1 साल बाद बुजुर्ग पिता को मिला अपना हक, फादर्स-डे पर सामने आई भावुक कर देने वाली कहानी
Reported by: News Desk | Edited by: आकाश शर्मा
22 जून 2026, (अपडेटेड 22 जून 2026, 10:47 पूर्वाह्न IST)

जीरन (Jeeran News)। एक साल तक अपनों से दूर रहने को मजबूर रहे एक बुजुर्ग पिता की जिंदगी में फादर्स-डे पर ऐसा मोड़ आया, जिसकी उन्होंने शायद लंबे समय से उम्मीद लगा रखी थी। कभी आश्रमों में रात गुजारने और कभी मंदिरों में भोजन मांगकर जीवन बिताने वाले इस बुजुर्ग पिता को आखिरकार उनका घर और जमीन वापस मिल गई। पुलिस की पहल से न केवल लंबे समय से चला आ रहा विवाद सुलझा, बल्कि बिखरता परिवार भी फिर से एकजुट हो गया।

जानकारी के अनुसार जीरन क्षेत्र के ग्राम कोटड़ी इस्तमुरार निवासी बाबूलाल धोबी पिछले करीब एक वर्ष से अपने परिवार से अलग रह रहे थे। उनका आरोप था कि बेटे और बहू ने उनके साथ मारपीट कर उन्हें घर से बाहर निकाल दिया था। इसके बाद उनके सामने जीवनयापन का संकट खड़ा हो गया और उन्हें गांव छोड़कर दूसरे शहरों का रुख करना पड़ा।

आश्रमों और मंदिरों में गुजारी जिंदगी

घर से दूर होने के बाद बुजुर्ग पिता ने हरिद्वार और वृंदावन के विभिन्न आश्रमों में शरण ली। वहां वे जैसे-तैसे अपना जीवन गुजारते रहे। कई बार मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर मिलने वाले भोजन के सहारे ही उनका दिन निकलता था। परिवार से दूर रहने का दर्द उनके चेहरे पर साफ दिखाई देता था, लेकिन उन्हें उम्मीद थी कि एक दिन हालात बदलेंगे और वे फिर अपने घर लौट सकेंगे।

करीब तीन दिन पहले बाबूलाल धोबी इसी उम्मीद के साथ अपने गांव वापस लौटे कि समय के साथ परिवार का गुस्सा शांत हो गया होगा। उन्हें लगा कि अब शायद उन्हें दोबारा अपने घर में जगह मिल जाएगी। लेकिन गांव पहुंचने के बाद जो हुआ, उसने उनकी उम्मीदों को एक बार फिर झटका दे दिया।

घर लौटे तो फिर नहीं मिली जगह

बताया जाता है कि गांव लौटने पर बेटे और बहू ने उन्हें दोबारा घर में रहने की अनुमति नहीं दी। इसके बाद बुजुर्ग पिता लगातार चार दिन तक जीरन क्षेत्र के मंदिरों में रात बिताते रहे। भोजन और रहने की व्यवस्था नहीं होने के कारण उनकी स्थिति लगातार खराब होती गई।

चार दिन तक भटकने के बाद आखिरकार उन्होंने प्रशासन से मदद मांगने का फैसला किया। वे अपनी समस्या लेकर पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे और पूरी घटना की जानकारी अधिकारियों को दी।

एसपी ने दिखाई संवेदनशीलता

मामले की जानकारी मिलने पर पुलिस अधीक्षक राजेश व्यास ने इसे गंभीरता से लिया। उन्होंने तत्काल जीरन थाना प्रभारी को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। पुलिस अधिकारियों ने सबसे पहले बुजुर्ग पिता की स्थिति को देखते हुए भोजन और आवश्यक सहायता की व्यवस्था की। पुलिस के अनुसार बाबूलाल कई दिनों से ठीक तरह से भोजन नहीं कर पाए थे। ऐसे में मानवीय संवेदनाओं को प्राथमिकता देते हुए उनकी मदद की गई।

इसके बाद मामले के समाधान के लिए बेटे दिलीप को थाने बुलाया गया, ताकि दोनों पक्षों की बात सुनकर उचित रास्ता निकाला जा सके।

थाने में हुई समझाइश, बदले हालात

जीरन थाने में पुलिस की मौजूदगी में पिता और पुत्र के बीच बातचीत कराई गई। दोनों पक्षों को धैर्यपूर्वक सुना गया और परिवार के महत्व को समझाते हुए काउंसिलिंग की गई। चर्चा के दौरान बेटे ने अपनी गलती स्वीकार की और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न नहीं होने देने का भरोसा दिलाया। पुलिस अधिकारियों ने भी परिवार के सदस्यों को बुजुर्गों के सम्मान और उनकी जिम्मेदारी के बारे में समझाया।

