नीमच में स्कूलों का समय बदला: 1 बजे की चिलचिलाती धूप में बच्चों की छुट्टी, क्या प्रशासन कर रहा है सिर्फ रस्म अदायगी?
Reported by: News Desk | Edited by: आकाश शर्मा
16 अप्रैल 2026, (अपडेटेड 16 अप्रैल 2026, 10:34 अपराह्न IST)

नीमच (The Times of MP)। जिले में इन दिनों भीषण गर्मी और लू का प्रकोप जारी है। सुबह 9 बजे से ही सूरज के तीखे तेवर लोगों को झुलसाने लगते हैं। बढ़ते तापमान और विद्यार्थियों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए, नीमच जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने कलेक्टर के अनुमोदन से 16 अप्रैल को स्कूलों के समय में बदलाव का आदेश जारी किया है।

आदेश के मुताबिक, अब जिले के सभी शासकीय, अशासकीय, अनुदान प्राप्त और सीबीएसई/आईसीएसई स्कूल सुबह 7:30 से दोपहर 1:00 बजे तक संचालित होंगे। प्रशासन इसे बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए उठाया गया अहम कदम बता रहा है। हालांकि, व्यावहारिक नजरिए से देखा जाए तो यह फैसला राहत कम और एक विभागीय ‘खानापूर्ति’ ज्यादा नजर आता है।

नीमच स्कूल टाइमिंग: 1 बजे तो आसमान से बरसती है आग, फिर यह कैसा बचाव?

इस नए आदेश में सबसे बड़ी तार्किक खामी समय के चुनाव को लेकर है। अधिकांश स्कूलों की छुट्टी का सामान्य समय वैसे भी दोपहर 1 बजे या 1:30 बजे के आसपास ही होता है। ऐसे में ‘समय बदलने’ के नाम पर प्रशासन ने वास्तव में बच्चों को क्या राहत दी?

दूसरी और सबसे अहम बात यह है कि दोपहर 1 बजे गर्मी और धूप अपने चरम पर होती है। उस वक्त डामर की सड़कें तंदूर की तरह तप रही होती हैं। अगर बच्चे 1 बजे स्कूल से छूटेंगे, तो वे सीधे लू के थपेड़ों और चिलचिलाती धूप का सीधा शिकार होंगे। साफ है कि यह आदेश बच्चों को गर्मी से बचाने के बजाय, उन्हें दिन की सबसे तेज धूप में बाहर धकेलने वाला साबित हो रहा है।

इंदौर प्रशासन की तार्किकता से नीमच ने क्यों नहीं ली सीख?

इस मामले में नीमच प्रशासन की कार्यप्रणाली इंदौर के मुकाबले कमजोर और अदूरदर्शी साबित हुई है। इंदौर में भी पारा तेजी से चढ़ रहा है और भीषण गर्मी पड़ रही है। लेकिन, वहां के प्रशासन ने एसी कमरों से बाहर निकलकर जमीनी हकीकत को समझा।

इंदौर कलेक्टर ने नर्सरी से 8वीं तक की कक्षाओं का समय सुबह 7 बजे से दोपहर 12 बजे तक तय किया है। इसके पीछे सीधा और स्पष्ट तर्क है—दोपहर 12 बजे के बाद धूप के साथ लू का असर घातक होने लगता है। इसलिए, बच्चों को दोपहर की भयंकर गर्मी शुरू होने से पहले ही घर सुरक्षित पहुंचा दिया जाए। यानी इंदौर प्रशासन ने बचाव का सही तरीका अपनाया, जबकि नीमच में वही पुरानी लकीर पीटी गई।

ग्राउंड जीरो रिपोर्ट: क्या कहते हैं नीमच के अभिभावक?

नीमच के एक अभिभावक ने बताया कि 1 बजे बच्चों को दोपहिया वाहन पर लाना किसी सजा से कम नहीं है।
प्रशासन को कम से कम छोटे बच्चों की छुट्टी 11:30 या 12:00 बजे तक कर देनी चाहिए…

सिर्फ रस्म अदायगी या सच में फिक्र?

नीमच प्रशासन का यह आदेश देखकर यही लगता है कि कागजों पर सिर्फ आदेश निकालने की रस्म पूरी की गई है, धरातल पर इसके असर का सटीक आंकलन नहीं किया गया। यह समझना मुश्किल नहीं है कि दोपहर 1 बजे तपती सड़कों पर ऑटो, बसों या पैदल जाने वाले बच्चों का क्या हाल होता है। डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक का सबसे ज्यादा खतरा इसी समय होता है।

अगर जिला प्रशासन वाकई बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर गंभीर है, तो उसे बिना देरी किए अपनी इस गलती को सुधारना चाहिए। इंदौर की तर्ज पर नीमच में भी स्कूलों के छूटने का समय अधिकतम दोपहर 12:00 बजे तक तय किया जाना चाहिए। 1 बजे की छुट्टी का मतलब है बच्चों को जानबूझकर भीषण गर्मी की भट्टी में झोंकना। प्रशासन को तुरंत इस आदेश की समीक्षा कर नया और तार्किक समय लागू करना चाहिए।

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FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

Q1. नीमच में स्कूलों का नया समय क्या है?

