Big News: नीमच में प्रशासन का बड़ा एक्शन: 2 सगी बहनों का Neemuch Bal Vivah रुकवाया, राजस्थान से आनी थी बारात
Reported by: News Desk | Edited by: आकाश शर्मा
28 जनवरी 2026, (अपडेटेड 29 जनवरी 2026, 2:07 अपराह्न IST)

नीमच। मध्यप्रदेश के नीमच जिले से एक बड़ी खबर सामने आ रही है जहाँ जिला प्रशासन ने मुस्तैदी दिखाते हुए दो मासूम लड़कियों का भविष्य बर्बाद होने से बचा लिया। कलेक्टर हिमांशु चंद्रा के सख्त निर्देशों पर जवासा ग्राम में चल रही Neemuch Bal Vivah की तैयारियों पर प्रशासन ने पानी फेर दिया। इस पूरी कार्यवाही को महिला एवं बाल विकास विभाग (मबावि) और पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीम ने अंजाम दिया, जिससे पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है।

गोपनीय सूचना पर प्रशासन की सर्जिकल स्ट्राइक

28 जनवरी 2026 की शाम प्रशासन को एक गुप्त सूचना मिली कि ग्राम जवासा में 29 जनवरी को दो सगी बहनों का विवाह होने जा रहा है। Neemuch Bal Vivah की इस जानकारी ने अधिकारियों को तुरंत सतर्क कर दिया। सूचना के अनुसार, इन शादियों के लिए एक बारात राजस्थान से और दूसरी बारात मोरका विकासखंड जावद से आने वाली थी। जैसे ही यह खबर जिला कार्यक्रम अधिकारी सुश्री अंकिता पंड्या तक पहुँची, उन्होंने तुरंत एक उच्च स्तरीय टीम का गठन किया।

ननिहाल में रची जा रही थी साजिश

जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि दोनों लड़कियां (उम्र 16 और 17 वर्ष) मूल रूप से राजस्थान की निवासी हैं। वे अपने परिवार के साथ अपने मामा के घर ग्राम जवासा में आई हुई थीं। परिवार को लगा था कि राजस्थान से बाहर एमपी के एक छोटे से गाँव में वे गुपचुप तरीके से Neemuch Bal Vivah संपन्न करा लेंगे, लेकिन प्रशासन की सक्रियता ने उनके मंसूबों को नाकाम कर दिया। एसडीएम संजीव साहू के पर्यवेक्षण में परियोजना अधिकारी इरफान अंसारी ने टीम के साथ मौके पर दबिश दी।

अधिकारियों की बड़ी टीम ने संभाला मोर्चा

इस महत्वपूर्ण कार्यवाही में प्रशासन ने कोई जोखिम नहीं लिया और कई विभागों को एक साथ मैदान में उतारा। संयुक्त दल में उप निरीक्षक मदनलाल सिंघाड़, राजस्व निरीक्षक अक्षय शर्मा, पंचायत समन्वय अधिकारी एन.के. कुमार शर्मा, और महिला विभाग की पर्यवेक्षक श्रीमती इंदु सोनी व श्रीमती पिंकी भाटिया शामिल रहीं। साथ ही, स्थानीय पटवारी मनोज चौहान, स्वास्थ्य सेक्टर सुपरवाइजर सुरेश कारपेंटर और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता नागकन्या सेन ने भी जमीनी स्तर पर जानकारी जुटाने में मदद की। Neemuch Bal Vivah को रोकने के लिए इतने बड़े स्तर पर हुई कार्यवाही ने समाज को एक कड़ा संदेश दिया है।

कानूनी पाठ और परिवार का सरेंडर

जब टीम मौके पर पहुँची, तो वहां उत्सव का माहौल था, लेकिन प्रशासन को देखते ही सन्नाटा पसर गया। अधिकारियों ने परिवार के सदस्यों से बालिकाओं के आयु संबंधी दस्तावेज मांगे। मौके पर मौजूद पिता और ननिहाल पक्ष के पास कोई भी वैध प्रमाण पत्र (जैसे अंकसूची या जन्म प्रमाण पत्र) मौजूद नहीं था। आखिरकार, भारी दबाव के बीच उन्होंने स्वीकार किया कि दोनों बेटियाँ नाबालिग हैं।

टीम ने उन्हें Neemuch Bal Vivah प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के सख्त प्रावधानों के बारे में समझाया। उन्हें बताया गया कि बाल विवाह न केवल एक सामाजिक बुराई है, बल्कि यह एक गंभीर दंडनीय अपराध है जिसमें जेल और जुर्माना दोनों हो सकते हैं। कानून का डंडा चलते ही परिवार ने अपनी गलती मान ली और लिखित में सहमति दी कि वे इस प्रस्तावित विवाह को स्थगित कर रहे हैं।

भविष्य के लिए सख्त चेतावनी

प्रशासन ने न केवल शादी रुकवाई, बल्कि एक पंचनामा भी तैयार करवाया। इसमें स्पष्ट लिखा गया कि यदि भविष्य में बेटियों के बालिग होने से पहले विवाह करने का प्रयास किया गया, तो पूरे परिवार पर कानूनी गाज गिरेगी। Neemuch Bal Vivah रोकने के बाद टीम ने ग्रामीणों को शपथ भी दिलाई कि वे अपने क्षेत्र में ऐसी कुप्रथाओं को बढ़ावा नहीं देंगे।

‘द टाइम्स ऑफ़ एमपी’ की विशेष अपील: मासूम बचपन को बचाएं, बाल विवाह रूपी कुप्रथा को जड़ से मिटाएं

