नीमच बना क्रिकेट सट्टेबाजी का नया ‘सुरक्षित’ हब.. ? मुखबिर तंत्र फेल या सटोरियों को मिला है अभयदान?
Reported by: News Desk | Edited by: आकाश शर्मा
13 अप्रैल 2026, (अपडेटेड 13 अप्रैल 2026, 4:26 अपराह्न IST)

नीमच: देशभर में इन दिनों आईपीएल क्रिकेट का खुमार सिर चढ़कर बोल रहा है। लेकिन खेल के इसी रोमांच की आड़ में नीमच में IPL सट्टा एक ऐसे काले नेटवर्क का रूप ले चुका है, जो शहर के सामाजिक ताने-बाने को दीमक की तरह चाट रहा है। विदेशी सट्टा साइट्स और ऐप्स के जरिए बुकियों ने शहर के गली-मोहल्लों तक अपनी मजबूत पैठ बना ली है। आम लोगों और युवाओं की गाढ़ी कमाई को बिना किसी खौफ के जुए की आग में झोंका जा रहा है, लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि स्थानीय पुलिस के हाथ अब तक पूरी तरह खाली हैं।

‘काले सोने’ का इतिहास और सट्टे का नया दौर

नीमच का इतिहास दशकों पुराना है। ब्रिटिश छावनी (NIMACH) के रूप में बसा यह शहर ऐतिहासिक रूप से ‘काले सोने’ (अफीम) की खेती और उसकी तस्करी के लिए देशभर में कुख्यात रहा है। अफीम के काले कारोबार ने अतीत में यहां जिस अवैध और अथाह पैसे की नींव रखी थी, आज उसी तर्ज पर सट्टेबाजी का नया सिंडिकेट खड़ा हो गया है। दशकों पहले जो नेटवर्क तस्करों का हुआ करता था, आज वही जगह डिजिटल दुनिया में बैठे सटोरियों ने ले ली है। अफीम के बाद अब यह ऐतिहासिक शहर क्रिकेट सट्टेबाजी का सबसे बड़ा और ‘सुरक्षित’ अड्डा बन चुका है।

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अन्य शहरों में दबिश, नीमच पुलिस के हाथ खाली

देश के अन्य छोटे-बड़े शहरों में रोजाना करोड़ों रुपये का क्रिकेट सट्टा पकड़ा जा रहा है। दूसरे राज्यों और शहरों की पुलिस लगातार नीमच के सटोरियों को गिरफ्तार कर रही है, जो साबित करता है कि यहां का नेटवर्क बाहर तक फैला हुआ है। लेकिन नीमच पुलिस की नाक के नीचे चल रहे इस करोड़ों के खेल पर कोई ठोस दबिश या घेराबंदी देखने को नहीं मिली है। साफ है कि खाकी की इस खामोशी ने सटोरियों के हौसले बुलंद कर दिए हैं।

सट्टेबाजों का खौफ और सफेदपोशों का सिंडिकेट

शहर में सट्टेबाजों का जाल इतना गहरा हो चुका है कि लत और कर्ज में डूबकर यहां के युवाओं की स्थिति अब ‘उड़ता पंजाब’ जैसी भयानक होती जा रही है।

इस काले कारोबार में बुकीज के हौसले इस कदर परवान चढ़े हुए हैं कि उनका एक स्वयंभू नरेश बिना किसी खौफ के धड़ल्ले से अपना गिरोह चला रहा है। जब दांव हारने वालों से पैसों की वसूली की बारी आती है, तो ये बुकी चंडी का रूप धरकर ऐसा तांडव मचाते हैं कि लोगों को अपने घर-बार और कपड़े तक बेचने पड़ जाते हैं। इतना ही नहीं, शहर में कुछ सफेदपोश चेहरे ऐसे भी हैं जो दिन के उजाले में खुद को समाज का अमरीश (प्रतिष्ठित/रईस) बताते हैं, लेकिन गुप्त रूप से पर्दे के पीछे से सट्टे की खाइवाली का पूरा सिंडिकेट चला रहे हैं।

आखिर क्यों खामोश है प्रशासन?

