जॉइंट होम लोन बना घर खरीदने का स्मार्ट तरीका! लोन क्षमता बढ़ाने के साथ दोहरे टैक्स लाभ
Reported by: News Desk | Edited by: आकाश शर्मा
08 नवम्बर 2025, (अपडेटेड 08 नवम्बर 2025, 11:13 पूर्वाह्न IST)

जानिए टैक्स एक्सपर्ट सी.ए. भावेश सिंहल से

नीमच : बढ़ती प्रॉपर्टी कीमतों के कारण घर खरीदने का सपना साकार करने के लिए जॉइंट होम लोन एक महत्वपूर्ण वित्तीय विकल्प बन गया है। यह न सिर्फ आपकी ऋण लेने की क्षमता को बढ़ाता है, बल्कि इसमें मिलने वाले दोहरे टैक्स बेनिफिट्स इसे एक आकर्षक फाइनेंशियल टूल बनाते हैं।

अगर आप अपने जीवनसाथी, माता-पिता या बच्चों जैसे करीबी पारिवारिक सदस्य पर भरोसा करते हैं और मिलकर प्रॉपर्टी खरीदना चाहते हैं, तो यह विकल्प आपके लिए है।

जॉइंट होम लोन क्या है और इसके बड़े फायदे

जॉइंट होम लोन वह ऋण है जिसे दो या दो से अधिक व्यक्ति मिलकर लेते हैं और सभी सह-आवेदक इसकी मासिक किस्त (EMI) चुकाने के लिए जिम्मेदार होते हैं। जॉइंट लोन लेने वाले सभी व्यक्ति घर के सह-मालिक भी होते हैं।

जॉइंट होम लोन के मुख्य फायदे:

  1. ज्यादा लोन अमाउंट: संयुक्त आय (Combined Income) के कारण बैंक बड़ा लोन अमाउंट अप्रूव करते हैं।
  2. दोहरा टैक्स बेनिफिट: आयकर की धारा 24(b) और 80C के तहत दोनों सह-आवेदक टैक्स कटौती का दावा कर सकते हैं।
  3. तेज अप्रूवल: संयुक्त और बेहतर क्रेडिट प्रोफाइल के कारण लोन अप्रूवल की प्रक्रिया तेज हो सकती है।

जानिए टैक्स एक्सपर्ट सी.ए. भावेश सिंहल से: टैक्स और जोखिम पर विशेष जानकारी

Bhavesh Sinhal
C.A. Bhavesh Sinhal

इस विषय की वित्तीय जटिलताओं को समझने के लिए, हमने टैक्स एक्सपर्ट सी.ए. भावेश सिंहल से बात की, जिन्होंने टैक्स बेनिफिट्स और जिम्मेदारी पर महत्वपूर्ण जानकारी दी:

सवालसी.ए. भावेश सिंहल का विश्लेषण
टैक्स बेनिफिट्स कैसे काम करते हैं?प्रत्येक सह-आवेदक धारा 24(b) के तहत ब्याज पर ₹2 लाख तक और धारा 80C के तहत मूलधन पर ₹1.5 लाख तक की कटौती का दावा कर सकता है, बशर्ते यह ‘स्व-अधिकृत संपत्ति’ हो। यानी, दो सह-आवेदक मिलकर सालाना ₹7 लाख तक की कटौती ले सकते हैं।
सह-मालिक होना क्यों जरूरी?कानून के अनुसार, टैक्स बेनिफिट्स केवल मालिकों को मिलते हैं। यदि कोई व्यक्ति केवल को-बॉरोअर है, लेकिन प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री में उसका नाम नहीं है, तो वह टैक्स छूट का दावा नहीं कर सकता।
सिर्फ एक व्यक्ति EMI चुकाए तो?टैक्स बेनिफिट का दावा केवल वह व्यक्ति कर सकता है जिसने वास्तव में पैसा चुकाया है। टैक्स जाँच में समस्या से बचने के लिए, हम सलाह देते हैं कि EMI का भुगतान दोनों आवेदक अपनी आय के अनुपात में अपने-अपने बैंक खातों से करें।
लोन डिफॉल्ट का असर?डिफॉल्ट होने पर, बैंक किसी भी एक आवेदक से पूरी बकाया राशि वसूल सकता है। दोनों आवेदकों की क्रेडिट रिपोर्ट पर नकारात्मक असर पड़ता है और उनका क्रेडिट स्कोर गिर जाता है।
रिश्तों में अनबन पर जटिलता?रिश्ते टूटने पर लोन और प्रॉपर्टी विवाद का कारण बन सकते हैं। इससे बचने के लिए, एक पक्ष दूसरे को बाय-आउट करके लोन को अपने नाम ट्रांसफर करा सकता है।
सबसे महत्वपूर्ण सलाहसबसे पहले सह-मालिक (Co-Ownership) सुनिश्चित करें। दूसरा, टैक्स और EMI बंटवारा स्पष्ट करें और उसका रिकॉर्ड रखें। तीसरा, डिफॉल्ट के जोखिम को समझकर ही आगे बढ़ें।

