पर्यावरण का ‘ज़हर’! ‘कृपा बायोटेक’ पर लगे गंभीर आरोप; 2 गायों की मौत, मछलियाँ मरीं, फसलें सूखीं—ग्रामीणों का हल्ला बोल

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नीमच/मंदसौर: औद्योगिक विकास के नाम पर पर्यावरण को पलीता लगाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। मंदसौर जिले के चंगेरी गाँव में संचालित कृपा बायोटेक फैक्ट्री पर नीमच के सिमखेडा और आसपास के ग्रामीणों ने ‘जहरीला प्रदूषण’ फैलाने का सीधा आरोप लगाया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, शनिवार को ग्राम पंचायत चल्दु के सरपंच महेंद्र सिंह शक्तावत के नेतृत्व में आक्रोशित ग्रामीणों ने नीमच कलेक्टर कार्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया और फैक्ट्री के तत्काल संचालन पर रोक लगाने की मांग की।

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डबल अटैक: जहर नदी में, धमकी ग्रामीणों को

ग्रामीणों का आरोप है कि कृपा बायोटेक कंपनी बिना किसी पर्यावरणीय अनुमति और ग्राम पंचायत की सहमति के धड़ल्ले से उत्पादन कर रही है। फैक्ट्री से निकलने वाला खतरनाक रासायनिक अपशिष्ट सीधे रेतम नदी और गाँव के तालाबों में छोड़ा जा रहा है, जिससे पूरा जल तंत्र दूषित हो गया है।

  • जनजीवन पर संकट: जहरीले पानी के कारण गाँव के तालाबों में सैकड़ों मछलियां मर चुकी हैं। सबसे भयावह बात यह है कि इसी अपशिष्ट जल के प्रभाव से दो गायों की भी दर्दनाक मृत्यु हो चुकी है, जिससे पशुधन पर सीधा खतरा मंडरा रहा है।
  • फसलें बर्बाद: खेतों की सिंचाई के लिए उपयोग किए जाने वाले जल स्रोत भी प्रदूषित हो चुके हैं, जिसके चलते फसलें सूखने लगी हैं।
  • हवा में ज़हर: ग्रामीणों ने शिकायत की है कि वातावरण में तीव्र रासायनिक गंध फैली हुई है, जिससे गाँव में सांस लेना तक दूभर हो गया है।

धूल फाँक रहे ग्रामीण! सड़क भी चटकी

ग्रामीणों ने फैक्ट्री से जुड़ी भारी वाहनों की आवाजाही पर भी कड़ा विरोध जताया है। रोजाना दर्जनों ट्रकों के गुजरने से सिमखेडा गाँव की मुख्य सड़क पूरी तरह से टूटकर गड्ढों में तब्दील हो गई है। धूल और बदहाल सड़क ने ग्रामीणों का जीना मुहाल कर दिया है।

“झूठे केस में फंसाने की धमकी मिली”

सरपंच महेंद्र सिंह शक्तावत ने बताया कि जब 31 अक्टूबर को ग्रामीणों ने फैक्ट्री प्रबंधन से बात करने की कोशिश की, तो समाधान देने के बजाय उन्हें धमकी दी गई कि यदि शिकायत की गई तो उन्हें झूठे मुकदमों में फंसा दिया जाएगा। सरपंच ने दो टूक कहा, “फैक्ट्री संचालक ‘ट्रायल’ के नाम पर बिना पर्यावरण अनुमति के संचालन कर रहे हैं। हम इस गुंडागर्दी और पर्यावरण से खिलवाड़ को बर्दाश्त नहीं करेंगे।”

कलेक्टर से कठोरतम कार्रवाई की मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल निम्नलिखित माँगे पूरी करने की अपील की है:

  1. फैक्ट्री के संचालन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए।
  2. पर्यावरण विभाग से फैक्ट्री की गहन और निष्पक्ष जाँच करवाई जाए।
  3. क्षतिग्रस्त सड़क की तत्काल मरम्मत करवाई जाए।
  4. प्रभावित किसानों और मृत पशुधन के लिए उचित मुआवजा दिया जाए।

ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही कठोर कार्रवाई नहीं की गई, तो वे सामूहिक आंदोलन करने को बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। यह मामला औद्योगिक इकाइयों द्वारा पर्यावरण नियमों के उल्लंघन और स्थानीय जनजीवन की सुरक्षा को लेकर एक गंभीर सवाल खड़ा करता है।