Advertisement

जब ‘नातरा’ के फेर में सुहाग की सेज पर कातिल बनी पत्नी, प्रेमी के लिए पति का रेता गला

नातरा

मनासा। मध्यप्रदेश के नीमच जिले के मनासा क्षेत्र से सामने आया ‘नातरा’ से जुड़ा यह सनसनीखेज हत्याकांड रिश्तों, परंपराओं और अपराध की भयावह सच्चाई को उजागर करता है। इस मामले में एक पत्नी ने अपने ही पति की निर्मम हत्या कर दी—वजह बना उसका पुराना प्रेम संबंध और जबरन हुआ विवाह।

TOMP Advt-1
TOMP Advt-2

घटना: जब भरोसे का हुआ खून

22 सितंबर 2020 की दोपहर ग्राम आमद में एक ऐसा खौफनाक मंजर सामने आया, जिसने पूरे इलाके को झकझोर दिया। घर के अन्य सदस्य मजदूरी पर गए हुए थे और घर में केवल ममता बंजारा और उसका पति तूफान बंजारा मौजूद थे।

तूफान घर में आराम कर रहा था, तभी ममता ने उस पर हमला कर दिया। पहले उसने भारी लोहे के हथौड़े से उसके सिर पर वार किया। जब वह अचेत हो गया, तब उसने धारदार चाकू से उसका गला रेत दिया। यह पूरा घटनाक्रम बेहद क्रूर और सुनियोजित था।

‘नातरा’ और प्रेम संबंध बना वजह

जांच में सामने आया कि यह हत्या अचानक नहीं हुई थी, बल्कि एक सोची-समझी साजिश थी। ममता का पहले भी एक विवाह हो चुका था, जिसे छोड़कर वह मायके लौट आई थी।

गांव के ही एक व्यक्ति के साथ उसका करीब 7-8 वर्षों से प्रेम संबंध था। लेकिन परिवार ने उसकी इच्छा के विरुद्ध उसका ‘नातरा’ विवाह तूफान बंजारा से कर दिया। शादी के बाद भी ममता अपने प्रेमी के संपर्क में रही।

कॉल रिकॉर्ड्स से यह साबित हुआ कि वह अपने पति को रास्ते से हटाकर अपने प्रेमी के साथ जीवन बिताना चाहती थी। यही वजह इस जघन्य हत्या की बनी।

पुलिस जांच: सच्चाई तक पहुंचने की कहानी

इस ‘नातरा’ से जुड़े हत्याकांड को सुलझाने में पुलिस को काफी मेहनत करनी पड़ी। शुरुआत में मामला सामान्य हत्या का लग रहा था, लेकिन जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, साजिश की परतें खुलती गईं।

निरीक्षक कैलाश चंद्र चौहान और एसआई निलेश सौलंकी की टीम ने तकनीकी और मौखिक साक्ष्यों के आधार पर केस को मजबूत किया। कॉल डिटेल्स, गवाहों के बयान और घटनास्थल से मिले सबूतों ने आरोपी की सच्चाई उजागर कर दी।

न्यायालय का फैसला: उम्रकैद

मनासा न्यायालय में सुनवाई के दौरान अपर लोक अभियोजक गुलाबसिंह चंद्रावत ने इसे अत्यंत गंभीर अपराध बताया। कोर्ट ने सभी तथ्यों और साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए ममता बंजारा को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत दोषी ठहराया।

न्यायाधीश आशुतोष यादव ने उसे आजीवन कारावास और 2,000 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।

सामाजिक पहलू: ‘नातरा’ पर उठे सवाल

यह मामला केवल एक हत्या नहीं, बल्कि ‘नातरा’ जैसी सामाजिक प्रथा पर भी सवाल खड़े करता है। जब किसी व्यक्ति की इच्छा के विरुद्ध विवाह किया जाता है, तो उसके दुष्परिणाम कई बार खतरनाक हो सकते हैं।

हालांकि, किसी भी परिस्थिति में हत्या को सही नहीं ठहराया जा सकता। यह घटना समाज के लिए एक कड़ा संदेश है कि रिश्तों में पारदर्शिता और सहमति जरूरी है।

ताज़ा ख़बरों का अपडेट सीधा अपने फोन पर पाने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें