नीमच: इन दिनों IPL सट्टा माफिया नीमच में एक समानांतर काली अर्थव्यवस्था चला रहा है। क्रिकेट के रोमांच की आड़ में सट्टेबाजों का एक मजबूत सिंडिकेट शहर के युवाओं को बर्बादी के दलदल में धकेल रहा है। पुलिस की लगातार कार्रवाइयों और छापों की खबरें तो रोज सुर्खियां बन रही हैं, लेकिन इन कार्रवाइयों का एक कड़वा सच यह भी है कि खाकी के हाथ सिर्फ प्यादों तक पहुंच रहे हैं। हाल ही में पुलिस की विशेष टीम ने दबिश देकर ऑनलाइन सट्टा संचालित कर रहे दीपक नाम के एक और सटोरिए को धर दबोचा है। उसके पास से 53 हजार रुपये नकद और मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं। इससे ठीक पहले हिमांशु, मनीष और यश जैसे मोहरों को पकड़ा गया था।
यानी, पुलिस का एक्शन तो दिख रहा है, लेकिन यहाँ सबसे बड़ा और सीधा सवाल यह है कि जब सट्टा सिंडिकेट को पर्दे के पीछे से चलाने वाले असली ‘मगरमच्छों’ के नाम जगजाहिर हैं, तो पुलिस के हाथ उनके गिरेबान तक क्यों नहीं पहुँच रहे हैं?
दीपक की गिरफ्तारी और पूछताछ में खुले राज
पुलिसिया पूछताछ में दीपक ने कई अहम खुलासे किए हैं, जिनमें मोहित और विकास के नाम प्रमुखता से उभरे हैं। साफ है कि यह सिर्फ एक गली-मोहल्ले का खेल नहीं, बल्कि एक संगठित नेटवर्क है। विकास का नाम पहले भी संभावित बड़े सटोरियों की सूची में आ चुका है। शहर भर में यह चर्चा आम है कि IPL सट्टा माफिया नीमच के इस ‘काले कारोबार’ में मोहित और विकास ही असली रिमोट कंट्रोल बने बैठे हैं। लेकिन सिस्टम की कार्यप्रणाली पर यह एक बड़ा सवालिया निशान है कि जब आम जनता और गली-मोहल्ले के लोगों को इन चेहरों की हकीकत पता है, तो पुलिस का खुफिया तंत्र उनके ठिकानों तक पहुँचने से पहले ही क्यों हांफने लगता है?
सफेदपोश ‘आकाओं’ को सिस्टम का संरक्षण?
क्या इन सफेदपोश ‘आकाओं’ के पास कोई मजबूत राजनीतिक संरक्षण है? या फिर सिंडिकेट की काली कमाई का एक बड़ा हिस्सा उन जगहों तक पहुँच रहा है, जहाँ से इन्हें पुलिस कार्रवाई से बचने की अघोषित ‘गारंटी’ मिल जाती है? हालांकि, नीमच पुलिस के दावों के विपरीत प्रतापगढ़ (राजस्थान) पुलिस की एक हालिया कार्रवाई ने कई पोल खोल दी हैं। राजस्थान पुलिस की रेड में IPL सट्टा माफिया नीमच के मास्टरमाइंड हर्ष अग्रवाल और पुरुषोत्तम के नाम स्पष्ट रूप से उजागर हो चुके हैं। दूसरे राज्य की पुलिस नीमच के सटोरियों के नेटवर्क को बेनकाब कर रही है, जबकि स्थानीय पुलिस अभी भी महज 50 हजार या लाख रुपये की जब्ती और 2-3 मोहरों की गिरफ्तारी को अपनी बड़ी कामयाबी बताकर पीठ थपथपा रही है।
इन हाई-टेक सटोरियों पर पुलिस की रेड का इंतजार
आज नीमच जिले में हाई-टेक डिवाइस, डार्क वेब और डिजिटल नेटवर्क के जरिये इस पूरे काले कारोबार को संचालित करने वाले दर्जनों नाम खुलेआम घूम रहे हैं। सवाल यह है कि इन पर कार्रवाई का ‘मुहूर्त’ कब निकलेगा? शहर में सट्टा बाजार के जो किंगपिन सक्रिय हैं, उनकी फेहरिस्त काफी लंबी है:
डॉलर, उड़ता पंजाब (कोमल), नरेश, अमरीश और सौरभ: जो सट्टा बाजार के बड़े ऑपरेटर माने जाते हैं।
चंडी, आकाश, जीतू और रितेश: जिनका नेटवर्क गली-मोहल्लों तक फैला है।
यश, सन्नी, कपिल और गुणवंत: युवाओं को प्रलोभन देने वाले प्रमुख चेहरे।
