मनासा न्यूज (दिलीप बोराना )। क्षेत्र की कृषि उपज मंडी में लिया गया नया प्रशासनिक निर्णय अब किसानों और राजनीतिक संगठनों के विरोध का कारण बन गया है। मनासा मंडी (Manasa Mandi) में गेहूं की उपज की नीलामी ट्रैक्टर ट्रॉली में करने के निर्णय को लेकर किसानों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। कांग्रेस नेताओं ने इस फैसले को किसान विरोधी बताते हुए इसे तुरंत वापस लेने की मांग की है।
जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि आर. सागर कछावा ने कहा कि मनासा मंडी (Manasa Mandi) प्रशासन द्वारा लिया गया यह निर्णय छोटे और सीमांत किसानों के लिए भारी परेशानी खड़ी कर सकता है। यदि यह फैसला वापस नहीं लिया गया तो कांग्रेस किसानों के साथ मिलकर आंदोलन करेगी।
छोटे किसानों के लिए बड़ी समस्या
कछावा ने बताया कि मनासा मंडी (Manasa Mandi)i में अधिकांश छोटे किसान कम मात्रा में गेहूं की उपज लेकर आते हैं। उनके पास ट्रैक्टर ट्रॉली या बड़े वाहन नहीं होते। ऐसे में यदि नीलामी केवल ट्रैक्टर ट्रॉली में लाई गई उपज की ही होगी तो छोटे किसानों के लिए मंडी तक उपज लाना मुश्किल हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि मंडी प्रशासन को निर्णय लेने से पहले किसानों की वास्तविक स्थिति को समझना चाहिए था। कई किसान बैलगाड़ी, छोटे लोडिंग वाहन या किराए के साधनों से अपनी उपज मंडी तक लाते हैं। ऐसे में नया नियम उनके लिए आर्थिक और व्यावहारिक दोनों तरह की कठिनाइयां पैदा करेगा।
प्रशासन पर सुविधा के लिए फैसला लेने का आरोप
कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि मनासा मंडी (Manasa Mandi) प्रशासन ने यह फैसला किसानों के हित में नहीं बल्कि अपनी प्रशासनिक सुविधा के लिए लिया है। मंडी में काम करने वाले हम्मालों की कमी को कारण बताकर इस व्यवस्था को लागू किया जा रहा है, जबकि इसका असर सीधे किसानों पर पड़ेगा।
आर. सागर कछावा का कहना है कि मंडी में पहले से ही किसानों को कई व्यवस्थागत समस्याओं का सामना करना पड़ता है। यदि इस तरह के नए नियम लागू किए जाएंगे तो किसान मंडी में उपज लाने से भी घबराने लगेंगे।
छोटे किसानों को प्राथमिकता देने का सुझाव
कछावा ने सुझाव दिया कि यदि मनासा मंडी (Manasa Mandi) में ट्रैक्टर ट्रॉली से नीलामी की व्यवस्था लागू करनी ही है तो सबसे पहले कम मात्रा में उपज लाने वाले किसानों की नीलामी की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि छोटे किसानों की उपज की पहले नीलामी की जाए और उसके बाद बड़े वाहनों या ट्रैक्टर ट्रॉली में लाई गई उपज की प्रक्रिया शुरू की जाए। इससे किसानों को कुछ राहत मिल सकती है और मंडी में कामकाज भी प्रभावित नहीं होगा।
हम्मालों की भर्ती की मांग
कछावा ने कहा कि मनासा मंडी (Manasa Mandi) प्रशासन ने हम्मालों की कमी का हवाला देकर यह निर्णय लिया है, लेकिन यह समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। उन्होंने मांग की कि मंडी प्रशासन को नई भर्ती निकालनी चाहिए ताकि हम्मालों की कमी दूर हो सके।
इससे जहां बेरोजगार युवाओं को रोजगार मिलेगा, वहीं किसानों को भी अपनी उपज की ढुलाई और नीलामी में किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
एसडीएम से हस्तक्षेप की अपील
कांग्रेस नेताओं ने एसडीएम से भी इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। उनका कहना है कि मनासा मंडी (Manasa Mandi) में लागू किए जा रहे इस नियम पर प्रशासन को पुनर्विचार करना चाहिए और किसानों को राहत देने के लिए व्यावहारिक समाधान निकालना चाहिए।
कछावा ने कहा कि प्रशासन को किसानों की भावनाओं और उनकी परिस्थितियों को समझना चाहिए, क्योंकि कृषि क्षेत्र पहले से ही कई चुनौतियों का सामना कर रहा है।
आंदोलन की चेतावनी
कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट किया है कि यदि मनासा मंडी (Manasa Mandi) में लिया गया यह निर्णय वापस नहीं लिया गया तो किसानों के साथ मिलकर मंडी प्रशासन के खिलाफ आंदोलन किया जाएगा।
उनका कहना है कि किसानों के हितों के खिलाफ कोई भी निर्णय स्वीकार नहीं किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर धरना-प्रदर्शन भी किया जाएगा।
किसानों में बढ़ रही चिंता
इस फैसले के बाद मनासा मंडी (Manasa Mandi) क्षेत्र के कई किसानों में चिंता का माहौल है। किसानों का कहना है कि मंडी व्यवस्था का उद्देश्य किसानों को सुविधा देना होना चाहिए, न कि नई परेशानियां खड़ी करना।
किसानों को उम्मीद है कि प्रशासन उनकी समस्याओं को समझेगा और जल्द ही इस फैसले पर पुनर्विचार करेगा।
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