चरित्र शंका में पत्नी की कुल्हाड़ी से हत्या, आरोपी पति को आजीवन कारावास की सज़ा

नीमच। जिला नीमच के मनासा में द्वितीय जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश, श्रीमान् आशुतोष यादव ने एक सनसनीखेज मामले में चरित्र पर शंका के कारण अपनी पत्नी की कुल्हाड़ी मारकर हत्या करने वाले आरोपी पति को आजीवन कारावास और ₹2,000 के अर्थदण्ड से दण्डित किया है। यह कठोर फैसला समाज में बढ़ते वैवाहिक विवादों और घरेलू हिंसा पर एक मजबूत संदेश है।
घटना का विवरण:
अभियोजन मीडिया सेल प्रभारी, एडीपीओ रितेश कुमार सोमपुरा ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि यह वारदात लगभग चार वर्ष पूर्व, दिनांक 11 अप्रैल 2021 को रात करीब 8:30 बजे ग्राम नलखेड़ा स्थित आरोपी रामलाल पिता भंवरलाल भील (उम्र-59 वर्ष) के खेत पर बनी झोपड़ी में हुई थी।
आरोपी के पुत्र फरियादी अर्जुन और उसके भाई प्रहलाद ने मनासा थाने में आकर सूचना दी थी कि गर्मी के चलते वे खेत पर टापरी बनाकर रह रहे थे। फरियादी ने बताया कि उसका पिता रामलाल अपनी माता मुन्नीबाई के चरित्र को लेकर शंका करता था, जिसके कारण पहले भी उनके बीच झगड़े होते रहे थे।
वारदात और कानूनी कार्रवाई:
घटना के दिन भी इसी बात को लेकर पति-पत्नी के मध्य गंभीर विवाद हुआ। विवाद बढ़ने पर, आरोपी रामलाल ने आवेश में आकर जान से मारने की नीयत से कुल्हाड़ी से अपनी पत्नी मुन्नीबाई के सिर पर दो-तीन वार किए। इन वारों के कारण मुन्नीबाई का सिर फट गया और उनकी मौके पर ही मृत्यु हो गई।
फरियादी अर्जुन की सूचना पर थाना मनासा में आरोपी के विरुद्ध तत्काल एफ.आई.आर. दर्ज की गई। निरीक्षक कन्हैयालाल डांगी द्वारा अपराध की गंभीरता से विवेचना की गई। उन्होंने आरोपी को गिरफ्तार किया और वैज्ञानिक तथा सभी आवश्यक साक्ष्य जुटाकर विवेचना पूर्ण की। इसके बाद अभियोग-पत्र मनासा न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।
न्यायालय का फैसला:
विचारण के दौरान, शासन की ओर से पैरवी ए.जी.पी. गुलाबसिंह चंन्द्रावत ने की। उन्होंने न्यायालय में फरियादी, चश्मदीद साक्षी और विवेचक सहित सभी महत्वपूर्ण गवाहों के बयान कराए और अपराध को संदेह से परे प्रमाणित किया। ए.जी.पी. चंन्द्रावत ने घटना की क्रूरता और गंभीरता को देखते हुए आरोपी को कठोरतम दण्ड दिए जाने का निवेदन किया।
माननीय न्यायालय ने साक्ष्य और तर्कों के आधार पर आरोपी रामलाल भील को धारा 302 भारतीय दण्ड संहिता, 1860 के अंतर्गत दोषी करार दिया। न्यायालय ने आरोपी को आजीवन कारावास और ₹2,000 के अर्थदण्ड से दण्डित किया। यह निर्णय न्यायपालिका की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसमें समाज में क्रूर अपराधों के लिए कठोर दंड सुनिश्चित किया जाता है।

