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7 घातक संकेत: महिलाओं में ‘साइलेंट हार्ट अटैक’ का बढ़ता खतरा, थकान और कमजोरी को न करें इग्नोर

Silent Heart Attack in Women

नीमच (Neemuch News)।आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में महिलाएं अक्सर अपनी सेहत को परिवार और काम की जिम्मेदारियों के पीछे धकेल देती हैं। जिसे वे सामान्य थकान, कमजोरी या वायरल फ्लू समझकर नजरअंदाज कर देती हैं, वह वास्तव में उनकी जान के लिए सबसे बड़ा खतरा हो सकता है। चिकित्सा जगत में इसे ‘Silent Heart Attack in Women’ यानी ‘खामोश दिल का दौरा’ कहा जा रहा है। यह एक ऐसी स्थिति है जहां शरीर कोई बड़ा शोर (सीने में तेज दर्द) नहीं मचाता, लेकिन अंदर ही अंदर दिल को गंभीर नुकसान पहुंचा देता है।

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शोध के अनुसार, 55 वर्ष से कम उम्र की लगभग 20% महिलाओं को हार्ट अटैक के दौरान सीने में कोई दर्द महसूस ही नहीं होता।

क्या है साइलेंट हार्ट अटैक? (Silent Heart Attack in Women)

Silent Heart Attack in Women

एक सामान्य हार्ट अटैक में व्यक्ति को सीने में तेज दबाव, जकड़न और ऐसा दर्द महसूस होता है जैसे कोई भारी वजन रख दिया गया हो। लेकिन ‘साइलेंट हार्ट अटैक’ में ऐसा कुछ नहीं होता। इसमें दिल की धमनियों में ब्लॉकेज के कारण रक्त और ऑक्सीजन की आपूर्ति तो रुकती है, लेकिन नर्व्स (नसों) की संवेदनशीलता कम होने के कारण मरीज को दर्द का अहसास ही नहीं होता।

विशेषज्ञों का कहना है कि Silent Heart Attack in Women इसलिए अधिक खतरनाक है क्योंकि इसमें ‘गोल्डन आवर’ (हार्ट अटैक के बाद का पहला घंटा) इलाज के बिना ही बीत जाता है।

Silent Heart Attack Age: किस उम्र में है सबसे ज्यादा खतरा?

दिल की बीमारियों को लेकर अक्सर यह माना जाता था कि यह बुढ़ापे की बीमारी है, लेकिन बदलते दौर में silent heart attack age का ग्राफ काफी नीचे आ गया है।

  1. युवा महिलाएं (30-45 वर्ष): खराब लाइफस्टाइल, अत्यधिक तनाव और स्मोकिंग के कारण अब 30 से 45 साल की महिलाओं में भी इसके मामले देखे जा रहे हैं।

  2. मेनोपॉज के बाद (50+ वर्ष): 50 वर्ष की आयु के बाद महिलाओं में एस्ट्रोजेन हॉर्मोन का स्तर गिर जाता है, जिससे दिल की सुरक्षा करने वाला कवच हट जाता है।

  3. वर्किंग महिलाएं: ऑफिस और घर के बीच संतुलन बनाने के तनाव में 35-50 की उम्र के बीच Silent Heart Attack in Women का रिस्क सबसे ज्यादा पाया गया है।


प्रमुख Reasons of Silent Heart Attack: आखिर क्यों होता है खामोश हमला?

डॉक्टरों के अनुसार, इसके पीछे कई शारीरिक और बाहरी कारण जिम्मेदार हैं। यहाँ प्रमुख reasons of silent heart attack दिए गए हैं:

  • डायबिटीज (Diabetes): मधुमेह के मरीजों में नसों को नुकसान पहुँचता है (जिसे डायबिटिक न्यूरोपैथी कहते हैं)। इस कारण दिल में दर्द होने पर भी दिमाग तक संकेत नहीं पहुँच पाते। यह सबसे बड़ा कारण है।

  • उच्च रक्तचाप (High BP): लंबे समय तक हाई बीपी धमनियों को सख्त बना देता है, जिससे रक्त प्रवाह बाधित होता है और साइलेंट अटैक की स्थिति बनती है।

  • अत्यधिक तनाव (Stress): मानसिक तनाव से शरीर में ‘कोर्टिसोल’ हॉर्मोन बढ़ता है, जो सीधे दिल की धमनियों में सूजन पैदा करता है।

  • मोटापा और कोलेस्ट्रॉल: शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) का बढ़ना धमनियों में प्लाक (गंदगी) जमा करता है, जो Silent Heart Attack in Women का मुख्य कारण बनता है।

  • नींद की कमी: जो महिलाएं 6 घंटे से कम सोती हैं, उनके दिल की धड़कन और रक्तचाप अनियंत्रित रहने की संभावना अधिक होती है।


महिलाओं में यह खतरा पुरुषों से ज्यादा क्यों?