Ans. नीमच जिला प्रशासन के नए आदेश के अनुसार, जिले के सभी स्कूल अब सुबह 7:30 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक लगेंगे।

Q2. नीमच स्कूल टाइमिंग में बदलाव का आदेश कब से लागू होगा?

Ans. यह आदेश 16 अप्रैल 2026 से तत्काल प्रभाव से पूरे नीमच जिले में लागू कर दिया गया है।

Q3. नीमच और इंदौर के स्कूलों के समय में क्या अंतर है?

Ans. तेज गर्मी को देखते हुए इंदौर में स्कूलों की छुट्टी दोपहर 12 बजे कर दी गई है, जबकि नीमच में छुट्टी का समय दोपहर 1 बजे रखा गया है, जो सबसे तेज धूप का समय होता है।

Q4. क्या यह आदेश प्राइवेट स्कूलों पर भी लागू है?

Ans. हाँ, यह आदेश जिले के सभी शासकीय, अशासकीय, सीबीएसई (CBSE) और आईसीएसई (ICSE) मान्यता प्राप्त स्कूलों पर समान रूप से लागू होगा।

Q5. अगर स्कूलों का समय 1 बजे तक है, तो परीक्षाओं का क्या होगा?

Ans. जिन स्कूलों में परीक्षाएं चल रही हैं, वे अपने पूर्व निर्धारित समय सारिणी के अनुसार ही संचालित की जाएंगी।


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Aakash Sharma
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आकाश शर्मा मध्यप्रदेश के नीमच क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार और द टाइम्स ऑफ MP के संपादक हैं। उन्हें प्रिंट मीडिया में 12 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव है। लंबे समय से स्थानीय एवं जनसरोकार से जुड़े मुद्दों की रिपोर्टिंग, समाचार संपादन और समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उन्होंने स्थानीय पत्रकारिता में व्यापक अनुभव हासिल किया है।द टाइम्स ऑफ MP के माध्यम से आकाश शर्मा नीमच, मंदसौर और आसपास के क्षेत्रों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को पाठकों तक पहुंचाने का कार्य करते हैं। उनकी कवरेज में स्थानीय प्रशासन, पुलिस एवं कानून-व्यवस्था, जनसमस्याएं, नागरिक सुविधाएं, राजनीति, सामाजिक गतिविधियां, शिक्षा, कृषि, व्यापार और अन्य जनहित से जुड़े विषय शामिल हैं।उनकी संपादकीय कार्यशैली में तथ्यपरक रिपोर्टिंग, स्रोत-आधारित जानकारी, निष्पक्ष प्रस्तुति और जिम्मेदार पत्रकारिता को प्राथमिकता दी जाती है। संवेदनशील और अपराध से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग में आरोप और प्रमाणित तथ्य के बीच अंतर बनाए रखने तथा उपलब्ध आधिकारिक एवं विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर खबर प्रस्तुत करने पर विशेष ध्यान दिया जाता है।पत्रकारिता के साथ आकाश शर्मा पिछले 4 वर्षों से पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में भी कार्य कर रहे हैं। इस भूमिका में वे कानूनी जागरूकता और जनहित से जुड़े कार्यों से जुड़े रहे हैं। इसके साथ ही वे इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशन में जिला उपाध्यक्ष (District Vice President) के दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं।अनुभव 12 वर्ष — प्रिंट मीडिया एवं पत्रकारिता का अनुभव 4 वर्ष — पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में अनुभव संपादक — द टाइम्स ऑफ MP जिला उपाध्यक्ष — इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशनआकाश शर्मा का उद्देश्य स्थानीय स्तर की महत्वपूर्ण सूचनाओं को विश्वसनीय, स्पष्ट, तथ्यपरक और जिम्मेदार पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाना तथा आम नागरिकों से जुड़े मुद्दों को प्रभावी मंच प्रदान करना है।विशेषज्ञता: स्थानीय पत्रकारिता | प्रिंट मीडिया | समाचार संपादन | डिजिटल पत्रकारिता | स्थानीय समाचार रिपोर्टिंग | जनहित के मुद्दे | कानूनी जागरूकता |

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