‘द टाइम्स ऑफ़ एमपी’ सामाजिक सरोकारों और जनहित के मुद्दों को उठाने के लिए सदैव प्रतिबद्ध रहा है। इसी कड़ी में, आज हम एक अत्यंत गंभीर और संवेदनशील विषय – बाल विवाह – पर आप सभी से एक महत्वपूर्ण अपील कर रहे हैं।

बाल विवाह केवल एक कानूनन अपराध ही नहीं है, बल्कि यह मासूम बच्चों के सपनों, उनकी शिक्षा और उनके स्वास्थ्य के अधिकार का हनन है। यह एक ऐसी कुप्रथा है जो पीढ़ियों को अंधकार में धकेल देती है। इसे रोकने की जिम्मेदारी सिर्फ प्रशासन की नहीं, बल्कि हम सब की है।

हमारी आपसे पुरजोर अपील है कि:

  1. अपने परिवार या समाज में किसी भी सूरत में बाल विवाह न होने दें। बेटा हो या बेटी, उन्हें बालिग होने के बाद ही विवाह के बंधन में बांधें।

  2. यदि आपके आस-पास, पड़ोस में या गाँव में कहीं भी बाल विवाह हो रहा हो, या उसकी तैयारी चल रही हो, तो मूकदर्शक बनकर न रहें। आपकी एक सूचना किसी बच्चे की जिंदगी बर्बाद होने से बचा सकती है।

तत्काल सूचना देने के लिए संपर्क सूत्र:

अगर आपको कहीं भी बाल विवाह की जानकारी मिलती है, तो तुरंत निम्नलिखित माध्यमों से प्रशासन को सूचित करें:

  • चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर: 1098 (यह सेवा 24/7 निःशुल्क चालू रहती है)।

  • जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) टोल फ्री नंबर: 15100.

  • पुलिस सहायता नंबर: 112.

  • महिला हेल्पलाइन नंबर: 181.

  • अपने स्थानीय पुलिस थाने में संपर्क करें।

  • क्षेत्र के बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी को सूचित करें।

  • आप अपने गाँव के सरपंच, ग्राम पंचायत सचिव या क्षेत्र के पैरा लीगल वालंटियर (PLV) को भी जानकारी दे सकते हैं।

डरें नहीं, आगे आएं – आपकी पहचान गुप्त रहेगी

हम आपको विश्वास दिलाते हैं कि शिकायत करने वाले या सूचना देने वाले व्यक्ति का नाम और पहचान पूरी तरह से गुप्त रखी जाती है। इसलिए, बिना किसी भय या संकोच के प्रशासन का सहयोग करें।

आइए, द टाइम्स ऑफ़ एमपी’ के साथ मिलकर यह संकल्प लें कि हम अपने प्रदेश में बाल विवाह जैसी बुराई को पनपने नहीं देंगे और हर बच्चे के सुरक्षित भविष्य को सुनिश्चित करेंगे।

सतर्क रहें। जिम्मेदार बनें। बचपन बचाएं।


यह भी पढ़ें: 4 KG चांदी, ‘भरोसे’ की गिरवी और पुलिसिया पेंच: नीमच के घंटाघर में मचे बवाल की पूरी इनसाइड स्टोरी

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Aakash Sharma
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आकाश शर्मा मध्यप्रदेश के नीमच क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार और द टाइम्स ऑफ MP के संपादक हैं। उन्हें प्रिंट मीडिया में 12 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव है। लंबे समय से स्थानीय एवं जनसरोकार से जुड़े मुद्दों की रिपोर्टिंग, समाचार संपादन और समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उन्होंने स्थानीय पत्रकारिता में व्यापक अनुभव हासिल किया है।द टाइम्स ऑफ MP के माध्यम से आकाश शर्मा नीमच, मंदसौर और आसपास के क्षेत्रों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को पाठकों तक पहुंचाने का कार्य करते हैं। उनकी कवरेज में स्थानीय प्रशासन, पुलिस एवं कानून-व्यवस्था, जनसमस्याएं, नागरिक सुविधाएं, राजनीति, सामाजिक गतिविधियां, शिक्षा, कृषि, व्यापार और अन्य जनहित से जुड़े विषय शामिल हैं।उनकी संपादकीय कार्यशैली में तथ्यपरक रिपोर्टिंग, स्रोत-आधारित जानकारी, निष्पक्ष प्रस्तुति और जिम्मेदार पत्रकारिता को प्राथमिकता दी जाती है। संवेदनशील और अपराध से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग में आरोप और प्रमाणित तथ्य के बीच अंतर बनाए रखने तथा उपलब्ध आधिकारिक एवं विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर खबर प्रस्तुत करने पर विशेष ध्यान दिया जाता है।पत्रकारिता के साथ आकाश शर्मा पिछले 4 वर्षों से पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में भी कार्य कर रहे हैं। इस भूमिका में वे कानूनी जागरूकता और जनहित से जुड़े कार्यों से जुड़े रहे हैं। इसके साथ ही वे इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशन में जिला उपाध्यक्ष (District Vice President) के दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं।अनुभव 12 वर्ष — प्रिंट मीडिया एवं पत्रकारिता का अनुभव 4 वर्ष — पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में अनुभव संपादक — द टाइम्स ऑफ MP जिला उपाध्यक्ष — इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशनआकाश शर्मा का उद्देश्य स्थानीय स्तर की महत्वपूर्ण सूचनाओं को विश्वसनीय, स्पष्ट, तथ्यपरक और जिम्मेदार पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाना तथा आम नागरिकों से जुड़े मुद्दों को प्रभावी मंच प्रदान करना है।विशेषज्ञता: स्थानीय पत्रकारिता | प्रिंट मीडिया | समाचार संपादन | डिजिटल पत्रकारिता | स्थानीय समाचार रिपोर्टिंग | जनहित के मुद्दे | कानूनी जागरूकता |

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