रतनगढ़ (प्रदीप तिवारी)। नीमच जिले के रतनगढ़ क्षेत्र में हाल ही में बढ़ाई गई गाइडलाइन रेट (Guideline Rate) को लेकर स्थानीय स्तर पर असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है। इस मुद्दे को लेकर समाजसेवियों, पार्षदों और ग्रामीणों का एक प्रतिनिधिमंडल सिंगोली तहसील पहुंचा, जहां उन्होंने पंजीयन अधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए गाइडलाइन रेट (Guideline Rate) में संशोधन की मांग की।
इस प्रतिनिधिमंडल में पिंकेश मंडोरा, केशव चारण, कन्हैयालाल चारण सहित कई प्रमुख लोग शामिल रहे। सभी ने एकजुट होकर कहा कि वर्तमान गाइडलाइन रेट (Guideline Rate) ने क्षेत्र के आम नागरिकों, किसानों और निवेशकों को सीधे तौर पर प्रभावित किया है।
बाजार मूल्य से अधिक गाइडलाइन रेट (Guideline Rate) बनी बड़ी समस्या

ज्ञापन में यह प्रमुख रूप से बताया गया कि रतनगढ़ क्षेत्र में लागू की गई नई गाइडलाइन रेट (Guideline Rate) वास्तविक बाजार मूल्य से अधिक है। सामान्यतः गाइडलाइन दरों का उद्देश्य पारदर्शिता लाना और संपत्ति लेन-देन को व्यवस्थित करना होता है, लेकिन यहां स्थिति इसके विपरीत दिखाई दे रही है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अधिक गाइडलाइन रेट (Guideline Rate) के कारण जमीन की खरीद-बिक्री महंगी हो गई है। रजिस्ट्री के दौरान अधिक शुल्क देना पड़ रहा है, जिससे आम लोग जमीन खरीदने से पीछे हट रहे हैं। परिणामस्वरूप प्रॉपर्टी मार्केट की गतिविधियां धीमी पड़ती जा रही हैं।
कृषि भूमि पर भी पड़ा गहरा असर
रतनगढ़ क्षेत्र में कृषि भूमि की गाइडलाइन रेट (Guideline Rate) में हुई वृद्धि को लेकर किसानों ने भी चिंता जताई है। ग्रामीण क्षेत्रों और नगर परिषद सीमा के अंतर्गत आने वाली जमीनों की दरों में भारी अंतर देखने को मिल रहा है, जिससे भ्रम और असंतोष की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
किसानों का कहना है कि बढ़ी हुई गाइडलाइन रेट (Guideline Rate) के कारण कृषि भूमि को व्यावसायिक उपयोग में बदलना अब पहले की तुलना में अधिक महंगा हो गया है। इससे न केवल किसानों की आय प्रभावित हो रही है, बल्कि क्षेत्र में संभावित विकास कार्य भी रुक सकते हैं।
प्रशासनिक लापरवाही के आरोप
स्थानीय पार्षद मनोहर सोनी ने इस मामले में प्रशासनिक लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि नगर परिषद और सीएमओ स्तर पर बिना पर्याप्त सर्वे और ठोस आधार के गाइडलाइन रेट (Guideline Rate) बढ़ाई गई है।
उन्होंने कहा कि यदि गाइडलाइन रेट (Guideline Rate) का निर्धारण वास्तविक बाजार मूल्य के आधार पर नहीं किया गया है, तो यह सीधे-सीधे आम जनता और निवेशकों के हितों के खिलाफ है। इस प्रकार के निर्णय क्षेत्रीय विकास को बाधित करते हैं और निवेश के माहौल को कमजोर बनाते हैं।
रजिस्ट्री शुल्क और बैंक लोन पर असर
बढ़ी हुई गाइडलाइन रेट (Guideline Rate) का असर केवल जमीन की कीमत तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव रजिस्ट्री शुल्क और बैंक लोन पर भी पड़ा है। वर्तमान में रजिस्ट्री शुल्क 6.3% से अधिक हो चुका है, जिससे संपत्ति खरीदना और महंगा हो गया है।
इसके अलावा बैंक भी लोन स्वीकृति के लिए गाइडलाइन रेट (Guideline Rate) को आधार मानते हैं। ऐसे में कई लोगों को अपेक्षित ऋण नहीं मिल पा रहा है, जिससे मकान निर्माण और व्यवसायिक निवेश की योजनाएं प्रभावित हो रही हैं।
सरकार से संशोधन की उम्मीद
राज्य सरकारें अक्सर ऐसी परिस्थितियों में गाइडलाइन दरों की समीक्षा करती हैं। हाल ही में नीमच जिले के कुछ क्षेत्रों में भी गाइडलाइन दरों में संशोधन किया गया था, जिससे लोगों को राहत मिली थी।
स्थानीय नागरिकों को उम्मीद है कि रतनगढ़ क्षेत्र में भी बढ़ी हुई गाइडलाइन रेट (Guideline Rate) की समीक्षा की जाएगी और इसे वास्तविक बाजार मूल्य के अनुरूप लाया जाएगा। इससे क्षेत्र में विकास कार्यों को फिर से गति मिल सकेगी।
ज्ञापन में रखी गई प्रमुख मांगें
प्रतिनिधिमंडल ने पंजीयन अधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन में निम्नलिखित मांगें रखीं:
- वर्तमान गाइडलाइन रेट ( Guideline Rate )का पुनर्मूल्यांकन किया जाए
- बाजार दरों के अनुरूप संशोधन किया जाए
- कृषि भूमि पर विशेष राहत दी जाए
- नगर परिषद स्तर पर की गई वृद्धि की जांच हो
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