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पट्टा भूमि अतिक्रमण के नाम पर तालाब खुदाई में मिट्टी गायब, किसानों की कलेक्टर से गुहार

पट्टा भूमि अतिक्रमण

नीमच । नीमच जिले के ग्राम सावन में पट्टा भूमि अतिक्रमण का मामला अब तेजी से तूल पकड़ता जा रहा है। वर्षों से अपनी जमीन पर खेती कर रहे दो किसानों ने आरोप लगाया है कि उनकी पट्टे की भूमि पर न केवल अवैध कब्जा किया गया, बल्कि तालाब खुदाई के नाम पर बड़े स्तर पर मिट्टी का अवैध उत्खनन भी किया जा रहा है। इस पूरे मामले को लेकर पीड़ित किसान कलेक्टर की जनसुनवाई में पहुंचे और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की।

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शिकायतकर्ता जेतराम पिता देवाजी और प्रकाश पिता स्वर्गीय मूलचंद ने बताया कि वर्ष 2002 में उन्हें शासन द्वारा करीब 1 हेक्टेयर भूमि (सर्वे नंबर 2352 एवं 2352/मिन-2) पट्टे पर आवंटित की गई थी। तब से वे लगातार इस जमीन पर खेती करते आ रहे थे और उनकी आजीविका पूरी तरह इसी पर निर्भर रही है।

अधबटाई से शुरू हुआ विवाद

पीड़ितों के अनुसार, उन्होंने कुछ समय पहले गांव के ही बगदीराम गुर्जर को अधबटाई पर खेती करने के लिए जमीन दी थी। शुरुआत में सब कुछ सामान्य रहा और फसल का बंटवारा भी तय नियमों के अनुसार होता रहा। लेकिन बगदीराम की मृत्यु के बाद हालात बदल गए।

बताया गया कि उसके बेटे गोविंद उर्फ पियुष ने धीरे-धीरे जमीन पर पूर्ण नियंत्रण कर लिया और अब वह फसल का हिस्सा देने से भी साफ इनकार कर रहा है। पीड़ितों का कहना है कि यह सीधा पट्टा भूमि अतिक्रमण का मामला है, जिसमें उनकी कानूनी जमीन पर अवैध कब्जा कर लिया गया है।

तालाब खुदाई के नाम पर खेल

शिकायत में एक और गंभीर आरोप लगाया गया है। पीड़ितों के मुताबिक, आरोपी द्वारा ‘बलराम योजना’ के तहत तालाब खुदाई कराई जा रही है, लेकिन इस योजना का इस्तेमाल केवल दिखावे के लिए किया जा रहा है। असल में बड़ी मात्रा में मिट्टी निकालकर उसे अवैध रूप से बेचा जा रहा है।

इस अवैध उत्खनन से जमीन की उपजाऊ परत खत्म हो रही है और भविष्य की खेती पर संकट मंडरा रहा है। किसानों का कहना है कि यह पूरा मामला भी पट्टा भूमि अतिक्रमण का हिस्सा है, जिसमें उनकी जमीन का आर्थिक दोहन किया जा रहा है।

विरोध करने पर धमकी

पीड़ितों ने यह भी आरोप लगाया कि जब उन्होंने इस पूरे मामले का विरोध किया, तो आरोपी द्वारा उन्हें गाली-गलौज की गई और जान से मारने की धमकी दी गई। इतना ही नहीं, उन्हें पुलिस कार्रवाई का डर दिखाकर खेत में जाने से भी रोका जा रहा है।

इस तरह के हालात में किसान खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं और अपनी ही जमीन पर जाने से डर रहे हैं।

प्रशासन पर उठे सवाल

मामले का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि पीड़ितों ने स्थानीय प्रशासन पर भी लापरवाही के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उन्होंने पटवारी सहित कई अधिकारियों को शिकायत दी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

पीड़ितों का आरोप है कि संबंधित पटवारी आरोपी का पक्ष ले रहा है और जानबूझकर मामले को दबाने की कोशिश कर रहा है। इससे पट्टा भूमि अतिक्रमण के इस मामले में प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

कलेक्टर से न्याय की उम्मीद

अंततः पीड़ित किसान कलेक्टर की जनसुनवाई में पहुंचे और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच तथा सख्त कार्रवाई की मांग की। उनका कहना है कि यदि जल्द ही इस पट्टा भूमि अतिक्रमण मामले में हस्तक्षेप नहीं किया गया, तो उनकी जमीन पूरी तरह हाथ से निकल सकती है।

अब यह देखना अहम होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले में कितनी तत्परता दिखाता है और पीड़ितों को न्याय मिल पाता है या नहीं।

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