Neemuch Collector Jansunwai में उमड़ा शिकायतों का सैलाब: कहीं खुशी के आंसू, तो कहीं न्याय के लिए जमीन पर लोटते दिखे बेबस फरियादी

Neemuch Collector Jansunwai

Neemuch Collector Jansunwai

नीमच | 20 जनवरी 2026 : नीमच जिला कलेक्ट्रेट में मंगलवार का दिन प्रशासनिक सक्रियता से ज्यादा जनता की बेबसी और व्यवस्था के प्रति उपजे आक्रोश का गवाह बना। Neemuch Collector Jansunwai में आज उस समय सनसनी फैल गई जब न्याय की आस खो चुके फरियादी अधिकारियों के पैरों में गिरने के बजाय कलेक्ट्रेट के गलियारों में जमीन पर लोट लगाने लगे। भ्रष्टाचार, अवैध कब्जे और जातिगत उत्पीड़न के मामलों ने शासन के सुशासन के दावों की पोल खोलकर रख दी।

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कलेक्टर हिमांशु चंद्रा ने आज 80 से अधिक आवेदकों की समस्याएं सुनीं, लेकिन इस Neemuch Collector Jansunwai की सबसे बड़ी तस्वीर मानवीय संवेदनाओं और सिस्टम की विफलता की रही।

केस 1: न्याय के लिए जमीन पर लोटती महिलाएं, प्रशासन स्तब्ध

जनसुनवाई में सबसे हृदय विदारक दृश्य ग्राम सगराना का रहा। यहाँ की निवासी गुड्डी बाई पिता उम्मेद सिंह अपनी आजीविका छिन जाने के गम में अधिकारियों के सामने जमीन पर दंडवत होकर लोटने लगीं। उनका आरोप है कि मौजा सगराना की सर्वे नंबर 789 वाली उनकी पुश्तैनी 0.80 हेक्टेयर भूमि पर दबंग बापू सिंह ने अवैध रूप से पक्का मकान तान दिया है। पीड़ित महिला ने रुंधे गले से बताया कि जब वे कब्जा हटाने की बात करती हैं, तो उन्हें जान से मारने की धमकी दी जाती है। Neemuch Collector Jansunwai में इस घटना ने अधिकारियों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया कि आखिर निचले स्तर पर राजस्व विभाग क्या कर रहा है?

केस 2: दलित मजदूर का उत्पीड़न और सामाजिक बहिष्कार

एक अन्य मामले में सिंगोली तहसील के धारडी गांव से आए अनुसूचित जाति के मजदूर कमलेश रेगर ने Neemuch Collector Jansunwai में अपनी आपबीती सुनाई। कमलेश रोते-बिलखते हुए परिसर में पहुँचे और बताया कि गांव के रसूखदार रणवीर सिंह ठाकुर द्वारा उनका जातिगत उत्पीड़न किया जा रहा है। पीड़ित का आरोप है कि उन्हें न केवल जातिसूचक गालियां दी जा रही हैं, बल्कि गांव में उनके खिलाफ दुष्प्रचार कर उन्हें मिलने वाली मजदूरी तक रुकवा दी गई है। आर्थिक तंगी और सामाजिक अपमान झेल रहा यह परिवार अब न्याय न मिलने पर आत्मघाती कदम उठाने की बात कर रहा है।

केस 3: राजस्व अमले और पटवारी की मिलीभगत का पर्दाफाश

Neemuch Collector Jansunwai में ग्राम साल्याखेड़ी (रामपुरा) के ग्रामीण एक गंभीर शिकायत लेकर पहुँचे। उन्होंने सीधे तौर पर पटवारी और राजस्व निरीक्षक (RI) पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। ग्रामीणों का कहना है कि वे पिछले 50 वर्षों से अपनी भूमि पर काबिज हैं, लेकिन विपक्षी कैलाश और लालू ने राजस्व विभाग के कर्मचारियों से सांठगांठ कर फर्जी पट्टे के आधार पर सीमांकन कराकर उनकी जमीन हड़पने की साजिश रची है। यह मामला सरकारी तंत्र के भीतर पनप रहे भ्रष्टाचार को उजागर करता है।

केस 4: राहत की किरण—नूर बानों को मिली ट्राईसिकल

जहाँ एक ओर आक्रोश था, वहीं इसी Neemuch Collector Jansunwai में कुछ सकारात्मक खबरें भी आईं। बघाना निवासी दिव्यांग नूर बानो को कलेक्टर ने तत्काल संज्ञान लेते हुए रेडक्रॉस से नई नि:शुल्क ट्राईसिकल प्रदान की। इसके अतिरिक्त, ग्राम चौथखेड़ा के धर्मसिंह गुर्जर को उनकी 0.06 हेक्टेयर जमीन पर वापस कब्जा दिलाने के लिए तहसीलदार को मौके पर टीम भेजने के सख्त निर्देश दिए गए।

व्यवस्था पर उठते गंभीर सवाल

आज की Neemuch Collector Jansunwai में जिस तरह से लोग जमीन पर लोटकर न्याय मांग रहे थे, वह दर्शाता है कि तहसील और ग्राम स्तर पर सरकारी कर्मचारी जनता की समस्याओं का समाधान नहीं कर रहे हैं। यदि पटवारी और तहसीलदार जमीनी स्तर पर सही कार्रवाई करें, तो पीड़ितों को कलेक्ट्रेट की दहलीज पर इस तरह बिलखना न पड़े। कलेक्टर हिमांशु चंद्रा ने हालांकि सभी मामलों में त्वरित जांच के आदेश दिए हैं, लेकिन देखना यह होगा कि क्या इन कागजी निर्देशों से पीड़ितों को वास्तविक न्याय मिल पाएगा या फिर अगली जनसुनवाई में भी यही दृश्य दोहराए जाएंगे।


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