Mandi Scam: उज्जैन में किसानों से भयानक धोखाधड़ी, एफपीओ पर FIR के आदेश वीडियो देखें

Mandi Scam
उज्जैन (मध्य प्रदेश)। दिन-रात मिट्टी में पलकर खून-पसीना एक करने वाले अन्नदाता के साथ कृषि उपज मंडी में किस तरह से खुली लूट की जा रही है, इसका एक बेहद चौंकाने वाला मामला उज्जैन से सामने आया है। रबी की फसल कटने के बाद मंडियों में गेहूं की बंपर आवक हो रही है, लेकिन इसी बीच एक बड़े मंडी धोखाधड़ी (Mandi Scam) का पर्दाफाश हुआ है।
उज्जैन कृषि उपज मंडी में एक फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन (एफपीओ) द्वारा इलेक्ट्रॉनिक तौल कांटे में हेराफेरी करके किसानों की मेहनत की गाढ़ी कमाई पर सरेआम डाका डाला जा रहा था। जब एक जागरूक किसान ने अपनी सूझबूझ और सतर्कता से इस खेल को पकड़ा, तो पता चला कि महज चार बोरी गेहूं पर 84 किलो अनाज की चोरी की जा रही थी। इस बड़े खुलासे के बाद मंडी प्रशासन में हड़कंप मच गया है और अधिकारियों ने आनन-फानन में सख्त कदम उठाए हैं।
मंडी से 3 किलोमीटर दूर बिछाया गया था धोखाधड़ी का जाल
यह पूरा घटनाक्रम बुधवार शाम का है। ताजपुर गांव के रहने वाले किसान इदरीश खान अपनी गेहूं की फसल ट्रैक्टर-ट्रॉली में भरकर उज्जैन कृषि उपज मंडी बेचने पहुंचे थे। मंडी परिसर में उनकी फसल का सौदा ‘कट्टप्पा तूफान फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड’ नाम की एक संस्था के साथ तय हुआ। दरअसल, यहीं से इस मंडी धोखाधड़ी (Mandi Scam) की स्क्रिप्ट लिखनी शुरू हो गई थी।
नियमों को ताक पर रखते हुए इस एफपीओ कंपनी ने किसान इदरीश खान को माल तौलने और उतारने के लिए मंडी परिसर के निर्धारित शेड के बजाय लगभग 3 किलोमीटर दूर स्थित एक निजी गोदाम पर भेज दिया। दूर-दराज से आने वाले भोले-भाले किसान अक्सर ऐसी बातों में आ जाते हैं। इदरीश को इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि उस सुनसान गोदाम पर उनके साथ कितनी बड़ी ठगी की योजना तैयार की जा चुकी है।
10 किलो के बाट का भ्रम और तौल में बड़ा ‘खेल’
गोदाम पर पहुंचने के बाद वजन करने की प्रक्रिया शुरू हुई। एफपीओ के कर्मचारियों ने किसान का भरोसा जीतने के लिए सबसे पहले तौल कांटे पर 10 किलो का एक लोहे का बाट रखा। मशीन ने वजन बिल्कुल सही 10 किलो ही दिखाया। इससे किसान को लगा कि सब कुछ पारदर्शी और सही है। लेकिन, असली खेल तो बोरियों के तौल के वक्त शुरू होना था।
सामान्य तौर पर मंडी में गेहूं की एक भरी हुई बोरी का वजन करीब 96 से 100 किलो के बीच बैठता है। लेकिन जब इदरीश की चार बोरियां तौली गईं, तो कांटे की डिस्प्ले ने कुल वजन मात्र 300 किलो बताया। यानी प्रति बोरी लगभग 75 किलो का ही वजन आ रहा था। इतनी कम मात्रा देखकर किसान इदरीश खान का माथा ठनका। उन्होंने तुरंत तौल रुकवा दिया, क्योंकि उन्हें समझ आ गया था कि वे एक सुनियोजित मंडी धोखाधड़ी (Mandi Scam) का शिकार हो रहे हैं।
ऐसे हुआ 84 किलो की ‘डंडी’ मारने का भंडाफोड़
भारी शक होने पर इदरीश खान ने उस विवादित कांटे पर अपनी फसल बेचने से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद हंगामे की स्थिति बनी और मौके पर एक दूसरा तौल कांटा मंगवाया गया। जब उसी माल (चार बोरियों) को नए कांटे पर दोबारा तौला गया, तो कुल वजन 384 किलो निकला। पहले कांटे और दूसरे कांटे के वजन में सीधा 84 किलो का भारी अंतर था!
