95k की जॉब छोड़ी: Rose Farming Business से अब कमा रहे 15 लाख, इंजीनियर नितिन बने युवाओं के लिए मिसाल

Rose Farming Business
खरगोन:- अक्सर हम सुनते हैं कि अच्छी पढ़ाई-लिखाई का मतलब है एक वातानुकूलित (AC) ऑफिस में बैठकर मोटी तनख्वाह वाली नौकरी करना। लेकिन, मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के एक इंजीनियर ने इस सोच को पूरी तरह बदल दिया है। 95 हजार रुपये महीने की सुरक्षित नौकरी को ठोकर मारकर, जब नितिन मालाकार ने खेत में उतरने का फैसला किया, तो कई लोगों ने उन्हें पागलपन का ताना दिया होगा। लेकिन आज, उनका Rose Farming Business न केवल सफलता की नई इबारत लिख रहा है, बल्कि लाखों रुपये का मुनाफा भी दे रहा है।
यह कहानी सिर्फ खेती की नहीं, बल्कि रिस्क लेने और नई तकनीक (Modern Farming) पर भरोसा करने की है। आइए जानते हैं महेश्वर के नितिन मालाकार की पूरी संघर्ष यात्रा और सफलता का फंडा।
12 साल की कॉर्पोरेट नौकरी और ‘कंफर्ट जोन’ का त्याग
खरगोन जिले के महेश्वर के रहने वाले नितिन मालाकार कोई साधारण किसान नहीं हैं। उन्होंने इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन में इंजीनियरिंग (BE) की डिग्री हासिल की है। डिग्री लेने के बाद, आम युवाओं की तरह उन्होंने भी कॉर्पोरेट जगत का रुख किया। नितिन ने अपने करियर के 12 साल महाराष्ट्र के अलीबाग और पुणे जैसे बड़े शहरों में बिताए। वहां वे एक प्रतिष्ठित कंपनी में इंजीनियर के पद पर कार्यरत थे।
उनकी सैलरी भी कोई मामूली नहीं थी। उन्हें हर महीने करीब 90 से 95 हजार रुपये मिलते थे। जीवन सेटल था, लेकिन नितिन के मन में कुछ और ही चल रहा था। पुणे में रहने के दौरान उनका ध्यान वहां हो रही आधुनिक खेती पर गया। वे अक्सर सोचते थे कि परदेस में नौकरी करने से बेहतर है कि अपने गांव की मिट्टी में कुछ नया किया जाए। इसी विचार ने उनके Rose Farming Business की नींव रखी।
पुणे की तकनीक और गांव में नई शुरुआत
पुणे में नौकरी के दौरान नितिन ने पॉली हाउस तकनीक (Polyhouse Farming) को बहुत करीब से देखा था। उन्होंने महसूस किया कि पारंपरिक खेती में मौसम की मार और अनिश्चितता ज्यादा है, लेकिन अगर वैज्ञानिक तरीके से खेती की जाए, तो यह किसी भी मल्टीनेशनल कंपनी की नौकरी से ज्यादा रिटर्न दे सकती है।
साल 2020-21 में उन्होंने एक बड़ा फैसला लिया। उन्होंने अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया और महेश्वर लौट आए। यहाँ आकर उन्होंने अपनी एक एकड़ पुश्तैनी जमीन पर पॉली हाउस लगाने की योजना बनाई। लेकिन, Rose Farming Business शुरू करना आसान नहीं था। इसमें पूंजी और तकनीक दोनों की जरूरत थी।
सरकार से मिली मदद और हॉलैंड के गुलाब
नितिन ने हार नहीं मानी। उन्होंने मध्य प्रदेश उद्यानिकी विभाग (Horticulture Department) से संपर्क किया और बारीकियां समझीं। इसके बाद उन्होंने ‘नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड’ में आवेदन किया। प्रोजेक्ट पास होने पर बैंक से उन्हें 40 लाख रुपये का लोन मिला। खास बात यह रही कि इसमें उन्हें सरकार की तरफ से 28 लाख रुपये की भारी-भरकम सब्सिडी भी मिली।
इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार होने के बाद बारी थी सही फसल चुनने की। नितिन ने साधारण गुलाब के बजाय हॉलैंड (नीदरलैंड) की उन्नत किस्मों को चुना। उन्होंने अपने पॉली हाउस में करीब 32 हजार पौधे लगाए। इनमें मुख्य रूप से:
जुमेलिया (Jumelia)
व्हाइट अविलोंचे (White Avalanche)
रिवाइवल (Revival)
टॉप सीक्रेट (Top Secret)
जैसी प्रीमियम किस्में शामिल हैं। ये गुलाब जल्दी खराब नहीं होते और बाजार में इनकी कीमत भी अच्छी मिलती है।
कमाई का गणित: सालाना 15 लाख की शुद्ध बचत

नितिन की मेहनत रंग लाई। आज उनके पॉली हाउस से रोजाना 1600 से 1700 गुलाब के फूल निकलते हैं। Rose Farming Business में सबसे महत्वपूर्ण है मार्केट लिंकेज। नितिन के गुलाब न केवल खरगोन के स्थानीय बाजार में बिकते हैं, बल्कि जयपुर मंडी और देश के अन्य बड़े शहरों में भी इनकी भारी मांग है।
त्योहारों और शादियों के सीजन में जब फूलों की कीमतें आसमान छूती हैं, तब नितिन का मुनाफा कई गुना बढ़ जाता है। सारे खर्च और बैंक की किस्तें निकालने के बाद, नितिन आज सालाना 12 से 15 लाख रुपये की शुद्ध कमाई (Net Profit) कर रहे हैं। यह राशि उनकी पुरानी 95 हजार की नौकरी के पैकेज से कहीं ज्यादा और सुकून देने वाली है।
दूसरों के लिए बने रोजगार का जरिया
नितिन की सफलता सिर्फ उनकी अपनी नहीं है। जहाँ पहले वे खुद नौकरी करते थे, आज वे दूसरों को नौकरी दे रहे हैं। उनके Rose Farming Business के संचालन के लिए उन्होंने 4 से 5 लोगों को स्थायी रोजगार दिया है।
इससे गाँव के युवाओं को अपने घर के पास ही काम मिल गया है और उनका पलायन रुका है। नितिन का कहना है कि अगर युवा सही तकनीक और थोड़ी हिम्मत के साथ खेती में उतरें, तो वे न केवल आत्मनिर्भर बन सकते हैं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था में भी बड़ा योगदान दे सकते हैं। उनकी कहानी साबित करती है कि खेती अब ‘घाटे का सौदा’ नहीं, बल्कि ‘स्मार्ट बिजनेस’ है।
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