उठने के लिए मोबाइल अलार्म की जगह पुरानी अलार्म घड़ी (Table Clock) का उपयोग करें।

  • इंटरनेट बंद करें: अगर फोन पास रखना मजबूरी है, तो डेटा ऑफ कर दें या फोन को ‘Airplane Mode’ पर डाल दें।

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Aakash Sharma
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आकाश शर्मा मध्यप्रदेश के नीमच क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार और द टाइम्स ऑफ MP के संपादक हैं। उन्हें प्रिंट मीडिया में 12 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव है। लंबे समय से स्थानीय एवं जनसरोकार से जुड़े मुद्दों की रिपोर्टिंग, समाचार संपादन और समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उन्होंने स्थानीय पत्रकारिता में व्यापक अनुभव हासिल किया है।द टाइम्स ऑफ MP के माध्यम से आकाश शर्मा नीमच, मंदसौर और आसपास के क्षेत्रों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को पाठकों तक पहुंचाने का कार्य करते हैं। उनकी कवरेज में स्थानीय प्रशासन, पुलिस एवं कानून-व्यवस्था, जनसमस्याएं, नागरिक सुविधाएं, राजनीति, सामाजिक गतिविधियां, शिक्षा, कृषि, व्यापार और अन्य जनहित से जुड़े विषय शामिल हैं।उनकी संपादकीय कार्यशैली में तथ्यपरक रिपोर्टिंग, स्रोत-आधारित जानकारी, निष्पक्ष प्रस्तुति और जिम्मेदार पत्रकारिता को प्राथमिकता दी जाती है। संवेदनशील और अपराध से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग में आरोप और प्रमाणित तथ्य के बीच अंतर बनाए रखने तथा उपलब्ध आधिकारिक एवं विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर खबर प्रस्तुत करने पर विशेष ध्यान दिया जाता है।पत्रकारिता के साथ आकाश शर्मा पिछले 4 वर्षों से पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में भी कार्य कर रहे हैं। इस भूमिका में वे कानूनी जागरूकता और जनहित से जुड़े कार्यों से जुड़े रहे हैं। इसके साथ ही वे इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशन में जिला उपाध्यक्ष (District Vice President) के दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं।अनुभव 12 वर्ष — प्रिंट मीडिया एवं पत्रकारिता का अनुभव 4 वर्ष — पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में अनुभव संपादक — द टाइम्स ऑफ MP जिला उपाध्यक्ष — इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशनआकाश शर्मा का उद्देश्य स्थानीय स्तर की महत्वपूर्ण सूचनाओं को विश्वसनीय, स्पष्ट, तथ्यपरक और जिम्मेदार पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाना तथा आम नागरिकों से जुड़े मुद्दों को प्रभावी मंच प्रदान करना है।विशेषज्ञता: स्थानीय पत्रकारिता | प्रिंट मीडिया | समाचार संपादन | डिजिटल पत्रकारिता | स्थानीय समाचार रिपोर्टिंग | जनहित के मुद्दे | कानूनी जागरूकता |

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