नीमच। शहर की अंबेडकर कॉलोनी में अतिक्रमण हटाने पहुंची नगरपालिका की टीम को मंगलवार को मौके पर विवाद की स्थिति बनने के बाद बिना कार्रवाई किए लौटना पड़ा। कार्रवाई को लेकर दो पक्ष आमने-सामने आ गए, जिसके चलते मौके पर कुछ देर तक कहासुनी की स्थिति बनी रही। नीमच अंबेडकर कॉलोनी अतिक्रमण मामले में एक पक्ष ने मुख्य रास्ते को बाधित करने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की, जबकि दूसरे पक्ष ने किसी एक पक्ष के खिलाफ एकतरफा कार्रवाई का विरोध किया। विवाद बढ़ने की स्थिति को देखते हुए नगरपालिका अमले ने मौके पर कार्रवाई नहीं की।
एक पक्ष ने निर्माण से रास्ता बाधित होने का लगाया आरोप
यादव समाज अध्यक्ष मनीष गोयल ने आरोप लगाया कि नारायणगिरी बाबा की भूमि पर पक्का निर्माण कर मुख्य रास्ते को बाधित किया जा रहा है। उन्होंने नगरपालिका से संबंधित अतिक्रमण हटाकर रास्ता सुचारु कराने की मांग की। मनीष गोयल का कहना है कि संबंधित भूमि नगरपालिका की है और यहां बाउंड्रीवॉल तथा मुख्य द्वार बनाए जाने का प्रस्ताव है। इसी आधार पर उन्होंने नगरपालिका से कार्रवाई की मांग रखी।
दूसरे पक्ष ने कहा- कार्रवाई हो तो सभी मामलों में हो
मौके पर मौजूद अजेश जाट ने नगरपालिका की कार्रवाई पर आपत्ति नहीं होने की बात कही, लेकिन एकपक्षीय कार्रवाई का विरोध किया। उनका कहना था कि क्षेत्र में जहां-जहां अतिक्रमण की शिकायतें हैं, वहां सभी मामलों में समान रूप से कार्रवाई होनी चाहिए। अजेश जाट ने अपने कब्जे से संबंधित पुराने दस्तावेज और शिकायतों के साक्ष्य उपलब्ध होने का दावा भी किया। इस दौरान दोनों पक्ष अपनी-अपनी बात रखते रहे और मौके पर विवाद की स्थिति बन गई।
दस्तावेजों की जांच के बाद हो सकती है आगे की कार्रवाई
नीमच अंबेडकर कॉलोनी अतिक्रमण मामले में विवाद की स्थिति बनने के बाद नगरपालिका का अमला बिना कार्रवाई किए वापस लौट गया। अब संबंधित दस्तावेजों और मौके की वास्तविक स्थिति की जांच के बाद आगे की कार्रवाई किए जाने की संभावना है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार नगरपालिका की ओर से अगली कार्रवाई की कोई निश्चित तारीख सामने नहीं आई है। भूमि, निर्माण और रास्ते से जुड़े दावों की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
मामले की प्रमुख बातें
- अंबेडकर कॉलोनी में नगरपालिका टीम अतिक्रमण हटाने पहुंची थी।
- कार्रवाई को लेकर दो पक्ष आमने-सामने आ गए।
- एक पक्ष ने मुख्य रास्ता बाधित किए जाने का आरोप लगाया।
- दूसरे पक्ष ने एकपक्षीय कार्रवाई का विरोध किया।
- पुराने दस्तावेज और शिकायतों के साक्ष्य होने का दावा किया गया।
- विवाद के बाद नगरपालिका अमला बिना कार्रवाई लौट गया।
- दस्तावेजों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई संभव है।
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