नीमच (Neemuch Crime News)। नीमच जिले में लंबे समय से लंबित पत्रकार से मारपीट मामले में आखिरकार न्यायालय का बड़ा फैसला सामने आया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की अदालत ने इस गंभीर प्रकरण में चार आरोपियों को दोषी ठहराते हुए कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई है। यह फैसला न सिर्फ पीड़ितों के लिए राहत लेकर आया है, बल्कि पत्रकार सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
8 साल पुराने पत्रकार से मारपीट मामले की पृष्ठभूमि
यह पत्रकार से मारपीट का मामला 8 मार्च 2018 का है, जब स्थानीय पत्रकार राकेश सोन को एक खबर को लेकर गुप्ता नर्सिंग होम बुलाया गया था। इससे एक दिन पहले आरोपी डॉ. संजय गुप्ता ने फोन पर कथित रूप से “बच्चा बदलने” की खबर पर चर्चा के लिए पत्रकार को बुलाया था।
अगले दिन सुबह करीब 10:30 बजे पत्रकार अपने कैमरामैन के साथ नर्सिंग होम पहुंचे, जहां शुरुआत में बातचीत सामान्य रही, लेकिन कुछ ही समय में विवाद बढ़ गया और मामला हिंसा तक पहुंच गया।
कैबिन में बंद कर पत्रकार से मारपीट
जैसे ही बातचीत में तनाव बढ़ा, आरोपी डॉ. संजय गुप्ता ने पत्रकार के साथ हाथापाई शुरू कर दी। इसके बाद अन्य आरोपी भी मौके पर पहुंच गए और सभी ने मिलकर पत्रकार को कैबिन में बंद कर दिया।
इस दौरान आरोपियों ने पत्रकार के साथ जमकर मारपीट की, जिससे उनका चश्मा भी टूट गया। यह घटना पत्रकार से मारपीट के साथ-साथ अवैध रूप से बंधक बनाने का भी मामला बन गई। डॉ. सुजाता गुप्ता इस दौरान दरवाजे पर खड़ी रहीं, जिससे कोई बाहर न निकल सके।
मेडिकल स्टोर संचालक को भी नहीं छोड़ा
इस पत्रकार से मारपीट मामले में हिंसा यहीं नहीं रुकी। आरोपी दिलीप और रामप्रहलाद नर्सिंग होम के बाहर स्थित नाकोड़ा मेडिकल स्टोर में पहुंचे और वहां के संचालक महावीर जैन के साथ भी मारपीट की।
इसके बाद उन्हें जबरन कैबिन में लाकर बंद कर दिया गया। बाद में जब परिजन मौके पर पहुंचे, तब जाकर स्थिति काबू में आई और सभी को बाहर निकाला गया।
पुलिस कार्रवाई और जांच
घटना के बाद पत्रकार ने नीमच सिटी थाना में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की और पर्याप्त साक्ष्य जुटाने के बाद आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में चालान पेश किया।
कोर्ट ने सुनाई सजा
लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने पत्रकार से मारपीट मामले में सभी आरोपियों को दोषी पाया और निम्न सजा सुनाई:
🔹 डॉ. संजय गुप्ता एवं डॉ. सुजाता गुप्ता:
- धारा 323/34: 3-3 माह सश्रम कारावास + ₹1000 जुर्माना
- धारा 342: 3-3 माह सश्रम कारावास + ₹1000 जुर्माना
🔹 दिलीप एवं रामप्रहलाद:
- धारा 323/34: 3-3 माह सश्रम कारावास + ₹1000 जुर्माना
- धारा 342: 3-3 माह सश्रम कारावास + ₹1000 जुर्माना
- धारा 452: 1-1 वर्ष सश्रम कारावास + ₹3000 जुर्माना
यह फैसला पत्रकार से मारपीट जैसे मामलों में सख्त संदेश देता है कि कानून किसी को भी हाथ में लेने की अनुमति नहीं देता।
अभियोजन की मजबूत पैरवी
इस मामले में शासन की ओर से एडीपीओ विपिन मंडलोई ने प्रभावी पैरवी की। उन्होंने गवाहों और साक्ष्यों के माध्यम से आरोपियों के अपराध को संदेह से परे साबित किया, जिसके आधार पर अदालत ने यह सख्त फैसला सुनाया।
पत्रकार सुरक्षा पर अहम संदेश
यह पत्रकार से मारपीट का मामला केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और पत्रकारों की सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है। अदालत का यह फैसला स्पष्ट संकेत देता है कि पत्रकारों के साथ किसी भी प्रकार की हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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