इसका सीधा सा मतलब था कि संस्था प्रति बोरी लगभग 20 से 21 किलो गेहूं की चोरी कर रही थी। किसान ने जब उस पहले वाले कांटे की खुद जांच की और उस पर अलग-अलग जगह खड़ा हुआ, तो मशीन का वजन हर बार 20 से 22 किलो तक कम-ज्यादा होने लगा। यह स्पष्ट था कि कांटे की प्रोग्रामिंग, सेंसर या सेटिंग में जानबूझकर तकनीकी छेड़छाड़ की गई थी।
इस पूरे मंडी धोखाधड़ी (Mandi Scam) का किसान और उनके साथियों ने मौके पर ही अपने मोबाइल से वीडियो बना लिया, जो अब पूरे इलाके में तेजी से वायरल हो रहा है।
मंडी सचिव का कड़ा एक्शन, FIR और लाइसेंस निरस्ती की प्रक्रिया शुरू
वीडियो और पक्के सबूतों के साथ जब मामले की शिकायत उज्जैन कृषि उपज मंडी के सचिव राजेश गोयल तक पहुंची, तो प्रशासनिक अमला हरकत में आया। मंडी सचिव ने इस घटना को बेहद गंभीरता से लिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एफपीओ संस्था ने बहुत बड़ी और गंभीर चूक की है, जो सीधे तौर पर आपराधिक कृत्य की श्रेणी में आती है।
इस मंडी धोखाधड़ी (Mandi Scam) को लेकर मंडी प्रशासन ने विवादित तौल कांटे को तुरंत प्रभाव से जब्त कर लिया है। संबंधित फर्म के खिलाफ स्थानीय पुलिस थाने में एफआईआर (FIR) दर्ज कराने के सख्त निर्देश जारी कर दिए गए हैं। इसके साथ ही, मंडी प्रशासन ने इस फर्म का लाइसेंस हमेशा के लिए निरस्त करने की सिफारिश करते हुए वरिष्ठ डायरेक्ट्रेट (निदेशालय) को एक आधिकारिक पत्र भी प्रेषित कर दिया है।
10 दिनों से चल रहा था खेल, कई किसानों के लुटने की आशंका
इस पूरे मामले को उजागर करने में अहम भूमिका निभाने वाले स्थानीय जागरूक नागरिक अशोक जाट ने एक और चौंकाने वाला दावा किया है। उनका कहना है कि यह फर्म पिछले 10 दिनों से लगातार किसानों का माल इसी 3 किलोमीटर दूर वाले गोदाम पर खरीद रही थी। ऐसे में यह आशंका प्रबल हो गई है कि इस मंडी धोखाधड़ी (Mandi Scam) के तहत न जाने कितने और भोले-भाले किसानों के खून-पसीने की कमाई पर डाका डाला गया होगा।
अगर एक किसान से महज चार बोरी में 84 किलो गेहूं चुराया जा रहा था, तो बीते 10 दिनों में सैकड़ों क्विंटल की खरीद में इस घोटाले का आंकड़ा लाखों रुपये तक पहुंच सकता है। किसानों और किसान संगठनों ने अब मंडी प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि इस फर्म के पुराने सभी रिकॉर्ड खंगाले जाएं।
उन तमाम किसानों से संपर्क किया जाए जिन्होंने पिछले दिनों यहां अपनी उपज बेची है, और इसमें शामिल सभी व्यापारियों तथा तौल कर्मचारियों पर धोखाधड़ी का सख्त आपराधिक मुकदमा चलाया जाए। यह घटना प्रदेश के अन्य किसानों के लिए भी एक बड़ा अलर्ट है कि वे अपनी उपज बेचते समय तौल के दौरान पूरी तरह से सतर्क रहें और किसी भी तरह के संदेह पर तुरंत आवाज उठाएं।
यह भी पढ़ें: Mandsaur News: मंदसौर में बेखौफ बदमाशों का तांडव, बैंक से पैसे लाए बार संचालक की कार से 10 लाख पार

