5 दिन बाद खत्म हुआ मंदसौर मंडी विवाद: 1 नए फैसले से दोबारा शुरू हुई खरीदी, किसानों ने ली राहत की सांस

मंदसौर मंडी विवाद

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मंदसौर। मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी लहसुन मंडी में शुमार मंदसौर कृषि उपज मंडी में पिछले पांच दिनों से जारी गतिरोध आखिरकार खत्म हो गया है। प्रशासन, व्यापारियों और हम्मालों के बीच हुई लंबी खींचतान के बाद मंगलवार से मंडी में रौनक लौट आई है। इस मंदसौर मंडी विवाद के कारण न केवल मंडी प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे, बल्कि हजारों किसानों को भी भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा। सोमवार को हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में लिए गए कड़े फैसलों के बाद अब सुचारू रूप से खरीदी प्रक्रिया शुरू करने पर सहमति बनी है।

मैराथन बैठक और बड़े फैसले

मंडी सभागार में सोमवार को करीब 3 घंटे तक चली मैराथन बैठक में मंदसौर मंडी विवाद को सुलझाने के लिए गंभीर मंथन किया गया। बैठक में सांसद सुधीर गुप्ता, राज्यसभा सांसद बंशीलाल गुर्जर, विधायक विपिन जैन, जिला पंचायत सीईओ अनुकूल जैन और एसडीएम शिवलाल शाक्य जैसे जिम्मेदार चेहरे मौजूद थे।

बैठक का मुख्य मुद्दा हम्मालों और व्यापारियों के बीच काम के तरीकों को लेकर था। चर्चा के बाद यह तय किया गया कि लहसुन और प्याज की नीलामी अब ट्रैक्टर-ट्राली के माध्यम से सीधे की जाएगी। इससे हम्माली के दौरान होने वाले समय के नुकसान और विवादों को कम किया जा सकेगा। व्यापारियों और हम्मालों के बीच व्यवस्था की रूपरेखा तय करने के लिए दो दिन का समय दिया गया है, जो 15 फरवरी 2026 तक ट्रायल के तौर पर लागू रहेगी।

5 दिनों तक क्यों ठप रही मंडी?

इस मंदसौर मंडी विवाद की शुरुआत 13 जनवरी को हुई थी, जब हम्माल और व्यापारी के बीच मामूली बात पर कहासुनी हुई। इसके बाद 14 जनवरी को मकर संक्रांति का अवकाश रहा और 15 जनवरी से व्यापारियों ने पूरी तरह खरीदी बंद कर दी। व्यापारियों का तर्क था कि व्यवस्था में सुधार की जरूरत है, जबकि हम्माल अपने हितों की रक्षा की बात कर रहे थे। इस जिद के बीच सबसे ज्यादा पिसा वह किसान, जो अपनी उपज लेकर सैकड़ों किलोमीटर दूर से आया था।

मंडी बंद रहने के कारण राजस्थान के झालावाड़ और मध्य प्रदेश के सागर जैसे दूरदराज के जिलों से आए किसानों को भारी परेशानियां झेलनी पड़ीं। कई किसान कड़ाके की ठंड में मंडी के बाहर ही डेरा डाले रहे, तो कई किसानों ने गुस्से में आकर महू-नीमच हाईवे पर चक्का जाम भी किया।

नियमों में बदलाव: अब नीलामी की नई प्रक्रिया

बैठक में स्पष्ट किया गया कि लहसुन और प्याज के अलावा अन्य सभी कृषि उपजों की नीलामी पुरानी पद्धति से ही होगी। लेकिन, लहसुन की हम्माली अब पूरी तरह व्यापारी संघ की देखरेख में होगी। यदि यह नई व्यवस्था (ट्रैक्टर-ट्राली नीलामी) 15 फरवरी तक सफल रहती है, तो इसे स्थाई कर दिया जाएगा। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि यदि दोबारा किसी भी पक्ष की ओर से नियमों का उल्लंघन हुआ, तो कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मंदसौर मंडी विवाद ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मंडी की आंतरिक राजनीति का खामियाजा अंततः गरीब किसान को भुगतना पड़ता है।

राजनीतिक दबाव और विधायक की चेतावनी

इस पूरे मामले में राजनीतिक पारा भी काफी गर्म रहा। विधायक विपिन जैन और कांग्रेस जिलाध्यक्ष महेंद्र सिंह गुर्जर ने सीधे मंडी सचिव को कटघरे में खड़ा किया। विधायक जैन ने स्पष्ट लहजे में कहा कि “मंडी प्रशासन की ढिलाई के कारण ही मंदसौर मंडी विवाद इतना लंबा खिंचा है।” उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अब व्यवस्था बिगड़ी तो वे चुप नहीं बैठेंगे। वहीं, सांसद सुधीर गुप्ता ने कहा कि मंडी का सुचारू संचालन जिले की आर्थिक रीढ़ है और इसमें किसी भी प्रकार की बाधा बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

किसानों की आर्थिक मार का जिम्मेदार कौन?

हालांकि मंडी अब खुल गई है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि उन 5 दिनों में किसानों को हुए मंदसौर मंडी विवाद नुकसान की भरपाई कौन करेगा? दूर-दराज से आए किसानों ने हजारों रुपये ट्रक और ट्रैक्टरों के किराये पर खर्च किए। ऊपर से मंदसौर मंडी विवाद के कारण उन्हें अपनी उपज वापस ले जानी पड़ी या होटल-ढाबों पर रुककर खर्च बढ़ाना पड़ा। यह मंदसौर मंडी विवाद एक सबक है कि सिस्टम की लापरवाही कैसे आम जनता पर भारी पड़ती है।

मंगलवार सुबह से ही मंडी में ट्रैक्टरों की कतारें लगनी शुरू हो गई हैं। व्यापारियों ने लहसुन और प्याज की खरीदी में रुचि दिखाई है, जिससे मंडी में फिर से आर्थिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।


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