नीमच । मध्यप्रदेश में किसानों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। गेहूं खरीदी 2026 के तहत 9 अप्रैल से पूरे प्रदेश में समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीदी शुरू होने जा रही है। राज्य सरकार ने इस वर्ष को ‘किसान कल्याण वर्ष’ के रूप में मनाने का संकल्प लिया है और इसी दिशा में यह बड़ा कदम उठाया गया है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि गेहूं खरीदी 2026 के दौरान किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो और सभी व्यवस्थाएं समय पर पूरी की जाएं।
किसानों की आय बढ़ाने पर फोकस
मुख्यमंत्री ने किसानों और स्वयंसेवी संगठनों के साथ संवाद करते हुए कहा कि गेहूं खरीदी 2026 का मुख्य उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार गेहूं का दाम 2700 रुपये प्रति क्विंटल तक ले जाने के लिए प्रयासरत है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार हर स्तर पर किसानों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और खरीदी प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाएगा।
खरीदी केंद्रों पर बेहतर सुविधाएं
गेहूं खरीदी 2026 के तहत सरकार ने उपार्जन केंद्रों पर कई जरूरी सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं:
- किसानों के लिए ठंडा पेयजल
- छायादार बैठने की व्यवस्था
- हर केंद्र पर हेल्प डेस्क
- योजनाओं की जानकारी के लिए होर्डिंग्स
- CMO कंट्रोल रूम से निगरानी
इन सुविधाओं का उद्देश्य यह है कि किसान आराम से और बिना किसी परेशानी के अपनी उपज बेच सकें।
नीमच में प्रशासन की सख्ती
गेहूं खरीदी 2026 को लेकर नीमच जिले में प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है। एसडीएम संजीव साहू और तहसीलदार संजय मालवीय ने विभिन्न खरीदी केंद्रों का निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान निम्न व्यवस्थाओं की जांच की गई:
- बारदाने की उपलब्धता
- तौल कांटे की सटीकता
- वेइंग मशीन की स्थिति
- भंडारण व्यवस्था
अधिकारियों ने साफ कहा कि यदि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी हुई तो संबंधित जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी।
सामाजिक संस्थाओं से सहयोग की अपील
मुख्यमंत्री ने गेहूं खरीदी 2026 को सफल बनाने के लिए सामाजिक संस्थाओं से सहयोग मांगा है। विशेष रूप से सेवा भारती जैसी संस्थाओं से किसानों की मदद के लिए आगे आने की अपील की गई है।
सरकार ने यह भी कहा है कि इस बार बारदाने की कोई कमी नहीं होगी और पूरी खरीदी प्रक्रिया सुचारु रूप से चलेगी।
क्यों खास है गेहूं खरीदी 2026
इस साल की गेहूं खरीदी 2026 कई मायनों में खास है:
- किसानों को बेहतर मूल्य मिलने की उम्मीद
- पारदर्शी और डिजिटल व्यवस्था
- प्रशासन की सख्ती
- बेहतर सुविधाएं
- सामाजिक भागीदारी
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