काफी देर चली बातचीत के बाद दोनों पक्ष समझौते के लिए तैयार हो गए। इसके साथ ही लंबे समय से चला आ रहा विवाद समाप्त होने की दिशा में बढ़ गया।

आखिरकार मिला घर और जमीन का हक

पुलिस की मौजूदगी में हुए समझौते के बाद बुजुर्ग पिता बाबूलाल धोबी को उनका घर और जमीन वापस दिलाई गई। परिवार ने भी उन्हें सम्मानपूर्वक घर में रखने की सहमति जताई। एक साल तक भटकने और अपनों से दूर रहने के बाद जब बाबूलाल अपने घर लौटे तो यह पल उनके लिए भावुक कर देने वाला था। फादर्स-डे के दिन हुई यह कार्रवाई केवल एक प्रशासनिक पहल नहीं, बल्कि रिश्तों को फिर से जोड़ने का प्रयास भी बन गई।

क्षेत्र में हो रही पुलिस की सराहना

स्थानीय लोगों के अनुसार यदि समय रहते पुलिस हस्तक्षेप नहीं करती तो मामला और अधिक गंभीर हो सकता था। लोगों ने पुलिस की संवेदनशीलता और सकारात्मक पहल की सराहना की है। फिलहाल बुजुर्ग पिता अपने परिवार के साथ वापस घर पहुंच चुके हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने यह संदेश भी दिया है कि संवाद, समझाइश और संवेदनशील प्रयासों से कई पारिवारिक विवादों का समाधान संभव है।


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Aakash Sharma
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आकाश शर्मा मध्यप्रदेश के नीमच क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार और द टाइम्स ऑफ MP के संपादक हैं। उन्हें प्रिंट मीडिया में 12 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव है। लंबे समय से स्थानीय एवं जनसरोकार से जुड़े मुद्दों की रिपोर्टिंग, समाचार संपादन और समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उन्होंने स्थानीय पत्रकारिता में व्यापक अनुभव हासिल किया है।द टाइम्स ऑफ MP के माध्यम से आकाश शर्मा नीमच, मंदसौर और आसपास के क्षेत्रों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को पाठकों तक पहुंचाने का कार्य करते हैं। उनकी कवरेज में स्थानीय प्रशासन, पुलिस एवं कानून-व्यवस्था, जनसमस्याएं, नागरिक सुविधाएं, राजनीति, सामाजिक गतिविधियां, शिक्षा, कृषि, व्यापार और अन्य जनहित से जुड़े विषय शामिल हैं।उनकी संपादकीय कार्यशैली में तथ्यपरक रिपोर्टिंग, स्रोत-आधारित जानकारी, निष्पक्ष प्रस्तुति और जिम्मेदार पत्रकारिता को प्राथमिकता दी जाती है। संवेदनशील और अपराध से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग में आरोप और प्रमाणित तथ्य के बीच अंतर बनाए रखने तथा उपलब्ध आधिकारिक एवं विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर खबर प्रस्तुत करने पर विशेष ध्यान दिया जाता है।पत्रकारिता के साथ आकाश शर्मा पिछले 4 वर्षों से पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में भी कार्य कर रहे हैं। इस भूमिका में वे कानूनी जागरूकता और जनहित से जुड़े कार्यों से जुड़े रहे हैं। इसके साथ ही वे इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशन में जिला उपाध्यक्ष (District Vice President) के दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं।अनुभव 12 वर्ष — प्रिंट मीडिया एवं पत्रकारिता का अनुभव 4 वर्ष — पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में अनुभव संपादक — द टाइम्स ऑफ MP जिला उपाध्यक्ष — इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशनआकाश शर्मा का उद्देश्य स्थानीय स्तर की महत्वपूर्ण सूचनाओं को विश्वसनीय, स्पष्ट, तथ्यपरक और जिम्मेदार पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाना तथा आम नागरिकों से जुड़े मुद्दों को प्रभावी मंच प्रदान करना है।विशेषज्ञता: स्थानीय पत्रकारिता | प्रिंट मीडिया | समाचार संपादन | डिजिटल पत्रकारिता | स्थानीय समाचार रिपोर्टिंग | जनहित के मुद्दे | कानूनी जागरूकता |

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