जानू उर्फ़ पिंकू, मनोज, पीयूष और आशीष: पैसों की हेराफेरी संभालने वाले गुर्गे।
ये कोई छिपे हुए नाम नहीं हैं। 13 अप्रैल को जब सतगुरु बेकरी के पीछे से हिमांशु (अशोक सुंगधी का बेटा), मनीष और यश पकड़े गए थे, तब भी यही उम्मीद थी कि पुलिस अब इस असली नेटवर्क को तोड़ेगी। गौरतलब है कि हिमांशु का तो इंदौर में भी सट्टेबाजी का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। लेकिन नतीजा फिर ढाक के तीन पात ही रहा। कड़वा सच यह है कि जब तक डॉलर, सौरभ और हर्ष जैसे बड़े नाम सलाखों के पीछे नहीं होंगे, तब तक छोटे प्यादों को पकड़ने से IPL सट्टा माफिया नीमच का यह अरबों का खेल बंद होने वाला नहीं है।
एसपी की अपील अपनी जगह, जनता को चाहिए ‘बुलडोजर एक्शन’
नीमच एसपी अंकित जायसवाल ने साफ कहा है कि पुलिस की पैनी नजर सट्टेबाजों पर है। उनका दावा है कि बाहरी नेटवर्क सामने आने पर अन्य जिलों की पुलिस के साथ मिलकर भी एक्शन लिया जाएगा। उन्होंने युवाओं और छात्रों से रातों-रात अमीर बनने के प्रलोभन में न फंसने की अपील की है और जनता से गोपनीय सूचनाएँ पुलिस से साझा करने को कहा है।
अपील और जागरूकता अपनी जगह बिल्कुल सही है, लेकिन पुलिस को यह जमीनी हकीकत स्वीकार करनी होगी कि जनता के बीच फिलहाल यही संदेश जा रहा है कि खाकी सिर्फ छोटों पर जोर दिखाती है और बड़ों के सामने बेबस है। अगर पुलिस सच में इस सिंडिकेट की कमर तोड़ना चाहती है, तो उसे प्रेस नोट में ‘मोहरों’ की गिरफ्तारी के बजाय इन बड़े ‘मगरमच्छों’ को बेनकाब करना होगा। जब तक इन सफेदपोशों के अवैध साम्राज्यों पर बुलडोजर नहीं चलेगा और सट्टे की कमाई से बनाई गई इनकी संपत्तियां कुर्क नहीं होंगी, तब तक ये कार्रवाइयां महज़ एक कागजी दिखावा ही मानी जाएंगी।
FAQ Section
Q1. नीमच में ऑनलाइन सट्टेबाजी में पुलिस ने हाल ही में किसे गिरफ्तार किया है?
Ans. नीमच पुलिस ने हाल ही में दीपक नाम के सटोरिए को 53 हजार रुपये नकद और मोबाइल के साथ पकड़ा है। इससे पहले हिमांशु, मनीष और यश गिरफ्तार हुए थे।
Q2. पुलिस की पूछताछ में किन बड़े सटोरियों के नाम सामने आए हैं?
Ans. दीपक की गिरफ्तारी के बाद पुलिस पूछताछ में मोहित और विकास के नाम प्रमुखता से सामने आए हैं, जो IPL सट्टा माफिया नीमच के अहम हिस्से माने जा रहे हैं।
Q3. नीमच में आईपीएल सट्टा असल में कौन चला रहा है?
Ans. पुलिस सूत्रों और ग्राउंड रिपोर्ट्स के अनुसार, हर्ष अग्रवाल, डॉलर, सौरभ, मोहित, विकास और कई अन्य लोग इस सट्टा सिंडिकेट के असली आका हैं, जो अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं।
Q4. राजस्थान पुलिस की कार्रवाई में किन सटोरियों का नाम आया था?
Ans. प्रतापगढ़ (राजस्थान) पुलिस की कार्रवाई में नीमच के सट्टा मास्टरमाइंड हर्ष अग्रवाल और पुरुषोत्तम के नाम स्पष्ट रूप से उजागर हो चुके हैं।
Q5. नीमच एसपी ने सट्टेबाजी को लेकर जनता से क्या कहा है?
Ans. एसपी अंकित जायसवाल ने युवाओं से रातों-रात अमीर बनने के लालच में न फंसने की अपील की है। साथ ही कहा है कि सटोरियों की गोपनीय जानकारी पुलिस को दें, सूचना देने वाले का नाम गुप्त रखा जाएगा।
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