जॉइंट होम लोन बना घर खरीदने का स्मार्ट तरीका! लोन क्षमता बढ़ाने के साथ दोहरे टैक्स लाभ

जानिए टैक्स एक्सपर्ट सी.ए. भावेश सिंहल से
नीमच : बढ़ती प्रॉपर्टी कीमतों के कारण घर खरीदने का सपना साकार करने के लिए जॉइंट होम लोन एक महत्वपूर्ण वित्तीय विकल्प बन गया है। यह न सिर्फ आपकी ऋण लेने की क्षमता को बढ़ाता है, बल्कि इसमें मिलने वाले दोहरे टैक्स बेनिफिट्स इसे एक आकर्षक फाइनेंशियल टूल बनाते हैं।
अगर आप अपने जीवनसाथी, माता-पिता या बच्चों जैसे करीबी पारिवारिक सदस्य पर भरोसा करते हैं और मिलकर प्रॉपर्टी खरीदना चाहते हैं, तो यह विकल्प आपके लिए है।
जॉइंट होम लोन क्या है और इसके बड़े फायदे
जॉइंट होम लोन वह ऋण है जिसे दो या दो से अधिक व्यक्ति मिलकर लेते हैं और सभी सह-आवेदक इसकी मासिक किस्त (EMI) चुकाने के लिए जिम्मेदार होते हैं। जॉइंट लोन लेने वाले सभी व्यक्ति घर के सह-मालिक भी होते हैं।
जॉइंट होम लोन के मुख्य फायदे:
- ज्यादा लोन अमाउंट: संयुक्त आय (Combined Income) के कारण बैंक बड़ा लोन अमाउंट अप्रूव करते हैं।
- दोहरा टैक्स बेनिफिट: आयकर की धारा 24(b) और 80C के तहत दोनों सह-आवेदक टैक्स कटौती का दावा कर सकते हैं।
- तेज अप्रूवल: संयुक्त और बेहतर क्रेडिट प्रोफाइल के कारण लोन अप्रूवल की प्रक्रिया तेज हो सकती है।
जानिए टैक्स एक्सपर्ट सी.ए. भावेश सिंहल से: टैक्स और जोखिम पर विशेष जानकारी

इस विषय की वित्तीय जटिलताओं को समझने के लिए, हमने टैक्स एक्सपर्ट सी.ए. भावेश सिंहल से बात की, जिन्होंने टैक्स बेनिफिट्स और जिम्मेदारी पर महत्वपूर्ण जानकारी दी:
| सवाल | सी.ए. भावेश सिंहल का विश्लेषण |
| टैक्स बेनिफिट्स कैसे काम करते हैं? | प्रत्येक सह-आवेदक धारा 24(b) के तहत ब्याज पर ₹2 लाख तक और धारा 80C के तहत मूलधन पर ₹1.5 लाख तक की कटौती का दावा कर सकता है, बशर्ते यह ‘स्व-अधिकृत संपत्ति’ हो। यानी, दो सह-आवेदक मिलकर सालाना ₹7 लाख तक की कटौती ले सकते हैं। |
| सह-मालिक होना क्यों जरूरी? | कानून के अनुसार, टैक्स बेनिफिट्स केवल मालिकों को मिलते हैं। यदि कोई व्यक्ति केवल को-बॉरोअर है, लेकिन प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री में उसका नाम नहीं है, तो वह टैक्स छूट का दावा नहीं कर सकता। |
| सिर्फ एक व्यक्ति EMI चुकाए तो? | टैक्स बेनिफिट का दावा केवल वह व्यक्ति कर सकता है जिसने वास्तव में पैसा चुकाया है। टैक्स जाँच में समस्या से बचने के लिए, हम सलाह देते हैं कि EMI का भुगतान दोनों आवेदक अपनी आय के अनुपात में अपने-अपने बैंक खातों से करें। |
| लोन डिफॉल्ट का असर? | डिफॉल्ट होने पर, बैंक किसी भी एक आवेदक से पूरी बकाया राशि वसूल सकता है। दोनों आवेदकों की क्रेडिट रिपोर्ट पर नकारात्मक असर पड़ता है और उनका क्रेडिट स्कोर गिर जाता है। |
| रिश्तों में अनबन पर जटिलता? | रिश्ते टूटने पर लोन और प्रॉपर्टी विवाद का कारण बन सकते हैं। इससे बचने के लिए, एक पक्ष दूसरे को बाय-आउट करके लोन को अपने नाम ट्रांसफर करा सकता है। |
| सबसे महत्वपूर्ण सलाह | सबसे पहले सह-मालिक (Co-Ownership) सुनिश्चित करें। दूसरा, टैक्स और EMI बंटवारा स्पष्ट करें और उसका रिकॉर्ड रखें। तीसरा, डिफॉल्ट के जोखिम को समझकर ही आगे बढ़ें। |
एलिजिबिलिटी और सावधानी
जॉइंट होम लोन के लिए दोनों आवेदकों की न्यूनतम आयु 21 वर्ष होनी चाहिए। यह लोन आमतौर पर पति-पत्नी, माता-पिता और अविवाहित संतान के साथ लिया जा सकता है।
लोन लेते समय इन बातों का ध्यान रखना जरूरी है:
- आपसी समझ और भरोसा सबसे जरूरी है।
- EMI का बंटवारा पहले से स्पष्ट कर लें।
- दोनों आवेदक लोन और प्रॉपर्टी दोनों में हिस्सेदार होने चाहिए।
- बैंक की सभी शर्तों को ध्यान से पढ़ना अनिवार्य है।