जब इन बुकीज के नाम, इनके अड्डे और काम करने के तरीके शहर में आम चर्चा का विषय बन चुके हैं, तो प्रशासन इनसे अनजान कैसे हो सकता है? अब सवाल यह है कि क्या पुलिस का खुफिया और मुखबिर तंत्र पूरी तरह से ध्वस्त हो चुका है? या फिर इन सटोरियों को मौन सहमति से कोई बड़ा संरक्षण मिला हुआ है?

पुलिस की यह खामोशी न केवल उसकी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है, बल्कि उन परिवारों के साथ भी बड़ा अन्याय है जो इस सट्टे के जाल में अपना सबकुछ बर्बाद कर रहे हैं। अगर प्रशासन ने जल्द ही इन बुकियों पर शिकंजा नहीं कसा, तो अफीम के इस ऐतिहासिक शहर का भविष्य सटोरियों की काली छाया में पूरी तरह से बर्बाद हो जाएगा।


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Aakash Sharma
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आकाश शर्मा मध्यप्रदेश के नीमच क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार और द टाइम्स ऑफ MP के संपादक हैं। उन्हें प्रिंट मीडिया में 12 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव है। लंबे समय से स्थानीय एवं जनसरोकार से जुड़े मुद्दों की रिपोर्टिंग, समाचार संपादन और समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उन्होंने स्थानीय पत्रकारिता में व्यापक अनुभव हासिल किया है।द टाइम्स ऑफ MP के माध्यम से आकाश शर्मा नीमच, मंदसौर और आसपास के क्षेत्रों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को पाठकों तक पहुंचाने का कार्य करते हैं। उनकी कवरेज में स्थानीय प्रशासन, पुलिस एवं कानून-व्यवस्था, जनसमस्याएं, नागरिक सुविधाएं, राजनीति, सामाजिक गतिविधियां, शिक्षा, कृषि, व्यापार और अन्य जनहित से जुड़े विषय शामिल हैं।उनकी संपादकीय कार्यशैली में तथ्यपरक रिपोर्टिंग, स्रोत-आधारित जानकारी, निष्पक्ष प्रस्तुति और जिम्मेदार पत्रकारिता को प्राथमिकता दी जाती है। संवेदनशील और अपराध से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग में आरोप और प्रमाणित तथ्य के बीच अंतर बनाए रखने तथा उपलब्ध आधिकारिक एवं विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर खबर प्रस्तुत करने पर विशेष ध्यान दिया जाता है।पत्रकारिता के साथ आकाश शर्मा पिछले 4 वर्षों से पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में भी कार्य कर रहे हैं। इस भूमिका में वे कानूनी जागरूकता और जनहित से जुड़े कार्यों से जुड़े रहे हैं। इसके साथ ही वे इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशन में जिला उपाध्यक्ष (District Vice President) के दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं।अनुभव 12 वर्ष — प्रिंट मीडिया एवं पत्रकारिता का अनुभव 4 वर्ष — पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में अनुभव संपादक — द टाइम्स ऑफ MP जिला उपाध्यक्ष — इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशनआकाश शर्मा का उद्देश्य स्थानीय स्तर की महत्वपूर्ण सूचनाओं को विश्वसनीय, स्पष्ट, तथ्यपरक और जिम्मेदार पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाना तथा आम नागरिकों से जुड़े मुद्दों को प्रभावी मंच प्रदान करना है।विशेषज्ञता: स्थानीय पत्रकारिता | प्रिंट मीडिया | समाचार संपादन | डिजिटल पत्रकारिता | स्थानीय समाचार रिपोर्टिंग | जनहित के मुद्दे | कानूनी जागरूकता |

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