नीमच : मध्य प्रदेश के नीमच जिले में आटा-तुम्बा रोड पर उस वक्त एक बड़ा सस्पेंस बन गया, जब एक सामान्य सी दिखने वाली सफेद मारुति स्विफ्ट कार ने पुलिस की नाकाबंदी देखकर अचानक अपनी चाल बदल ली। पुलिस को शक हुआ, और जब उस कार को रुकवाकर उसकी सघन तलाशी ली गई, तो उसके भीतर जो मिला, उसने मौके पर मौजूद अधिकारियों के होश उड़ा दिए। यह सिर्फ एक यात्री कार नहीं थी, बल्कि इसमें मौत का वह सामान भरा था, जो युवा पीढ़ी को बर्बाद करने के लिए ले जाया जा रहा था। इस पूरी घटना ने इलाके में सनसनी फैला दी है और अवैध मादक पदार्थ के एक बड़े और गहरे नेटवर्क की ओर इशारा किया है।
रात का अंधेरा और खाकी का पहरा: कैसे खुला राज?
22 जुलाई 2026 की शांत शाम को जावद थाना पुलिस की टीम गुठलाई चौराहे के पास नियमित चेकिंग कर रही थी। सब कुछ एकदम सामान्य लग रहा था। तभी दूर से एक सफेद रंग की मारुति स्विफ्ट कार आती हुई दिखाई दी। पुलिस की वर्दी और बैरिकेड्स देखकर चालक ने पल भर के लिए गाड़ी की रफ्तार धीमी की, लेकिन फिर उसकी घबराहट साफ नजर आने लगी। उसने कार को तेजी से निकालकर भागने की कोशिश की। पुलिस की पैनी नजरों ने इस असामान्य गतिविधि को तुरंत भांप लिया।
बिना एक भी सेकंड गंवाए, पुलिस टीम ने कार को चारों तरफ से घेर लिया। चालक के चेहरे पर उड़ती हवाइयां और उसके माथे का पसीना साफ बता रहा था कि दाल में कुछ काला है या फिर पूरी दाल ही काली है। जब पुलिस ने उससे पूछताछ की, तो वह सवालों के गोलमोल जवाब देने लगा। इसी घबराहट ने पुलिस का शक यकीन में बदल दिया।
डिग्गी खुलते ही सामने आई खौफनाक सच्चाई
जब पुलिस ने चालक को बाहर निकाला और कार की बारूकी से तलाशी शुरू की, तो असली सस्पेंस कार की डिग्गी में छिपा था। जैसे ही डिग्गी का दरवाजा खुला, पुलिस टीम भी एक पल के लिए दंग रह गई। अंदर बोरों में ठसाठस कुछ भरा हुआ था। जब इन संदिग्ध बोरों को खोलकर चेक किया गया, तो उसमें भारी मात्रा में अवैध मादक पदार्थ (डोडाचूरा) मौजूद था।
यह कोई छोटी-मोटी खेप नहीं थी। मौके पर जब तौल का कांटा मंगवाया गया, तो इसका वजन 53 किलोग्राम निकला। पुलिस अधिकारियों ने तुरंत इस पूरी खेप को जब्त कर लिया। इस बरामद किए गए मादक पदार्थ की अनुमानित कीमत बाजार में 7 लाख 95 हजार रुपये है। इसके साथ ही तस्करी में इस्तेमाल की जा रही 8 लाख रुपये की मारुति स्विफ्ट कार को भी पुलिस ने कुर्क कर लिया है। कुल मिलाकर यह पूरा भंडाफोड़ करीब 16 लाख रुपये के अवैध कारोबार का है।
कौन है इस सफेद खेल का मोहरा?
पुलिस की गिरफ्त में आए इस तस्कर की पहचान राहुल बंजारा के रूप में हुई है। 26 वर्षीय राहुल पिता बलराम बंजारा, नीमच के ही मनासा थाना क्षेत्र के किरपुरिया गांव का रहने वाला है। एक युवा होने के बावजूद वह इतने बड़े मादक पदार्थ तस्करी के दलदल में कैसे फंसा, यह एक बड़ा सवाल है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि राहुल महज एक मोहरा है या फिर इस पूरे सिंडिकेट का कोई अहम सूत्रधार।
पुलिस ने आरोपी राहुल बंजारा के खिलाफ जावद थाने में अपराध क्रमांक 336/2026 के तहत मामला दर्ज कर लिया है। यह कार्रवाई एनडीपीएस (NDPS) एक्ट 1985 की सख्त धारा 8/15 के तहत की गई है। इस अधिनियम के तहत अवैध मादक पदार्थ की तस्करी एक अत्यंत गंभीर और गैर-जमानती अपराध है, जिसमें कड़ी सजा का स्पष्ट प्रावधान है।
तस्करी का वह नेटवर्क, जो अभी बेनकाब होना बाकी है
यह जब्ती कई गंभीर सवाल खड़े करती है, जिनका जवाब मिलना अभी बाकी है। 53 किलो मादक पदार्थ इतनी आसानी से कहां से लोड किया गया? इसका असली सप्लायर कौन है? और सबसे बड़ा सस्पेंस यह है कि यह मौत की खेप आखिर किसे डिलीवर की जानी थी? विशेषकर नीमच और मंदसौर का क्षेत्र, हमेशा से ही अफीम और उससे जुड़े मादक पदार्थ की तस्करी का हॉटस्पॉट रहा है। यहां से अक्सर राजस्थान, पंजाब और हरियाणा के लिए मादक पदार्थों की बड़ी खेप भेजी जाती है।
जांच दल अब राहुल की कॉल डिटेल्स खंगाल रहा है। उसके मोबाइल फोन से कई सफेदपोश तस्करों और बड़े माफियाओं के राज बेनकाब होने की उम्मीद है। यह पूछताछ यह तय करेगी कि इस सिंडिकेट की जड़ें कितनी गहरी हैं और इस सफेद कार के पीछे और कितने काले चेहरे छिपे हैं।
पुलिस की मुस्तैदी ने टाला बड़ा खतरा
इस पूरे ऑपरेशन की सफलता का श्रेय जावद थाना पुलिस की मुस्तैदी और उनकी ‘नो-टॉलरेंस’ नीति को जाता है। पुलिस अधीक्षक राजेश व्यास और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हेमलता अग्रवाल के सख्त निर्देशन में यह कार्रवाई अंजाम दी गई। एसडीओपी हर्ष राठौर के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी निरीक्षक मनोज सिंह जादौन, उपनिरीक्षक लक्ष्मण सिंह चौहान, आरक्षक अर्जुन मालवीय, जितेंद्र गुर्जर, सुरेश धनगर और पंकज कुमावत ने जिस तत्परता से इस संदिग्ध कार को रोका, उसी वजह से इतनी बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ बाजार में पहुंचने से पहले ही पकड़ लिया गया।
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