नीमच। मध्यप्रदेश की बहुचर्चित लाड़ली लक्ष्मी योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में नीमच जिला इस बार पूरे प्रदेश के लिए एक मिसाल बनकर उभरा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में जिले ने निर्धारित लक्ष्य से भी आगे बढ़ते हुए 101% उपलब्धि दर्ज की है, जो प्रशासनिक दक्षता और जमीनी स्तर पर किए गए प्रयासों का स्पष्ट प्रमाण है।
जिले को कुल 2913 नवीन पंजीयन का लक्ष्य दिया गया था, लेकिन अधिकारियों और मैदानी अमले की सक्रियता के चलते 2948 बालिकाओं को योजना से जोड़ा गया। यह आंकड़ा दर्शाता है कि लाड़ली लक्ष्मी योजना अब केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का मजबूत माध्यम बन चुकी है।
लक्ष्य से आगे बढ़ा नीमच
जिला कार्यक्रम अधिकारी अंकिता पंड्या के अनुसार, इस वर्ष न केवल लक्ष्य पूरा हुआ बल्कि उससे अधिक बालिकाओं को लाभान्वित किया गया। यही कारण है कि नीमच जिला 101% उपलब्धि हासिल करने में सफल रहा।
वहीं, छात्रवृत्ति वितरण के मामले में भी जिला पीछे नहीं रहा। वर्ष 2025-26 में कुल 4048 बालिकाओं को छात्रवृत्ति राशि दी गई, जिससे उनकी शिक्षा में निरंतरता बनी रही।
शिक्षा को बढ़ावा देने वाली योजना
लाड़ली लक्ष्मी योजना का मुख्य उद्देश्य बालिकाओं की शिक्षा को प्रोत्साहित करना और उनके भविष्य को सुरक्षित बनाना है। इस योजना के तहत विभिन्न कक्षाओं में प्रवेश के समय आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है:
- कक्षा 6वीं में प्रवेश पर ₹2,000
- कक्षा 9वीं में प्रवेश पर ₹4,000
- कक्षा 11वीं में प्रवेश पर ₹6,000
- कक्षा 12वीं में प्रवेश पर ₹6,000
- उच्च शिक्षा में प्रवेश पर ₹12,500
- कोर्स पूर्ण करने पर ₹12,500
इसके अलावा, 21 वर्ष की आयु पूर्ण होने पर बालिका को ₹1 लाख की एकमुश्त राशि दी जाती है, जिससे वह आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ा सके।
क्षेत्रवार आंकड़ों में भी मजबूती
नीमच जिले के अलग-अलग विकासखंडों में भी योजना का असर साफ दिखाई दिया।
- नीमच ग्रामीण – 734 बालिकाएं
- मनासा – 711 बालिकाएं
- जावद – 555 बालिकाएं
- रतनगढ़ – 333 बालिकाएं
- रामपुरा – 314 बालिकाएं
- नीमच शहरी – 301 बालिकाएं
इन सभी को मिलाकर कुल 2948 बालिकाओं को चिन्हित कर योजना का लाभ दिया गया।
प्रशासन की सख्ती और मॉनिटरिंग
कलेक्टर हिमांशु चंद्रा ने महिला एवं बाल विकास विभाग को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि कोई भी पात्र बालिका योजना से वंचित न रहे। उन्होंने समय-समय पर समीक्षा कर यह सुनिश्चित किया कि लाभ सीधे हितग्राहियों तक पहुंचे।
योजना वर्ष 2007 में शुरू हुई थी और अब 19 वर्षों में यह लाखों परिवारों के लिए सहारा बन चुकी है। नीमच जिले में भी पिछले वर्षों में चिन्हित बालिकाओं को नियमित रूप से छात्रवृत्ति का भुगतान किया गया है, जिससे शिक्षा के प्रति सकारात्मक माहौल बना है।
सामाजिक बदलाव की दिशा में बड़ा कदम
लाड़ली लक्ष्मी योजना केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बेटियों के प्रति समाज की सोच बदलने का एक सशक्त माध्यम बन रही है। बालिका शिक्षा, आत्मनिर्भरता और सम्मान को बढ़ावा देने में यह योजना अहम भूमिका निभा रही है।
नीमच जिले की यह उपलब्धि दर्शाती है कि यदि प्रशासनिक इच्छाशक्ति और सही क्रियान्वयन हो, तो सरकारी योजनाएं वास्तव में लोगों के जीवन में बदलाव ला सकती हैं।
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