नीमच। मध्य प्रदेश के नीमच जिले के जावद थाना क्षेत्र से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने मजदूरों की सुरक्षा और उनके अधिकारों को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। खेत में बंधक बनाकर मारपीट के इस मामले में एक मजदूर ने आरोप लगाया है कि करीब 20 महीने की बकाया मजदूरी मांगने पर उसे बहला-फुसलाकर खेत पर ले जाया गया, जहां पूरी रात एक टीन शेड के कमरे में बंद रखकर बेल्ट और लाठियों से बेरहमी से पीटा गया। पीड़ित का उपचार जिला अस्पताल में जारी है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस के अनुसार, मामला पीड़ित की रिपोर्ट पर दर्ज किया गया है और आरोपों की जांच की जा रही है।
दो साल तक किया काम, फिर भी नहीं मिली पूरी मजदूरी
एफआईआर के अनुसार, पीड़ित सुरेश जाट (35) निवासी खड़ावदा, थाना कुकड़ेश्वर ने बताया कि वह पिछले लगभग दो वर्षों से अशोक जाट का कुल्फी टेम्पो चलाता था। उसकी मासिक मजदूरी ₹12,000 तय थी।शिकायत में आरोप लगाया गया है कि करीब 20 महीने तक काम करने के दौरान उसे केवल ₹20,000 का ही भुगतान किया गया। बाकी मजदूरी बार-बार मांगने के बावजूद नहीं दी गई। पीड़ित का कहना है कि हर बार उसे किसी न किसी बहाने से टाल दिया जाता था।
काम छोड़ा तो कथित तौर पर रची गई योजना
एफआईआर के मुताबिक, जब सुरेश ने दोबारा अपनी मेहनत की कमाई मांगी तो कथित रूप से उसे साफ कह दिया गया कि अब कोई पैसा नहीं मिलेगा। इसके बाद उसने काम छोड़ दिया और नीमच शहर के विजय टॉकीज चौराहे के पास स्थित एक चाय की गुमटी पर काम शुरू कर दिया। पीड़ित का आरोप है कि 23 जुलाई की रात करीब 9 बजे अशोक जाट, हरीश जाट और पप्पू बैरागी एक इको वाहन से वहां पहुंचे। उन्होंने कथित तौर पर भरोसा दिलाया कि दो दिन के भीतर पूरा बकाया भुगतान कर दिया जाएगा और उसे फिर से काम पर रख लिया जाएगा। इस भरोसे में सुरेश उनके साथ चला गया।
खेत पहुंचते ही बदल गया पूरा माहौल
शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने उसे अशोक जाट के खेत पर पहुंचाया। वहां पहुंचने के बाद कथित रूप से गाली-गलौज शुरू हो गई। आरोप है कि उसका मोबाइल फोन छीनकर तोड़ दिया गया ताकि वह किसी से संपर्क न कर सके। इसके बाद उसे खेत पर बने टीन शेड के कमरे में ले जाकर बाहर से बंद कर दिया गया। यहीं से कथित तौर पर उसके साथ मारपीट का सिलसिला शुरू हुआ।
बेल्ट और लाठियों से बेरहमी से पीटने का आरोप
पीड़ित ने एफआईआर में आरोप लगाया है कि अशोक जाट ने थ्रेशर मशीन में इस्तेमाल होने वाली बेल्ट से उसकी पिटाई की। शिकायत के अनुसार लाठियों से भी मारपीट की गई। मारपीट में पीड़ित की पीठ, दोनों हाथ, कोहनियां, गर्दन और दाहिने पैर पर गंभीर चोटें आईं। परिजनों का कहना है कि शरीर पर चोट के कई निशान हैं और फ्रैक्चर होने की भी आशंका जताई जा रही है। पीड़ित ने शिकायत में आरोप लगाया है कि मारपीट के दौरान उससे कहा गया कि यदि उसने दोबारा मजदूरी मांगी या काम छोड़ने की कोशिश की तो उसे जान से मार दिया जाएगा। एफआईआर के अनुसार, आरोपियों ने उसे पूरी रात टीन शेड के कमरे में बंद रखा।
सुबह परिजनों ने पहुंचकर छुड़ाया
शिकायत के अनुसार, अगले दिन सुबह करीब 10 बजे उसकी बहन के ससुर बदीलाल जाट और जीजा मुकेश जाट खेत पर पहुंचे। उन्होंने कमरे का दरवाजा खुलवाया और सुरेश को वहां से बाहर निकाला। इसके बाद पीड़ित ने अपने भाई विक्रम जाट सहित अन्य परिजनों को पूरी घटना बताई और सभी जावद थाने पहुंचे, जहां पुलिस को शिकायत दी गई।
इन धाराओं में दर्ज हुआ मामला
जावद थाना पुलिस ने शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की निम्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया है—
- धारा 127(2) – गलत तरीके से बंधक बनाना
- धारा 296(b) – गाली-गलौज
- धारा 115(2) – जानबूझकर चोट पहुंचाना
- धारा 351(3) – आपराधिक धमकी
- धारा 3(5) – साझा आपराधिक कृत्य
पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है। जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मजदूरों की सुरक्षा पर उठे सवाल
यह मामला केवल कथित मारपीट का नहीं, बल्कि मजदूरी भुगतान और श्रमिकों की सुरक्षा से जुड़े गंभीर सवाल भी खड़े करता है। यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह श्रमिकों के साथ होने वाले शोषण का गंभीर उदाहरण माना जाएगा। हालांकि, मामले में दर्ज सभी आरोप शिकायतकर्ता के बयान पर आधारित हैं और इनकी पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही होगी।
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