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उज्जैन बोरवेल बचाव अभियान: 75 फीट नीचे फंसा 2 साल का मासूम, चट्टानों से बढ़ी चुनौती

उज्जैन बोरवेल बचाव अभियान

बड़नगर। मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के बड़नगर क्षेत्र स्थित झालरिया गांव में गुरुवार शाम हुआ दर्दनाक हादसा अब एक बड़े रेस्क्यू ऑपरेशन में बदल चुका है। उज्जैन बोरवेल बचाव अभियान लगातार जारी है, जहां करीब 2 साल का मासूम भागीरथ 200 फीट गहरे खुले बोरवेल में गिरकर लगभग 75 फीट की गहराई पर फंसा हुआ है।

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घटना के बाद से ही प्रशासन ने तत्काल एक्शन लेते हुए उज्जैन बोरवेल बचाव अभियान शुरू किया। मौके पर राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) की टीमें लगातार राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हुई हैं। समय के साथ यह ऑपरेशन और भी चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है।

कैसे हुआ हादसा

जानकारी के अनुसार, मासूम भागीरथ का परिवार राजस्थान के पाली जिले से आया हुआ है और पिछले कुछ दिनों से झालरिया गांव के पास भेड़ चराने के लिए रुका हुआ था। गुरुवार शाम करीब 7:30 बजे बच्चा घर के पास खेल रहा था।

बताया जा रहा है कि वहां एक पुराना बोरवेल खुला हुआ था, जिसे ऊपर से एक पत्थर रखकर ढका गया था। खेलते-खेलते बच्चे ने उस पत्थर को हटा दिया और उसे बाल्टी समझकर उसमें पैर डाल दिया। संतुलन बिगड़ते ही वह सीधे बोरवेल के अंदर गिर गया।

मां ने जैसे ही बच्चे को गिरते देखा, वह उसे बचाने के लिए दौड़ी, लेकिन तब तक बच्चा काफी गहराई में जा चुका था। इस घटना के बाद पूरे गांव में हड़कंप मच गया और तुरंत प्रशासन को सूचना दी गई।

उज्जैन बोरवेल बचाव अभियान: रेस्क्यू की मौजूदा स्थिति

उज्जैन बोरवेल बचाव अभियान

उज्जैन बोरवेल बचाव अभियान

घटना के बाद से उज्जैन बोरवेल बचाव अभियान युद्धस्तर पर चलाया जा रहा है। रेस्क्यू टीमों ने कई रणनीतियों पर एक साथ काम शुरू किया है।

1. रस्सी की रिंग से निकालने का प्रयास

SDRF टीम बच्चे तक रस्सी की एक विशेष रिंग पहुंचाने की कोशिश कर रही है, ताकि उसे सुरक्षित तरीके से फंसाकर ऊपर खींचा जा सके। हालांकि बोरवेल की गहराई और संकरी जगह इस प्रक्रिया को बेहद कठिन बना रही है।

2. समानांतर सुरंग की खुदाई

उज्जैन बोरवेल बचाव अभियान के तहत एक समानांतर सुरंग खोदने का काम भी शुरू किया गया। इसके लिए 5 पोकलेन मशीनों की मदद ली गई। शुरुआत में काम तेजी से चला, लेकिन करीब 40 फीट की गहराई पर भारी और कठोर चट्टानें मिलने से खुदाई रोकनी पड़ी।

3. चट्टानों से बढ़ी चुनौती

रेस्क्यू ऑपरेशन में सबसे बड़ी बाधा अब चट्टानें बन चुकी हैं। इन्हें तोड़ने के लिए विशेष हैमर मशीन मंगवाई गई है। जब तक इन चट्टानों को नहीं हटाया जाएगा, तब तक सुरंग बनाकर बच्चे तक पहुंचना संभव नहीं होगा।

इस वजह से उज्जैन बोरवेल बचाव अभियान की गति धीमी जरूर हुई है, लेकिन टीम लगातार प्रयास कर रही है।

कैमरा निगरानी और ऑक्सीजन सपोर्ट

बच्चे की स्थिति पर नजर बनाए रखने के लिए बोरवेल के अंदर एक कैमरा डाला गया है। इससे रेस्क्यू टीम को लगातार अपडेट मिल रहा है कि बच्चा किस स्थिति में है।

साथ ही पाइप के माध्यम से लगातार ऑक्सीजन सप्लाई की जा रही है, ताकि बच्चे को सांस लेने में कोई दिक्कत न हो। मौके पर मेडिकल टीम तैनात है और दो एंबुलेंस भी तैयार रखी गई हैं।

बताया जा रहा है कि बोरवेल में पानी भी हो सकता है, जिससे स्थिति और गंभीर हो जाती है। यही कारण है कि उज्जैन बोरवेल बचाव अभियान को अत्यधिक सावधानी और तकनीकी निगरानी के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है।

कई एजेंसियां मिलकर कर रहीं प्रयास

इस उज्जैन बोरवेल बचाव अभियान में भोपाल से आई NDRF टीम के अलावा उज्जैन, इंदौर और हरदा की SDRF टीमें भी शामिल हैं। सभी टीमें आपसी समन्वय के साथ काम कर रही हैं।

रेस्क्यू ऑपरेशन को सफल बनाने के लिए हर संभव तकनीक और संसाधन का इस्तेमाल किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जब तक बच्चा सुरक्षित बाहर नहीं आ जाता, तब तक अभियान जारी रहेगा।

पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे हादसे

देश के कई हिस्सों में खुले बोरवेल के कारण इस तरह की घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं। हर बार हादसे के बाद सख्त निर्देश जारी किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर लापरवाही खत्म नहीं हो पाती।

उज्जैन बोरवेल बचाव अभियान ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर खुले बोरवेल को लेकर नियमों का पालन क्यों नहीं हो रहा है।

यदि समय रहते ऐसे बोरवेल को बंद किया जाए, तो इस तरह के हादसों को रोका जा सकता है।

प्रशासन की अपील और आगे की कार्रवाई

प्रशासन ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे घटनास्थल पर भीड़ न लगाएं और बचाव कार्य में बाधा न डालें। साथ ही आसपास के सभी खुले बोरवेल को चिन्हित कर उन्हें बंद करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।


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