Business Success Story: 48 की उम्र में नौकरी छोड़ी तो दुनिया ने कहा ‘पागल’, 1 लाख से खड़ी की 15 करोड़ की कंपनी
Reported by: News Desk | Edited by: आकाश शर्मा
20 जनवरी 2026, (अपडेटेड 20 जनवरी 2026, 11:00 पूर्वाह्न IST)

नई दिल्ली/चेन्नई: क्या सपने देखने की कोई उम्र होती है? क्या रिस्क सिर्फ जवानी में लिया जा सकता है? अगर आप भी ऐसा सोचते हैं कि 40 के पार जीवन में स्थिरता ही सब कुछ है, तो आपको चेन्नई के लोकेश्वरन कन्‍नन की यह Business Success Story जरूर पढ़नी चाहिए।

अक्सर मैनेजमेंट गुरु कहते हैं कि स्टार्टअप शुरू करने का सही समय 20 से 30 साल की उम्र के बीच होता है। लेकिन, लोकेश्वरन ने इस मिथक को चकनाचूर कर दिया। 28 साल तक कॉर्पोरेट की चकाचौंध और एमएनसी (MNC) के ऊंचे पद पर रहने के बाद, 48 साल की उम्र में जब लोग रिटायरमेंट की प्लानिंग करते हैं, उन्होंने इस्तीफा दे दिया। जेब में थे सिर्फ 1 लाख रुपये और आंखों में एक बड़ा सपना। आज वही सपना ‘eOrbitor’ के रूप में 15 करोड़ रुपये के टर्नओवर वाली कंपनी बन चुका है।

पागलपन या जुनून? 48 साल में लिया सबसे बड़ा रिस्क

लोकेश्वरन कन्‍नन का सफर आसान नहीं था। जब उन्होंने अपनी अच्छी-खासी सैलरी वाली नौकरी छोड़ने का फैसला किया, तो समाज और परिचितों की प्रतिक्रिया उत्साहजनक नहीं थी। कई लोगों ने उन्हें ‘पागल’ तक कह दिया। एक Business Success Story रातों-रात नहीं बनती। दिसंबर 2019 में, सिर्फ 1 लाख रुपये की छोटी सी पूंजी, एक मेज, एक कुर्सी और एक पंखे के साथ उन्होंने ‘ईऑर्बिटर’ (eOrbitor) की नींव रखी।

उस समय उनके पास न बड़ी टीम थी, न बड़ा ऑफिस। लेकिन उनके पास एक विजन था—आईटी सेक्टर में कुछ अपना खड़ा करने का। लेकिन नियति को शायद उनकी परीक्षा लेनी थी। कंपनी शुरू हुए अभी 40 दिन ही हुए थे कि पूरी दुनिया में कोरोना महामारी के कारण लॉकडाउन लग गया।

आपदा को अवसर में बदलना: असली गेमचेंजर

एक तरफ जहां बड़ी-बड़ी स्थापित कंपनियां शटर गिरा रही थीं, वहीं लोकेश्वरन ने हार नहीं मानी। लॉकडाउन के दौरान जब वर्क फ्रॉम होम और डिजिटल डेटा की खपत बढ़ी, तो उन्होंने इसे एक अवसर की तरह देखा। यही उनकी Business Success Story का टर्निंग पॉइंट बना।

उन्होंने डेटा सेंटर मेंटेनेंस (Data Center Maintenance) और साइबर सुरक्षा पर फोकस किया। उस वक्त उनका पहला ऑर्डर महज 14,000 रुपये का था, जो फायरवॉल सपोर्ट के लिए मिला था। रक़म छोटी थी, लेकिन हौसला बड़ा था। उनकी मेहनत और तकनीकी महारत ने जल्द ही ग्राहकों का भरोसा जीत लिया।

आज दिग्गजों की पहली पसंद है eOrbitor

आज लोकेश्वरन कन्‍नन की कंपनी आईटी जगत में किसी ‘स्पेशलिस्ट डॉक्टर’ से कम नहीं है। कल्पना कीजिए, किसी बड़े मैन्युफैक्चरिंग प्लांट का सर्वर डाउन हो जाए, तो करोड़ों का नुकसान हो सकता है। ऐसे समय में eOrbitor की टीम मिनटों में सिस्टम को बहाल करती है।

सिर्फ 5 साल के भीतर, इस Business Success Story में कई बड़े अध्याय जुड़े हैं। आज उनकी कंपनी के क्लाइंट लिस्ट में शामिल हैं:

  • गुजरात मेट्रो रेल

  • हैदराबाद पुलिस कमांड सेंटर (18,000 कैमरों का नेटवर्क)

  • अशोक लेलैंड

  • जोहो (Zoho)

कंपनी आज सिर्फ एक वेंडर नहीं, बल्कि एक सिस्टम इंटीग्रेटर है जो क्लाउड सेवाओं और साइबर सुरक्षा में महारत रखती है।

सफलता का मंत्र: अनुशासन और नीयत

1 लाख से 15 करोड़ तक के सफर में लोकेश्वरन का सबसे बड़ा हथियार रहा उनका ‘वित्तीय अनुशासन’ (Financial Discipline)। बिज़नेस जगत में साख ही सब कुछ होती है। लोकेश्वरन का नियम है—वेंडर्स का पेमेंट समय पर हो और कर्मचारियों की सैलरी महीने की 1 तारीख को खाते में पहुंच जाए।

यही कारण है कि बैंकों ने उनकी कंपनी की बैलेंस शीट और साख देखकर बिना किसी प्रॉपर्टी को गिरवी रखे (Collateral-free), 5 करोड़ रुपये की ओवरड्राफ्ट सुविधा दी है। एक एमएसएमई (MSME) के लिए यह किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं है। उनका लक्ष्य अगले साल तक टर्नओवर को 30 करोड़ रुपये तक ले जाने का है।

लोकल से ग्लोबल: 11 शहरों से यूएई तक

भारत के 11 प्रमुख शहरों में अपनी पैठ जमाने के बाद, यह Business Success Story अब सरहदों को पार कर चुकी है। फरवरी 2025 में कंपनी ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के शारजाह, दुबई और अबू धाबी में अपना परिचालन शुरू कर दिया है।

लेकिन इस विस्तार के बीच लोकेश्वरन अपने मानवीय मूल्यों को नहीं भूले। वे अपने कर्मचारियों को परिवार मानते हैं। उनकी कंपनी में ‘5-डे वर्किंग वीक’ का कल्चर है और सभी के लिए कैशलेस हेल्थ इंश्योरेंस की सुविधा है। वे कहते हैं, “मेरी असली सफलता मुनाफा नहीं, बल्कि उन 50 से ज्यादा परिवारों की खुशहाली है जो मेरे साथ जुड़े हैं।”

लोकेश्वरन कन्‍नन की कहानी साबित करती है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो उम्र महज एक नंबर है। आपकी Business Success Story कभी भी शुरू हो सकती है, बस पहला कदम उठाने की देर है।


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Aakash Sharma
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