डॉक्टरों के अनुसार, महिलाओं के शरीर की बनावट और हॉर्मोनल संतुलन उन्हें पुरुषों से अलग जोखिमों में डालते हैं।

1. माइक्रोवैस्कुलर डिजीज

पुरुषों में आमतौर पर दिल की बड़ी धमनियों में ब्लॉकेज होता है, जिसे पहचानना आसान होता है। इसके विपरीत, महिलाओं में बहुत छोटी रक्त वाहिकाओं (Microvascular) में ब्लॉकेज की समस्या अधिक होती है। इन सूक्ष्म वाहिकाओं में होने वाली रुकावट अक्सर पारंपरिक ईसीजी (ECG) में भी आसानी से पकड़ में नहीं आती।

2. हॉर्मोनल सुरक्षा का कवच हटना

मेनोपॉज से पहले ‘एस्ट्रोजेन’ हॉर्मोन धमनियों को लचीला रखता है। लेकिन silent heart attack age के करीब पहुँचते ही (45-50 वर्ष) यह सुरक्षा कम हो जाती है, जिससे अचानक रिस्क बढ़ जाता है।

3. दर्द सहने की क्षमता

भारतीय महिलाएं अक्सर हल्के दर्द को सहन करने की आदी होती हैं। वे बुखार या बदन दर्द के बावजूद काम करती रहती हैं। यही सहनशीलता उनके लिए घातक बन जाती है क्योंकि वे प्रारंभिक संकेतों को पहचान नहीं पातीं।


पहचानें इन खामोश संकेतों को (Symptoms of Silent Heart Attack in Women)

अगर आपको या आपके घर की किसी महिला को नीचे दिए गए लक्षण बिना किसी स्पष्ट कारण के दिखें, तो इसे कतई नजरअंदाज न करें:

  • अत्यधिक थकान: यदि रात भर सोने के बाद भी सुबह उठते ही आपको ऐसा लगे कि आपने कोई भारी काम किया है, तो यह दिल की कमजोरी का संकेत हो सकता है।

  • ऊपरी शरीर में बेचैनी: दर्द सिर्फ सीने में नहीं, बल्कि जबड़े, गर्दन, पीठ या दोनों हाथों में भी महसूस हो सकता है।

  • फ्लू जैसे लक्षण: अचानक चक्कर आना, मतली (जी मिचलाना) या ठंडे पसीने आना। अक्सर इसे लोग एसिडिटी समझ लेते हैं।

  • सांस फूलना: सीढ़ियां चढ़ते समय या सामान्य पैदल चलते समय भी अगर सांस फूलने लगे, तो यह Silent Heart Attack in Women की पूर्व सूचना हो सकती है।


आपातकालीन स्थिति में क्या करें? 

यदि आपको संदेह है कि किसी को साइलेंट हार्ट अटैक आया है, तो समय बर्बाद न करें:

  1. आराम की स्थिति: मरीज को तुरंत जमीन पर बैठा दें। उनकी पीठ को दीवार का सहारा दें।

  2. एस्पिरिन (Aspirin 300mg): यदि मरीज को एलर्जी नहीं है, तो एक गोली तुरंत चबाने को कहें। यह खून के थक्के को जमने से रोकती है।

  3. मेडिकल हेल्प: तुरंत एम्बुलेंस बुलाएं। खुद ड्राइव न करें।


बचाव के तरीके 

हृदय रोगों से बचने के लिए अपनी जीवनशैली में ये बदलाव आज ही करें:

  • नियमित चेकअप: 40 की उम्र के बाद साल में एक बार लिपिड प्रोफाइल और ईसीजी जरूर कराएं।

  • संतुलित आहार: भोजन में नमक और चीनी कम करें। हरी सब्जियां और फलों का अधिक सेवन करें।

  • शारीरिक सक्रियता: रोजाना कम से कम 30 मिनट की तेज सैर (Brisk Walking) आपके दिल को जवान रखती है।

  • तनाव कम करें: योग और ध्यान को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।

निष्कर्ष: Silent Heart Attack in Women एक गंभीर चेतावनी है। इसे केवल उम्र या सामान्य कमजोरी मानकर टालना भारी पड़ सकता है। चाहे बात silent heart attack age की हो या इसके पीछे छिपे reasons of silent heart attack की, जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है। “अभी तो बस थोड़ा अजीब लग रहा है” वाली सोच जानलेवा हो सकती है। सजग रहें और अपने आसपास की महिलाओं को भी जागरूक करें।


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