एलिजिबिलिटी और सावधानी

जॉइंट होम लोन के लिए दोनों आवेदकों की न्यूनतम आयु 21 वर्ष होनी चाहिए। यह लोन आमतौर पर पति-पत्नी, माता-पिता और अविवाहित संतान के साथ लिया जा सकता है।

लोन लेते समय इन बातों का ध्यान रखना जरूरी है:

  • आपसी समझ और भरोसा सबसे जरूरी है।
  • EMI का बंटवारा पहले से स्पष्ट कर लें।
  • दोनों आवेदक लोन और प्रॉपर्टी दोनों में हिस्सेदार होने चाहिए।
  • बैंक की सभी शर्तों को ध्यान से पढ़ना अनिवार्य है।

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Aakash Sharma
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आकाश शर्मा मध्यप्रदेश के नीमच क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार और द टाइम्स ऑफ MP के संपादक हैं। उन्हें प्रिंट मीडिया में 12 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव है। लंबे समय से स्थानीय एवं जनसरोकार से जुड़े मुद्दों की रिपोर्टिंग, समाचार संपादन और समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उन्होंने स्थानीय पत्रकारिता में व्यापक अनुभव हासिल किया है।द टाइम्स ऑफ MP के माध्यम से आकाश शर्मा नीमच, मंदसौर और आसपास के क्षेत्रों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को पाठकों तक पहुंचाने का कार्य करते हैं। उनकी कवरेज में स्थानीय प्रशासन, पुलिस एवं कानून-व्यवस्था, जनसमस्याएं, नागरिक सुविधाएं, राजनीति, सामाजिक गतिविधियां, शिक्षा, कृषि, व्यापार और अन्य जनहित से जुड़े विषय शामिल हैं।उनकी संपादकीय कार्यशैली में तथ्यपरक रिपोर्टिंग, स्रोत-आधारित जानकारी, निष्पक्ष प्रस्तुति और जिम्मेदार पत्रकारिता को प्राथमिकता दी जाती है। संवेदनशील और अपराध से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग में आरोप और प्रमाणित तथ्य के बीच अंतर बनाए रखने तथा उपलब्ध आधिकारिक एवं विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर खबर प्रस्तुत करने पर विशेष ध्यान दिया जाता है।पत्रकारिता के साथ आकाश शर्मा पिछले 4 वर्षों से पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में भी कार्य कर रहे हैं। इस भूमिका में वे कानूनी जागरूकता और जनहित से जुड़े कार्यों से जुड़े रहे हैं। इसके साथ ही वे इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशन में जिला उपाध्यक्ष (District Vice President) के दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं।अनुभव 12 वर्ष — प्रिंट मीडिया एवं पत्रकारिता का अनुभव 4 वर्ष — पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में अनुभव संपादक — द टाइम्स ऑफ MP जिला उपाध्यक्ष — इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशनआकाश शर्मा का उद्देश्य स्थानीय स्तर की महत्वपूर्ण सूचनाओं को विश्वसनीय, स्पष्ट, तथ्यपरक और जिम्मेदार पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाना तथा आम नागरिकों से जुड़े मुद्दों को प्रभावी मंच प्रदान करना है।विशेषज्ञता: स्थानीय पत्रकारिता | प्रिंट मीडिया | समाचार संपादन | डिजिटल पत्रकारिता | स्थानीय समाचार रिपोर्टिंग | जनहित के मुद्दे | कानूनी जागरूकता |

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